Putin-Trump Phone Call: पुतिन-ट्रंप के बीच 90 मिनट तक फोन पर हुई सीक्रेट बातचीत, रूस ने रखी कई शर्तें
Putin Trump Phone Call: रूस और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बार फिर बातचीत का सिलसिला तेज हुआ है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 जुलाई को करीब 90 मिनट तक फोन पर बातचीत की। इस दौरान यूक्रेन युद्ध, शांति वार्ता, नाटो शिखर सम्मेलन, अमेरिकी दूतों की संभावित रूस यात्रा और दोनों देशों के रिश्तों समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
ट्रंप ने एक बार फिर युद्ध खत्म कराने की इच्छा जताई, जबकि पुतिन ने कहा कि रूस राजनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन उसके मूल हितों और सुरक्षा चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की ट्रंप की नई पहल
फोन पर बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म कराने की अपनी इच्छा दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। अगले सप्ताह तुर्की में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि ट्रंप नाटो देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेंगे ताकि रूस और यूक्रेन के बीच फिर से बातचीत शुरू हो सके।
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पुतिन ने रखा रूस का स्पष्ट रुख
ट्रंप की पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस भी युद्ध का राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान चाहता है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि किसी भी समझौते में रूस के बुनियादी हितों और सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। रूस लगातार कहता रहा है कि उसकी सुरक्षा और सीमाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान किसी भी शांति समझौते का अहम हिस्सा होना चाहिए। इससे साफ है कि मॉस्को बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों के साथ।
रूस ने यूक्रेन और यूरोपीय देशों पर लगाए आरोप
क्रेमलिन के अधिकारी यूरी उशाकोव ने बातचीत के बाद कहा कि यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी संघर्ष को और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन लंबी दूरी के हमलों के जरिए रूस के तेल उद्योग और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना रहा है। रूस का कहना है कि ऐसे हमलों से शांति प्रक्रिया कमजोर होती है। वहीं यूक्रेन का दावा है कि वह केवल सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
अमेरिकी दूत फिर पहुंच सकते हैं मॉस्को
बातचीत के दौरान यह भी संकेत मिला कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर एक बार फिर रूस का दौरा कर सकते हैं। उनका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच संवाद को आगे बढ़ाना और संभावित समझौते की दिशा में प्रयास करना होगा। यदि यह दौरा होता है तो इसे रूस और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ने का संकेत माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार संवाद ही किसी स्थायी समाधान की पहली शर्त है।:
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जमीन पर लड़ाई जारी, दावों पर विवाद
रूस ने दावा किया है कि उसकी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के रणनीतिक शहर कोस्टियान्टिनिवका पर कब्जा कर लिया है। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और वहां के जनरल स्टाफ ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि शहर अब भी यूक्रेनी सेना के नियंत्रण में है। इससे साफ है कि युद्ध के मैदान की स्थिति को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे हालात में किसी भी शांति वार्ता को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।
क्या इस बातचीत से शांति का रास्ता निकलेगा?
ईरान संकट के बाद रूस-यूक्रेन वार्ता लगभग ठप पड़ गई थी। ऐसे समय में ट्रंप और पुतिन की 90 मिनट लंबी बातचीत को नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि केवल फोन पर हुई चर्चा से तुरंत युद्ध रुकने की उम्मीद नहीं की जा सकती। फिर भी यदि अमेरिकी दूत मॉस्को जाते हैं और नाटो देशों के बीच सहमति बनती है, तो दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं। फिलहाल यह वार्ता शांति की दिशा में एक सकारात्मक संकेत जरूर मानी जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला युद्ध के मैदान और कूटनीतिक प्रयासों दोनों पर निर्भर करेगा।












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