यूक्रेन में 16 दिन बाद भी जीत नहीं, बौखलाए पुतिन, रूसी खुफिया एजेंसी FSB के कई अधिकारी गिरफ्तार
रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी के बारे में अंदरूनी जानकारी रखने वाले रूसी लेखक सोलातोव ने खुफिया एजेंसी के सूत्रों के हवाले से कई बड़े खुलासे किए हैं।
मॉस्को, मार्च 12: यूक्रेन युद्ध के 16 दिन बीत चुके हैं और अभी तक रूसी सेना कीव पर कब्जा नहीं कर पाई है, लिहाजा राष्ट्रपति पुतिन बुरी तरह से बौखला गये हैं और उनके गुस्से की गाज बड़े खुफिया अधिकारियों पर गिर रही है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, व्लादिमीर पुतिन ने देश की खुफिया एजेंसी एफएसबी की विदेश संवा के प्रमुख और उनके डिप्टी को खुफिया जानकारी देने में नाकामयाब ठहराते हुए गिरफ्तार कर लिया है।

खुफिया अधिकारियों पर गिरी गाज
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया गया है कि, यूक्रेन की सेना रूसी सेना का इस तरह से प्रतिरोध करेगी, इसका अंदाजा बिल्कुल भी रूसी राष्ट्रपति पुतिन को नहीं था और पुतिन ने इसके लिए खुफिया एजेंसी एफएसबी की विदेश सेवा के प्रमुख और उनके डिप्टी को जिम्मेदार ठहराया गया है और दोनों ही बड़े अधिकारियों को 'हाउस अरेस्ट' कर लिया गया है। रूसी गुप्त सेवाओं के एक सम्मानित लेखक एंड्री सोलातोव ने दावा किया है कि, एफएसबी के अंदर के सूत्रों ने उन्हें बताया कि, खुफिया एजेंसी की विदेश सेवा के प्रमुख 68 वर्षीय सर्गेई बेसेडा को पुतिन के आदेश पर गिरफ्तार किया गया है। सोलातोव के अनुसार, बेसेडा के डिप्टी अनातोली बोल्युख को भी गिरफ्तार किया गया है।

बौखलाए हुए हैं राष्ट्रपति पुतिन
रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी के बारे में अंदरूनी जानकारी रखने वाले रूसी लेखक सोलातोव के अनुसार यूक्रेन में अभी तक जो स्थिति बनी है, उसको लेकर रूसी राष्ट्रपति पुतिन 'वास्तव में नाखुश' हैं, और ये वो अभियान है, जिसे पुतिन ने राष्ट्रपति बनने से पहले ही चलाया था। रूसी खुफिया एजेंसी के अंदर के सूत्रों ने खुलासा किया है कि, राष्ट्रपति पुतिन खुफिया एजेंसी के उन अधिकारियों को दोषी मान रहे हैं, जिन्होंने उन्हें यूक्रेन पर आक्रमण करने से पहले उन्हें आश्वासन दिया था, कि रूसी सेना को यूक्रेन में सिर्फ प्रतीकात्मक विरोध का ही सामना करना पड़ेगा और यूक्रेनियन खुद अपने नेताओं से छुटकारा पाने के लिए उत्सुक थे। रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया अधिकारियों का आकलन था, कि यूक्रेन में 'गुप्त कार्यों' के लिए जो धन का इस्तेमाल किया गया है, उसका असर होगा, लेकिन उनका आकलन गलत निकला। वहीं, पुतिन का मानना है कि, यूक्रेन में राजनीतिक स्थिति के बारे में उन्हें जानबूझकर गलत जानकारी दी गई है।

यूक्रेन पर पुतिन को गलत जानकारी?
एफएसबी सुरक्षा सेवा ने कथित तौर पर राष्ट्रपति पुतिन को खुफिया जानकारी दी थी, कि यूक्रेन कमजोर है और नव-नाजी समूहों से भरा हुआ है, और अगर हमला किया गया तो आसानी से हार मान लेगा। लेकिन, असलियत काफी अलग निकली। वास्तव में, रूसी सशस्त्र बलों को यूक्रेनी सैनिकों से भयंकर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है और पिछले 17 दिनों से यूक्रेनी सेना ने राजधानी कीव को बचाकर रखा है। हालांकि, यूक्रेन में भारी तबाही मची है और लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा है, लेकिन रूसी सेना को भी भारी नुकसान हुआ है और यूक्नेन ने 12 हजार से ज्यादा रूसी सैनिकों को मारने का दावा किया है और मजबूर रूस ने सीरिया और मिडिल ईस्ट से 16 हजार 'भाड़े के लड़ाकों' को अपनी सेना में शामिल किया और ऐसी रिपोर्ट है कि, सीरिया से आए लड़ाके क्रूर तरीके से कीव की शहरी लड़ाई लड़ेंगे।

