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‘अमेरिका, पश्चिमी देश को मिट्टी में मिला देंगे, अगर रूस को...’ पुतिन के जिगरी दोस्त की विनाशकारी चेतावनी

इस हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन को लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को भेजने की सहमति दे दी है और इन मिसाइलों के जरिए काफी आसानी से रूसी शहरों को निशाना बनाया जा सकता है...

मॉस्को, जून 05: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के जिगरी दोस्त ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि, अगर पश्चिमी देश भूल से भी एक रॉकेट रूस पर गिराते हैं, तो अमेरिका और पश्चिमी देशों को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा। पुतिन के करीबी दोस्त ने चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर पश्चिमी देशों से मिले रॉकेट से रूसी शहरों को निशाना बनाया जाता है, तो पश्चिमी देशों को भी निशाना बनाया जाएगा।

अमेरिका को चेतावनी

अमेरिका को चेतावनी

दरअसल, इस हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन को लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को भेजने की सहमति दे दी है और इन मिसाइलों के जरिए काफी आसानी से रूसी शहरों को निशाना बनाया जा सकता है और इसी को लेकर पुतिन के दोस्त ने कहा है, कि अगर अमेरिकी मिसाइल रूसी शहर पर गिरते हैं, तो अमेरिका को भी रूस निशाना बना सकता है। पुतिन के नेतृत्व में पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने चेतावनी दी कि अगर रूसी धरती पर इनका इस्तेमाल किया गया तो इसके परिणाम भुगतने होंगे।

क्या विश्वयुद्ध का खतरा है?

क्या विश्वयुद्ध का खतरा है?

रूस के पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अल जज़ीरा से बात करते हुए कहा कि, 'अगर, भगवान न करे, इन हथियारों का इस्तेमाल रूसी क्षेत्र के खिलाफ किया जाता है, तो हमारे सशस्त्र बलों के पास उन केंद्रों पर हमला करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। उन्होंने कहा कि, 'बेशक, यह समझने की जरूरत है कि इस मामले में अंतिम निर्णय लेने वाले केंद्र, दुर्भाग्य से, कीव में स्थित नहीं हैं।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी, कि यूक्रेन में लड़ाई दुनिया को खतरनाक रूप से परमाणु आर्मगेडन के करीब धकेल रही है। उन्होंने कहा कि, 'सर्वनाश फैलाने वाले घुड़सवार पहले से ही रास्ते पर निकले हुए हैं और अब सभी उम्मीद सर्वशक्तिमान भगवान के ही पास है।'

परमाणु युद्ध की आशंका और तेज

परमाणु युद्ध की आशंका और तेज

क्रेमलिन-नियंत्रित स्टेट टीवी ने कई मौकों पर कहा है कि ब्रिटेन और शेष यूरोप पर हमलों के साथ यूक्रेन में युद्ध परमाणु हो सकता है। टीवी चैनलों ने यह भी कहा है कि, रूस के पास ऐसी क्षमता है, कि वो ब्रिटेन को 200 सेकंड के अंदर खत्म किया जा सकता है और सिर्फ एक मिसाइल के जरिए ही ब्रिटेन को बर्बादी की सुनामी में डुबोया जा सकता है। आपको बता दें कि, यूक्रेन को अभी जो मिसाइल अमेरिका ने भेजने का फैसला किया है, उस रॉकेट सिस्टम ले 50 मील की दूरी से दुश्मन के ठिकानों को तबाह किया जा सकता है और रूसी इसी बात से भड़का हुआ है।

‘युद्ध की आग में ईंधन डालता अमेरिका’

‘युद्ध की आग में ईंधन डालता अमेरिका’

आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि, वो यूक्रेन को इस लड़ाई में मदद करते रहेंगे और अपनी रक्षा करने के लिए हथियार सौंपते रहेंगे। व्हाइट हाउस ने कहा कि, वह राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से आश्वासन मिलने के बाद यूक्रेन को नई मिसाइल प्रदान करने के लिए सहमत हो गया है, कि उनका उपयोग रूस के अंदर लक्ष्यों पर हमला करने के लिए नहीं किया जाएगा। हालांकि, क्रेमलिन ने कहा कि उसे ज़ेलेंस्की पर विश्वास नहीं है। पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि, 'संयुक्त राज्य अमेरिका सीधे और जानबूझकर आग में ईंधन डाल रहा है'।

यूक्रेन को मिलेगा हिमार्स मिसाइल

यूक्रेन को मिलेगा हिमार्स मिसाइल

अमेरिका ने यूक्रेन को हिमार्स मिसाइल सिस्टम देने का फैसला किया है, जिसके जरिए यूक्रेन शॉर्ट और लॉन्ग रेज की मिसाइल को दाग सकता है। इसकी मदद से यूक्रेन की सेना रूसी टैंकों को तहस-नहस कर सकती है। रूस के लिहाज से यह खबर अच्छी नहीं है। वहीं विशेषज्ञों की मानें तो रूस पहले ही इस युद्ध को हार चुका है। लेकिन बावजूद इसके युद्ध कैसे चल रहा है इसको लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। भारत के पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा है कि रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध हार चुका है और इस पूरे युद्ध में रूस का साथ देकर चीन ने एक बड़ी कूटनीतिक भूल की है। श्याम सरन जानेमाने कूटनीतिक हैं और काफी लंबे समय तक विदेश में देश के लिए अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

कितना खतरनाक है हिमार्स

कितना खतरनाक है हिमार्स

हिमार्स की बात करें तो इसके द्वारा लॉन्च की गई मिसाइल की रेंज तकरीबन 80 किलोमीटर तक है। वहीं रूस जो मिसाइल दाग रहा है उसकी रेंज इतनी नहीं है, लिहाजा यूक्रेन को इस मिसाइल के जरिए रूस का सामना करने में आसानी मिलेगी। रूस को इस मिसाइल को ट्रैक करने में काफी दिक्कत होगी। इतनी लंबी दूरी से आने वाली रॉकेट की लोकेशन को पहचानना रूस के लिए आसान नहीं होगा। बता दें कि कारगिल युद्ध में भारत ने भी इस तरह की मिसाइल का इस्तेमाल किया था जिसका नाम पिनाका था। इस युद्ध में पिनाका का काफी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था। इस मिसाइल के जरिए एकदम सटीक हमला किया जा सकता था।

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