PM Modi Indonesia Visit: 'मोदी मॉडल' का मुरीद हुआ इंडोनेशिया! राष्ट्रपति बोले- कॉपीराइट नहीं, इसलिए कर रहे नकल
PM Modi Indonesia Visit: भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते अब कूटनीति की एक नई इबारत लिख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान आयोजित राजकीय भोज में इसकी एक बेहद दिलचस्प झलक देखने को मिली। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने न केवल पीएम मोदी की नीतियों की सराहना की, बल्कि भारत के विकास मॉडल को अपने देश में लागू करने का एक बड़ा एलान भी कर दिया।
PM मोदी की नकल क्यों कर रहे इंडोनेशियाई राष्ट्रपति?
बैठक के बाद हल्के-फुल्के लेकिन गंभीर अंदाज में राष्ट्रपति सुबियांतो ने कहा कि इंडोनेशिया अपने विकास के लिए भारत के सफल कार्यक्रमों को अपना रहा है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "हम भारत के कार्यक्रमों की नकल कर रहे हैं और मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सुपरहिट साबित हो रही इन योजनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं है।" यह बयान सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारतीय नीतियों की बढ़ती साख को दिखाता है।

बता दें कि भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को साल 2018 में Comprehensive Strategic Partnership का दर्जा दिया गया था। उसके बाद से प्रधानमंत्री मोदी का यह पहला आधिकारिक इंडोनेशिया दौरा है, जिसे दोनों देशों के सांस्कृतिक और रणनीतिक भविष्य के लिए एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
भारत से इतना इंप्रेस क्यों है इंडोनेशिया?
आखिर इंडोनेशिया भारत के इस मॉडल से इतना प्रभावित क्यों है? इसका जवाब खुद राष्ट्रपति सुबियांतो ने दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां काफी हद तक एक जैसी हैं। दोनों ही देशों में एक बहुत बड़ी ग्रामीण आबादी है, जहां खेती-किसानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। साथ ही दोनों देशों को अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। प्रबोवो के मुताबिक, जब कोई नीति करोड़ों लोगों की जिंदगी बदलने में सफल सिद्ध हो रही हो, तो उसे अपनाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
इसी कड़ी में इंडोनेशिया भारत के कृषि मॉडल, खासकर बंजर और सूखी जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने की तकनीक को गंभीरता से सीख रहा है। इसे समझने के लिए इंडोनेशिया का एक विशेष दल दो हफ्ते से अधिक समय तक भारत के दौरे पर रहा। इस टीम ने भारत के ग्रामीण और अनुपजाऊ क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली 'सस्टेनेबल नेचुरल फार्मिंग' और 'परमाकल्चर' तकनीकों का जमीनी स्तर पर अध्ययन किया है।
डिजिटल पेमेंट के दीवाने हुए सुबियांतो
इस यात्रा के दौरान केवल कूटनीतिक चर्चाएं नहीं हुईं, बल्कि जमीनी स्तर पर असर डालने वाले कई ऐतिहासिक समझौते भी हुए जैसे-
IIM और IIT के नए कैंपस: भारत का प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान, आईएआईएम बैंगलोर (IIM Bangalore) अब इंडोनेशिया में अपना नया कैंपस स्थापित करने जा रहा है। इसके साथ ही वहां आईआईटी (IIT) का कैंपस खोलने को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है।
UPI पेमेंट की शुरुआत: दोनों देशों ने अपनी सीमा पार क्यूआर पेमेंट सिस्टम (QR Payment) को आपस में जोड़ने का फैसला किया है। इसका सीधा फायदा इंडोनेशिया जाने वाले भारतीय पर्यटकों को मिलेगा, जो अब वहां आसानी से यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान कर सकेंगे।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: दोनों देश यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक 'प्रम्बानन मंदिर परिसर' के संरक्षण और रखरखाव के लिए मिलकर काम करेंगे।
'बितांग आदिपूर्ण' सम्मान और भविष्य की राह
मोदी को सर्वोच्च सम्मान से नवाजा
इस ऐतिहासिक यात्रा के समापन पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बितांग आदिपूर्ण' (Bintang Adipurna) से नवाजा। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह पदक केवल उनका नहीं, बल्कि पूरी भारतीय जनता के प्रति इंडोनेशिया के गहरे आदर का प्रतीक है।
पीएम मोदी का यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को एक नई रफ्तार देने वाला है। आने वाले समय में रक्षा, शिक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुए ये समझौते न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करेंगे, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक नए भू-राजनीतिक संतुलन और आर्थिक स्थिरता का आधार भी बनेंगे। जो आने वाले वक्त में चीन के खिलाफ एक जुट होकर मुकाबला कर सकेंगे।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














Click it and Unblock the Notifications