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Republic Day 2026: कौन हैं Ursula Von Der? जिनके रसूख के आगे झुके ट्रंप, 26 जनवरी पर आएंगी तिरंगा फहराने

Republic Day 2026: जैसी की भारत की परम्परा रही है कि हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर एक खास मेहमान नई दिल्ली में शिरकत करता है और गणतंत्र दिवस की परेड का साक्षी बनता है। लेकिन इस बार का गणतंत्र दिवस खास है क्योंकि इस बार एक नहीं बल्कि दो मेहमान एक साथ कर्तव्य पथ पर नजर आने वाले हैं। पहली यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन (Ursula Von Der Leyen) और दसूरे हैं एंटोनियो कोस्टा (Antonio Costa) जो कि यूरोपियन यूनियन काउंसिल के प्रेसिडेंट हैं। आइए जानते हैं कौन हैं उर्सुला वॉन डेर लेयेन।

कौन हैं उर्सुला वॉन डेर?

उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोप की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों में गिनी जाती हैं। वह इस समय यूरोपीय संघ के सबसे बड़े कार्यकारी संस्थान, यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष हैं। उन्होंने यह पद पहली बार 2019 में संभाला था और 2024 में उन्हें दोबारा इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया। यूरोपीय संघ की नीतियां, खासकर अर्थव्यवस्था, व्यापार, सुरक्षा और तकनीक से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।

Republic Day 2026

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता क्यों है इतना बड़ा मुद्दा?

उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख चेहरा हैं। इस समझौते को "मदर ऑफ ऑल डील्स" कहा जाता है, क्योंकि इससे भारत और यूरोप दोनों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। अगर यह समझौता होता है, तो व्यापार, निवेश और रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

77वें गणतंत्र दिवस पर क्यों खास है यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी?

26 जनवरी 2026 को भारत अपने 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं की मेज़बानी करेगा। यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा इस बार मुख्य अतिथि होंगे। यह भारत-EU रिश्तों में एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।

एंटोनियो कोस्टा: यूरोप की राजनीति का संतुलित चेहरा

एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा, जिन्हें आमतौर पर एंटोनियो कोस्टा कहा जाता है, पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वह फिलहाल यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष हैं। यूरोपीय राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है, जो सदस्य देशों के बीच सहमति और संतुलन बनाए रखने में माहिर माने जाते हैं।

गणतंत्र दिवस ही नहीं 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन भी

गणतंत्र दिवस के ठीक अगले दिन, 27 जनवरी को नई दिल्ली में 16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और मजबूत करना है। इसमें व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा, सप्लाई चेन और पर्यावरण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

FTA पर बड़ी उम्मीदें, बड़ी चुनौतियां

भारत और यूरोपीय संघ ने 8 दिसंबर को नई दिल्ली में दशकों से अटके मुक्त व्यापार समझौते पर दोबारा बातचीत शुरू की थी। दोनों पक्षों का लक्ष्य है कि इस साल के अंत तक इसे अंतिम रूप दिया जाए। हालांकि रास्ता आसान नहीं है, क्योंकि कई मुद्दों पर अभी सहमति बननी बाकी है।

कौन-कौन से मुद्दे अभी अटके हुए हैं?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, FTA वार्ता में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश नियम, सरकारी खरीद और तकनीकी मानकों पर चर्चा हो रही है। लेकिन यूरोपीय संघ का प्रस्तावित कार्बन टैक्स, ऑटोमोबाइल और स्टील सेक्टर के लिए बाजार पहुंच, नियमों के बनने और सेवाओं में बाधाएं अभी भी बड़े विवाद के मुद्दे बने हुए हैं।

कार्बन टैक्स पर भारत की चिंता

भारत ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यानी CBAM पर गंभीर चिंता जताई है। यह नियम 1 जनवरी से लागू होगा, जिसके तहत स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य कार्बन-गहन उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा। भारत का मानना है कि इससे उसके निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

कौन कर रहा है वार्ता का नेतृत्व?

इस महत्वपूर्ण बातचीत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल कर रहे हैं। वहीं, यूरोपीय संघ की ओर से इस वार्ता की अगुवाई यूरोपियन कमीशन की ट्रेड महानिदेशक सबाइन वेयांड कर रही हैं।

रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई

भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत 2004 में हुई थी। तब से रक्षा, तकनीक और वैश्विक सहयोग के कई क्षेत्रों में प्रगति हुई है। गणतंत्र दिवस पर शीर्ष यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी इस साझेदारी को और मजबूत करने का साफ संकेत है।

क्यों अहम है यह दौरा भारत के लिए?

संक्षेप में, 77वां गणतंत्र दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय समारोह नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और वैश्विक भूमिका को दिखाने का बड़ा मंच बनकर उभरेगा। इससे भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को नई दिशा और नई गति मिलने की उम्मीद है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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