एफएसबी अधिकारियों पर चलेगा मुकदमा
रूस ने पूरी ताकत के साथ यूक्रेन पर हमला किया था और पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों का मानना था कि, यूक्रेन 3 से 4 दिनों में हथियार डाल देगा, लेकिन युद्ध के बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति एक नायक बनकर ऊभरे और उन्होंने देश नहीं छोड़ने का ऐलान करते हुए हर एक यूक्रेनी को युद्ध में शामिल कर लिया। जिसके बाद करीब करीब हर शहरों में रूसी सैनिकों के खिलाफ आम नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं, लिहाजा रूस के लिए कार्रवाई करना काफी मुश्किल होने लगा है और आम लोहों ने रूसी टैंकों में तोड़फोड़ और रूस के सैक्य वाहनों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। वहीं, पुतिन की नाराजगी की रिपोर्ट की भी रिपोर्ट इसी बात को लेकर है और वो अपनी खुफिया एजेंसी 'एफएसबी' से भारी नाराज हैं, क्योंकि, एफएसबी ने इस युद्ध को काफी आसान बताया था। वहीं, एफएसबी के सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि, युद्ध खत्म होने के बाद एफएसबी के कई अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाएगा।

रूसी जनरलों पर गिर रही है गाज
वहीं, खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन युद्ध में शामिल अपने कई शीर्ष जनरलों को बर्खास्त कर दिया है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध में उनकी खराब नीति से काफी नुकसान हो रहा था और वो खुफिया एजेंसी को इसके लिए जिम्मेदार बता रहे थे। यूक्रेन की सुरक्षा परिषद के प्रमुख ओलेक्सी डैनिलोव ने कहा कि, संघर्ष की शुरुआत के बाद से 'लगभग आठ' रूसी कमांडरों को बर्खास्त कर दिया गया है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध में भारी 'बेईज्जती' से रूस की सरकार 'सदमे' में है और अब रणनीति को बदलने की कोशिश में है।

खुफिया एजेंसी एफएसबी पर खुलासे
रूसी लेखक सोलातोव ने पहले द टाइम्स को बताया था कि, ज्यादातर एफएसबी एजेंटों को उनके माता-पिता या दादा-दादी के एजेंट होने के आधार पर उनकी 'विरासत' के आधार पर एफएसबी में चुना जाता है और उन्हें स्पेशल ट्रेनिंग देने के लिए उन्हें स्कूलों से निकालकर उनकी स्पेशल ट्रेनिंग शुरू की जाती है, लिहाजा ज्यादातर एफएसबी एजेंट्स का मुख्यधारा की पढ़ाई से कोई ताल्लुक नहीं होता है और यह पश्चिमी सुरक्षा एजेंसियों में होने वाली भर्ती प्रक्रिया से काफी अलग है। पश्चिमी देश एजेंट्स की भर्ती के लिए विशिष्ठ विश्वविद्यालयों के 'क्रीम स्टूडेंट्स' पर नजर रखती है और फिर उन्हें अपनी एजेंसी में भर्ती करती है।

पुतिन से डरते हैं खुफिया एजेंसी के अधिकारी
रूसी लेखक सोलातोव ने खुलासा करते हुए कहा कि, खुफिया एजेंसी ने अच्छी खुफिया जानकारी जुटाई थी, लेकिन वह पुतिन को सच बताने से बहुत डर रहा था, लिहाजा अधिकारियों ने राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी रिपोर्ट्स में हेरफेर कर दिए। लिहाजा, जैसे ही यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ, ठीक वैसे ही रूसी सेना को भारी नुकसान होना शुरू हो गया और भारी संख्या में रूसी सैनिक मारे जाने लगे, जिसे देखकर रूस की सरकार सदमें में आ गई है और अब रूसी सरकार के उच्चाधिकारी खुद को युद्ध में 'फंसा' हुआ महसूस कर रहे हैं।

गलत जानकारी, भारी नुकसान
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, मॉस्को ने युद्ध के शुरूआत में हवाई हमलों के जरिए यूक्रेनी सेना पर हमला करने, उनका मनोबल तोड़ने और थोड़ा प्रतिरोध होने का अनुमान लगाया था, लेकिन जवाबी हमलों की वजह से रूसी सेना काफी जल्दी घबरा गई। हालांकि, अभी तक रूस को कितना नुकसान हुआ है, इसका विश्वसनीय आंकड़ा नहीं, लेकिन रूसी सैनिकों के बारे में कई दावे किए गये हैं। यूक्रेन का दावा है कि, उसने 12 हजार से ज्यादा रूसी सैनिकों को मार गिराया है, तो यूरोपीय खुफिया एजेंसी का अनुमान है कि, 6 हजार से 9 हजार के बीच रूसी सैनिक मारे गये हैं। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसी का अनुमान है कि, करीब 3 हजार रूसी सैनिक मारे गये हैं। हालांकि, रिपोर्ट में अनिश्चितता जरूर है, लेकिन ये रूसी राष्ट्रपति के अनुमान से काफी ज्यादा जरूर है और पुतिन इसी बात को लेकर काफी गुस्से में हैं और उनके गुस्से की गाज रूसी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों पर गिर रही है।












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