'हम मृत्यु के लिए नहीं, जीवन के लिए बने हैं', पोप फ्रांसिस का अंतिम संदेश! विश्व को दी आशा और करुणा की विरासत
Pope Francis Last Message: वेटिकन से आई एक बेहद भावुक कर देने वाली खबर ने सोमवार सुबह पूरी दुनिया को गमगीन कर दिया। 88 वर्षीय पोप फ्रांसिस, जो पूरी दुनिया में करुणा, सहनशीलता और शांति की आवाज़ माने जाते थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने सुबह 7:35 बजे (स्थानीय समय) अंतिम सांस ली।
यह वही पोप थे जिन्होंने जीवनभर हाशिए पर खड़े लोगों के हक में आवाज़ उठाई और अपने हर संदेश में मानवता को प्राथमिकता दी। अपनी खराब तबीयत के बावजूद उन्होंने रविवार को ईस्टर के मौके पर वेटिकन सिटी के सेंट पीटर्स स्क्वायर में हजारों श्रद्धालुओं को आखिरी बार संबोधित किया।

यह उनके सार्वजनिक जीवन का अंतिम दृश्य था-जहां वे एक बार फिर दुनिया से शांति की अपील कर रहे थे, गाज़ा के पीड़ितों के लिए दुआ कर रहे थे, और दुनिया को धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अहमियत समझा रहे थे।
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अंतिम सार्वजनिक संबोधन में जताई शांति की उम्मीद
अपने निधन से ठीक एक दिन पहले, रविवार को ईस्टर के अवसर पर पोप ने दुनिया के लिए आखिरी बार लोगों को संबोधित किया। वेटिकन सिटी के सेंट पीटर्स स्क्वायर में हजारों लोगों की भीड़ जमा थी। व्हीलचेयर पर आए पोप ने बालकनी से हाथ हिलाकर लोगों को "हैप्पी ईस्टर" की शुभकामनाएं दीं। हालांकि उनकी खराब तबीयत के चलते उनके संदेश को एक पादरी ने पढ़कर सुनाया।
गाजा के लोगों के लिए विशेष प्रार्थना
अपने ईस्टर संदेश में पोप ने गाज़ा के लोगों, खासकर वहां के ईसाई समुदाय के लिए गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "यह संघर्ष केवल मौत और तबाही ला रहा है। लोग भूख, भय और असुरक्षा में जी रहे हैं।" उन्होंने संघर्षरत इलाकों में शांति स्थापित करने की अपील की और बंधकों की रिहाई की मांग की।
विश्व में धार्मिक स्वतंत्रता की कमी पर चिंता
पोप फ्रांसिस ने अपने संदेश में स्पष्ट कहा, "जब तक धर्म, विचार और अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं होगी, तब तक दुनिया में शांति संभव नहीं है।" उन्होंने यहूदियों के खिलाफ बढ़ रही नफरत को "चिंताजनक" बताया और दुनिया को सहनशीलता और समझदारी अपनाने की सलाह दी।
यूक्रेन युद्ध पर भी जताई चिंता
पोप ने यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध का ज़िक्र करते हुए कहा, "सभी पक्ष न्यायसंगत और स्थायी शांति की दिशा में कदम बढ़ाएं।" उन्होंने आम लोगों की तकलीफों को याद करते हुए दुनिया के नेताओं से इंसानियत दिखाने की अपील की।
पोप फ्रांसिस का अंतिम X पोस्ट
ईस्टर के मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म, X के जरिए लोगों से मुखातिब होते हुए पोप फ्रांसिस ने लिखा, "मैं चाहता हूं कि हम अपनी आशा को नवीनीकृत करें कि शांति संभव है! पवित्र सेपुलचर, पुनरुत्थान के चर्च से, जहां इस वर्ष ईस्टर कैथोलिक और रूढ़िवादी एक ही दिन मना रहे हैं, शांति की रोशनी पवित्र भूमि और पूरी दुनिया में फैल सकती है।" बता दें, यह उनका अंतिम सोशल मीडिया पोस्ट था।
12 साल का सशक्त नेतृत्व
पोप फ्रांसिस, जिनका असली नाम जोर्ज मारियो बर्गोग्लियो था, साल 2013 में पोप चुने गए थे। वे पहले लैटिन अमेरिकी पोप थे और उनका चयन उस समय हुआ था जब चर्च बाल यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों से जूझ रहा था। उन्होंने अपने नेतृत्व में चर्च में पारदर्शिता, विनम्रता और सेवा की भावना को बढ़ावा दिया।
अंतिम संदेश में दिखी करुणा और मानवता की झलक
पोप फ्रांसिस का अंतिम संदेश उनके पूरे जीवन की झलक देता है-करुणा, इंसानियत और शांति का संदेश। उन्होंने हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बनने की कोशिश की और आखिरी सांस तक वही रास्ता चुना। दुनिया उन्हें एक ऐसे धार्मिक नेता के रूप में याद करेगी जिन्होंने न सिर्फ चर्च को बल्कि पूरी दुनिया को जोड़ने की कोशिश की।
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