Tanu कौन है? Siya की तरह प्रेमी संग मिलकर पति को जिंदा नहर में फेंका, पुलिस बनी चक्करघिन्नी, कैसे खुला राज?
Rewari Monu Murder Case: पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस (Ketan Agarwal Case) की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि हरियाणा के रेवाड़ी में एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। 21 साल के मोनू की हत्या उसकी पत्नी तनु ने अपने प्रेमी सोनू के साथ मिलकर की थी। तनु ने इतनी चालाकी से साजिश रची कि पुलिस को पहले लगा कि यह आत्महत्या का मामला है। उसने पहले गला दबाकर उसे बेहोश किया, फिर जिंदा हालत में ही नहर में फेंक दिया, पास में ही उसका स्कूटर खड़ा कर दिया और पुलिस को गुमराह किया।
हालांकि, मोनू के परिवार ने हार नहीं मानी। डिलीट की गई चैट, 49 मिस्ड कॉल, कॉन्फ्रेंस कॉल और CCTV फुटेज से पूरा मामला खुल गया। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे रचा पत्नी ने खूनी खेल...

Who Is Tanu : कौन है तनु? एक आम पत्नी या बेरहम कातिल?
रेवाड़ी के जर्थल गांव की रहने वाली तनु कम उम्र की है, लेकिन उसकी साजिश ने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। शादी के बाद भी वह अपने पुराने प्रेमी सोनू (मुंडनवास गांव का रहने वाला) के लगातार संपर्क में थी। पुलिस पूछताछ में तनु ने कबूल किया कि उसने सोनू के साथ मिलकर मोनू की हत्या की योजना बनाई थी।

8 जून को तनु ने मोनू को कसौली स्थित अपने मायके बुलाया। अपनी सैलरी निकालने के बाद मोनू वहां पहुंचा और तनु ने उसे मिलने के लिए बुलाया। उसका प्रेमी सोनू पहले से ही अपने साथियों हरिओम और अमन के साथ इंतजार कर रहा था। उन चारों ने मोनू को घेर लिया, दम घोंटकर उसे बेहोश कर दिया और जिंदा हालत में ही नहर में फेंक दिया। बाद में उसका शव तीन किलोमीटर दूर असलवास नहर से बरामद हुआ।

'सिया गोयल' पैटर्न दोहराया गया?
पुणे में, सिया गोयल ने अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को लोहगढ़ किले में 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया था। दोनों मामलों में एक जैसी बातें थीं- महिला का मास्टरमाइंड होना, हत्या को दुर्घटना दिखाने की कोशिश करना और आखिर में डिजिटल और परिवार द्वारा दिए गए सबूतों के आधार पर पकड़े जाना।

मिनट-टू-मिनट क्रोनोलॉजी: खून-खराबे का एक खौफनाक खेल
- 7 जून: मोनू को अपनी पत्नी तनु को उसके मायके से वापस लाने का काम सौंपा गया। तनु ने उससे कहा कि वह अपनी सैलरी भी साथ लाए।
- 8 जून: मोनू ने एक CSC सेंटर से पैसे निकाले। उसने घर वालों से कहा कि उसके पेट में दर्द है और वह अकेले ही अपने स्कूटर से निकल गया। तनु ने उसे फोन किया और मिलने के लिए कहा।
- वारदात का तरीका: मोनू से बात करते हुए, तनु ने अपने प्रेमी सोनू और उसके दो साथियों को कॉन्फ्रेंस कॉल पर जोड़ लिया। वह अपनी लोकेशन बताती रही और कातिल इंतजार करते रहे। मोनू को काबू कर लिया गया और उसका मुंह-नाक दबा दिया गया। बेहोश होने के बाद, उसे जिंदा ही नहर में फेंक दिया गया। स्कूटर नहर के किनारे खड़ा छोड़ दिया गया।

