मंगोलिया में अपने दुश्मन के खिलाफ भारत ने खेल दिया बड़ा दांव, राजनाथ के प्लान से ड्रैगन का बौखलाना तय
चीन ने हमेशा से भारत से संबंधों को विस्तार देने के लिए मंगोलिया से गुस्सा जताया है और साल 2016 में चीन ने मंगोलिया की धमकी भी दी थी।
उलनबटोर, सितंबर 09: भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश करने वाले चीन पर इस बार भारत ने पलटवार किया है और ड्रैगन की नाक के नीचे भारत ने बड़ा खेल कर दिया है, जिसके बाद चीन का आगबबूला होना तय माना जा रहा है। भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह 6 दिवसीय मंगोलिया के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने मंगोलिया के रक्षामंत्री सैखानबयार गुरसेद से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गति देने के तरीकों पर चर्चा की। इसके अलावा भारतीय रक्षामंत्री ने मंगोलिया के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की है और इस दौरान मंगोलिया के राष्ट्रपति ने उनके सम्मान में डिनर का आयोजन किया था।

रक्षा क्षेत्र में बड़ा समझौता
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा समझौता होना ड्रैगन के लिए बड़ा झटका है और क्षेत्रीय सुरक्षा मैट्रिक्स और भू-राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में राजनाथ सिंह का मंगोलिया दौरा भारत के रणनीतिक और रक्षा संबंधों का विस्तार करने के उद्देश्य से काफी महत्वपूर्ण है। राजनाथ सिंह की 5 से 7 सितंबर तक मंगोलिया की यात्रा किसी भारतीय रक्षा मंत्री द्वारा पूर्वी एशियाई देश का पहला दौरा है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि, "आज उलानबटोर में मंगोलिया के रक्षा मंत्री सैखानबयार गुरसेद के साथ उपयोगी बातचीत। हमने भारत-मंगोलिया रक्षा सहयोग को और गति देने पर गहन विचार-विमर्श किया था।" इसके साथ ही भारत और मंगोलिया के बीच 1.2 अरब डॉलर की लागत से बनने वाले तेल रिफाइनरी के बारे में भी बात की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सहयोग से बनने वाली ये रिफाइनरी मंगोलिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी होगी। इसका निर्माण साल 2025 तक हो जाएगा और इसके जरिए मंगोलिया अपनी 75 प्रतिशत जरूरतों को पूरा कर सकता है।

मंगोलिया पर भड़केगा चीन
चीन ने हमेशा से भारत से संबंधों को विस्तार देने के लिए मंगोलिया से गुस्सा जताया है और साल 2016 में चीन ने मंगोलिया की धमकी भी दी थी। चीन नहीं चाहता है, कि मंगोलिया भारत के साथ किसी भी तरह का समझौता करे। वहीं, मंगोलिया दौरा खत्म करने के बाद भारतीय रक्षा मंत्री जापान का दौरा करेंगे, जहां वो 2+2 वार्ता में हिस्सा लेंगे। यह डायलॉग 8 सितंबर को होने वाला है, जिसमें जापान के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री भी हिस्सा लेंगे। रविवार को राजनाथ सिंह की मंगोलिया यात्रा की घोषणा करते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, वह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। इसमें कहा गया है कि, राजनाथ सिंह मंगोलिया के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल सैखानबयार के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और राष्ट्रपति यू खुरेलसुख और स्टेट ग्रेट खुराल (संसद) के अध्यक्ष जी जंदानशतर से मुलाकात की। इसने कहा कि भारत और मंगोलिया एक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं और रक्षा इस साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है।

यात्रा पर चीन की कड़ी नजर
आपको बता दें, राजनाथ सिंह भारत के पहले रक्षामंत्री हैं, जो मंगोलिया का दौरा कर रहे हैं और इससे पहले किसी भी भारतीय रक्षामंत्री ने मंगोलिया का दौरा नहीं किया है। लिहाजा, चीन काफी करीब से राजनाथ सिंह के दौरे पर नजर रखे हुआ है। भारत का मंगोलिया के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंध समय के साथ विस्तारित हो रहे हैं, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापक संपर्क शामिल हैं, जिसमें संयुक्त कार्य समूह की बैठकें, सैन्य-से-सैन्य आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। मंगोलिया हमेशा से भारत को अपना अपना तीसरा और आध्यात्मिक पड़ोसी मानता आया है। वहीं, भारत ऐसे समय में मंगोलिया में तेल रिफाइनरी कार्यक्रम चला रहा है, जब चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का विस्तार कर रहा है। आपको बता दें कि, यूरेनियन भंडार मौजूद है और मंगोलिया ने साल 2009 में भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौता भी किया था। इसके साथ ही भारत मंगोलिया में खनिज, इस्पात और कोयला के क्षेत्र में भी निवेश करने की योजनाएं तैयार कर रहा है।

भारत मंगोलिया संबंध कैसा है?
भारत और मंगोलिया के बीच हमेशा से ही ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और बौद्ध विरासत की वजह से मंगोलिया हमेशा से भारत के साथ आध्यात्मिक संबंध होने की बात करता रहा है। भारत ने साल 1955 में मंगोलिया के साथ राजनयिक संबंधओं की शुरूआत की थी और भारत को आध्यात्मिक पड़ोसी घोषित किया था। वहीं, मोदी सरकार जो एक्ट ईस्ट नीति पर काम कर रही है, उसने मंगोलिया के साथ संबंधों को काफी विस्तार दिया है और साल 2015 में पीएम मोदी ने मंगोलिया का दौरा किया था। वहीं, संयुक्त राष्ट्र भारत की स्थाई सदस्यता के लिए मंगोलिया ने हमेशा से ही समर्थन देने की घोषणा की है, जिसका चीन की तरफ से कड़ा विरोध किया जाता रहा है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, भारत के लिए मंगोलिया के साथ संबंधों को विस्तार देना भविष्य में भारत के ही हितों के लिए काफी ज्यादा अहम साबित होने वाला है, जो भारत सरकार कर भी रही है।

चीन मंगोलिया संबंध
आपको बता दें कि, मंगोलिया के ऊपर पहले चीन ने कब्जा कर रखा था और साल 1921 में सोवियत संघ की मदद से मंगोलिया ने चीन से आजादी हासिल की थी, लेकिन उसके बाद मंगोलिया को सोवियत संघ नियंत्रित करने लगा। हालांकि, मंगोलिया फिर भी स्वतंत्र राज्य बना रहा, लेकिन सोवियत संघ ही इसके शासन और प्रशासन को नियंत्रित करता था। हालांकि, चीन ने फिर भी मंगोलिया को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता नहीं दी थी और साल 2002 में आकर पहली बार चीन ने मंगोलिया को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता दी। हालांकि, चीन ने मंगोलिया में भारी व्यापारिक भागीदारी को बढ़ाया और कई चीनी कंपनियां मंगोलिया से ही संचालित होती हैं। लेकिन, भारत के लिए मंगोलिया इसलिए भी अहम है, क्योंकि ये चीन और रूस के ट्राइजंक्शन पर स्थिति है और इस वक्त जब चीन लगातार सैन्य शक्तियों का विस्तार कर रहा है, मंगोलिया के साथ रक्षा संबंधों को विस्तार देना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है।












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