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'Dhurandhar' के रहमान डकैत की हत्या कराने वाले रियल SSP Chaudhry Aslam Khan की कैसे हुई मौत? खौफनाक है कहानी

Chaudhry Aslam Khan संजय दत्त फिल्म 'धुरंधर' में कराची के कुख्यात पुलिस अधिकारी चौधरी असलम खान की भूमिका देखने के बाद सब तारीफ कर रहे हैं। यूट्यूब और मीडिया में खान की कई तस्वीरें चर्चा में रही हैं, जिसमें वे दाढ़ी वाले, सफेद सलवार-कमीज पहने, हाथ में ग्लॉक पिस्तौल और सिगरेट लिए खड़े दिखते हैं। ऐसे में जानते हैं रियल चौधरी असलम खान की कहानी।

असलम खान पाकिस्तान के प्रमुख एनकाउंटर विशेषज्ञों में से थे और उनका काम भारत-पाकिस्तान खुफिया और भू-राजनीतिक संघर्षों से भी जुड़ा था। कराची की एंटी-टेरर यूनिट के एसएसपी रहते हुए वे 2014 में आत्मघाती बम हमले में मारे थे।

Chaudhry Aslam Khan

करियर की शुरुआत और चौधरी की उपाधि

असलम खान ने 1980 के दशक के अंत में पुलिस में भर्ती होकर कराची के गुलबहार पुलिस स्टेशन में एसएचओ के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने 'चौधरी' उपाधि अपनाई, जो पंजाबी जमींदार परिवारों की पारंपरिक उपाधि थी। 1980-90 के दशक में कराची में जातीय हत्याओं का दौर था। कई मामलों में शव जूट के बोरों में भरकर सड़कों पर पाए जाते थे। इस समय एमक्यूएम और मोहजिर समुदाय की राजनीतिक-आर्थिक स्थिति के कारण तनाव बढ़ा।

ल्यारी टास्क फोर्स और सरकारी कार्रवाई

असलम खान को ल्यारी टास्क फोर्स के नेतृत्व का जिम्मा मिला। इस ऑपरेशन का उद्देश्य ल्यारी में संगठित अपराध और गैंग्स पर कार्रवाई करना था। शुरुआत में कुछ मुठभेड़ों में उन्हें गिरफ्तार भी होना पड़ा, जिसमें 16 महीने जेल में बिताए। फिर भी वे पुलिस सेवा में लौटकर ल्यारी के गैंग लीडर रहमान डकैत के खिलाफ ऑपरेशन का नेतृत्व करने लगे। रहमान डकैत वहीं जिसका किरदार फिल्म में अक्षय खन्ना निभा रहे हैं।

12 दिनों का ल्यारी ऑपरेशन

अप्रैल 2012 में असलम खान ने ल्यारी में 12 दिवसीय पुलिस अभियान चलाया, जिसमें उजैर बलूच से जुड़े आपराधिक समूहों को निशाना बनाया गया। ऑपरेशन के दौरान 12 पुलिसकर्मी शहीद हुए। उस समय पाकिस्तान में TTP और LeJ के आत्मघाती हमलों और सांप्रदायिक हिंसा में बढ़ोतरी हो रही थी। खान को आतंकवाद विरोधी अभियानों में इन समूहों का पीछा करने का काम सौंपा गया।

9 जनवरी 2014 का बम हमला और दर्दनाक मौत

कई सफल मुठभेड़ों के बावजूद, 9 जनवरी 2014 को ल्यारी एक्सप्रेसवे पर असलम खान के काफिले पर बम हमला हुआ। इस हमले में उनकी मौत हो गई, जिसकी जिम्मेदारी TTP ने ली। जांच में अंदरूनी समर्थन के संकेत भी मिले। अपने करियर में खान को 100 से अधिक मुठभेड़ों का क्रेडिट मिला। संदिग्धों को मारने या गिरफ्तार करने पर उन्हें 7.5 करोड़ रुपये का हेड-मनी पुरस्कार भी मिला।

भारत-पाकिस्तान खुफिया मामलों में योगदान

हालांकि खान का काम पाकिस्तानी पुलिसिंग तक सीमित था, लेकिन उनके कुछ मामले भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित करने वाले खुफिया और जासूसी कथाओं से जुड़े थे। उन्होंने सौरत मिर्जा की गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाई, जिसे पाकिस्तानी नौकरशाह की हत्या का दोषी ठहराया गया। मिर्जा ने आरोप लगाया कि एमक्यूएम कार्यकर्ताओं को भारतीय खुफिया एजेंसी RAW से मदद मिली, जिसे भारत ने खारिज किया।

उजैर बलूच और पाकिस्तानी जासूसी आरोप

असलम खान ने कराची अंडरवर्ल्ड के प्रमुख उजैर बलूच को निशाना बनाने में भी योगदान दिया। खान की मृत्यु के एक साल बाद, 2016 में बलूच को गिरफ्तार किया गया और उन पर विदेशी खुफिया एजेंसियों को जानकारी देने का आरोप लगा। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि बलूच कुलभूषण जाधव से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में था। भारत ने इस दावे को पूरी तरह नकारा।

फिल्म की कहानी और प्रेरणा

'धुरंधर' फिल्म ऑपरेशन लयारी और वहां आतंकी नेटवर्क को खत्म करने में भारतीय खुफिया एजेंसी की भूमिका पर आधारित है। फिल्म में रणवीर सिंह ने लयारी अंडरवर्ल्ड के गुप्त एजेंट का किरदार निभाया है, जो वास्तविक मिशनों और मेजर मोहित शर्मा जैसे गुप्त अभियानों से प्रेरित है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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