- 9 जून: परिवार ने तनु से संपर्क किया। उसने मिलने या बात करने से इनकार कर दिया।
- 10 जून: असलवास नहर से शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह डूबना बताया गया; शरीर पर चोट का कोई बाहरी निशान नहीं मिला। पुलिस ने धारा 174 के तहत मामला दर्ज किया और शव सौंप दिया। परिवार ने अंतिम संस्कार किया।
- तनु का नाटक: हत्या के बाद, रोती-बिलखती तनु अपने ससुराल पहुंची और शोक की सभी रस्मों में शामिल हुई।
डिजिटल सबूतों से पलटा मामला: 49 कॉल और एक कॉन्फ्रेंस कॉल का खुलासा

जब 11 जून को परिवार को मोबाइल फ़ोन मिला, तो सारा डेटा डिलीट हो चुका था। पुलिस ने पहले फ़ोन की जाँच की थी और कुछ नहीं मिला था, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी।
मोनू के चाचा हंसराज और कजिन अशोक ने 15 दिनों तक खुद जांच की। साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से उन्होंने डिलीट की गई वॉट्सऐप चैट और कॉल हिस्ट्री रिकवर की। पता चला कि मरने से पहले मोनू ने तनु को 49 बार कॉल किया था। बातचीत सिर्फ एक बार हुई, करीब तीन मिनट तक, जिसमें तनु ने कॉन्फ्रेंस कॉल पर सोनू, हरिओम और अमन को भी जोड़ा हुआ था। वह अपनी लोकेशन शेयर करती रही, जिससे कातिल उस जगह तक पहुंच पाए। सोनू के साथ रेगुलर वॉट्सऐप चैट भी रिकवर की गईं। परिवार को कसौली से CCTV फुटेज भी मिला, जिसमें मोनू तनु के घर की तरफ जाता दिख रहा था।
परिवार का संघर्ष: अबॉर्शन का बहाना और पुलिस की लापरवाही

परिवार को पहले दिन से ही शक था। जब पुलिस ने यह कहकर फ़ोन वापस कर दिया कि 'कुछ नहीं मिला', तो परिवार ने उसे अपने पास ही रखा। यह बात पता चलने पर तनु ने मिसकैरेज का नाटक किया। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड से पता चला कि वह 35 दिन की प्रेग्नेंट थी। शक और गहरा गया, फिर भी परिवार ने यह पक्का किया कि तनु को उनके शक के बारे में पता न चले।
वे 21 और 30 जून को DSP से मिले। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो SP के दखल के बाद 2 जुलाई को तनु और हरिओम को गिरफ्तार किया गया। सोनू और अमन अभी भी फरार हैं।
पोस्टमॉर्टम और आगे की जांच: बेहोशी की हालत में फेंका गया या पहले ही मर चुका था?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह डूबना बताया गया। हालांकि, DSP (क्राइम) सुरेंद्र श्योराण ने बताया कि विसरा सैंपल जांच के लिए मधुबन लैब भेजे गए हैं। इससे पता चलेगा कि मोनू को बेहोशी की हालत में पानी में फेंका गया था या उसे पहले ही मार दिया गया था।
Siya Goyal बनाम Tanu: दो अलग-अलग घटनाएं, एक खतरनाक पैटर्न
केतन अग्रवाल केस (पुणे, 18 जून, 2028):
लोहागढ़ किले के पास 400 फ़ीट गहरी खाई। सिया गोयल अपने मंगेतर केतन को उस जगह ले गई और अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर उसे खाई में धकेल दिया। इसे एक हादसा दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन केतन की बहन के शक के बाद हुई पूछताछ में दोनों टूट गए और सच उगल दिया।
मोनू केस (रेवाड़ी):
मोनू को जिंदा नहर में फेंकना, स्कूटर पार्क करना, चैट डिलीट करना, कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए लोकेशन शेयर करना, डेटा मिटाना, मिसकैरेज का नाटक करना और दुख का दिखावा करना। दोनों ही मामलों में महिला मुख्य साजिशकर्ता थी, प्रेमी उसका साथी था और हत्या को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की गई थी।
ये मामले आधुनिक भारत में एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (शादी के बाहर संबंध) के बढ़ते चलन और उनके घातक नतीजों को उजागर करते हैं। जहां मोबाइल फो और सोशल मीडिया ने रिश्ते बनाना आसान बना दिया है, वहीं इन्होंने सबूत छिपाना भी बहुत मुश्किल कर दिया है।













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