Gurugram Rain: गुरुग्राम में पहली तेज बारिश ने खोली सिस्टम की पोल! तैरने लगीं महंगी गाड़ियां, धंस गई VVIP सड़क
Gurugram Rain: गुरुग्राम में मानसून की पहली जोरदार बारिश लोगों के लिए राहत भी लेकर आई और बड़ी परेशानी भी। कई दिनों से गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को बारिश से सुकून मिला, लेकिन कुछ ही घंटों की बारिश ने शहर की तैयारियों की हकीकत भी सामने ला दी। सड़कें तालाब में बदल गईं, एनएच-48 की सर्विस लेन पानी में डूब गई, कई इलाकों में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और सिविल लाइन रोड धंसने से महंगी गाड़ियां बीच सड़क पर फंस गईं। हालात ऐसे रहे कि लोगों को घर और दफ्तर पहुंचने में घंटों लग गए।
7 जुलाई की दोपहर में गुरुग्राम में तेज बारिश शुरू हुई। बारिश के साथ तापमान में गिरावट आई और लोगों को उमस से राहत मिली। लेकिन राहत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। शहर के कई हिस्सों में पानी भरने लगा और कुछ ही देर में सड़कें पानी के नीचे गायब हो गईं।

गुरुग्राम में मानसून की पहली बारिश में ही तैरने लगीं महंगी गाड़ियां
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में संवाददाता हनु सैनी ने बताया कि पहली तेज बारिश ने ही नगर निगम और प्रशासन के मानसून प्रबंधन की पोल खोल दी। अधूरी सड़कें, खुले गड्ढे और खराब ड्रेनेज सिस्टम की वजह से शहर के कई हिस्सों में हालात बिगड़ गए।
हनु सैनी ने ग्राउंड जीरो से हालात बयां करते हुए बताया कि बारिश शुरू होने के महज आधे घंटे के भीतर ही सुभाष चौक, राजीव चौक, बजघेड़ा और राजेंद्रा पार्क जैसे प्रमुख चौराहों की सड़कें पूरी तरह पानी में गायब हो चुकी थीं। अंदरूनी रास्तों पर पानी का बहाव इतना तेज था कि बाइक और स्कूटर सवार संतुलन खो रहे थे। रोड साइड पर जो गड्ढे अधूरे छोड़े गए थे, वे अब राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन हर साल मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत हमेशा की तरह शून्य ही रहती है।
मंत्री और अफसरों की कोठी से 100 मीटर दूर धंस गई सड़क, थार से खींचनी पड़ी स्कॉर्पियो
इस बारिश में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली तस्वीर शहर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली वीवीआईपी (VVIP) सिविल लाइन रोड से सामने आई। इस सड़क पर मात्र सौ-दो सौ मीटर की दूरी पर जिले के डीसी उत्तम कुमार, नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर की कोठियां हैं।
बारिश के दौरान यह पूरी सड़क अचानक बीच से धंस गई, जिससे वहां पार्क की गई एक टोयोटा कार और एक स्कॉर्पियो गहरे मलबे में समा गईं। दरअसल, कुछ दिन पहले ही यहां सीवर लाइन बिछाने के लिए खुदाई की गई थी, जिसे ठीक से भरा नहीं गया था। गाड़ियां फंसने के बाद स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाई; उन्होंने टोयोटा को तो धक्का मारकर निकाल लिया, लेकिन स्कॉर्पियो को बाहर खींचने के लिए एक थार गाड़ी की मदद लेनी पड़ी। लोगों का सीधा सवाल है कि जब वीवीआईपी इलाके का यह हाल है, तो आम रिहायशी कॉलोनियों की सुध कौन लेगा?
NH-48 की सर्विस लेन बनी नदी, रेंगती दिखीं गाड़ियां
दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर सफर करने वाले कामकाजी लोगों के लिए आज का सफर किसी बुरे सपने जैसा रहा। हाईवे की सर्विस लेन पर पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि कई कारें और ऑटो बीच सड़क पर ही बंद हो गए।
गाड़ियां खराब होने और जलभराव के चलते देखते ही देखते दिल्ली से गुरुग्राम आने वाले और जयपुर की तरफ जाने वाले रास्ते पर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। ट्रैफिक को संभालने के लिए पुलिस के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। क्रेन की मदद से बंद पड़े वाहनों को साइड कराया गया और सोशल मीडिया पर एडवाइजरी जारी कर लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
सिर्फ हाईवे ही नहीं, शहर के कई प्रमुख चौराहों और कॉलोनियों में भी जलभराव देखने को मिला। सुभाष चौक, राजीव चौक, बजघेड़ा, राजेंद्र पार्क और कई अंदरूनी इलाकों की सड़कें पानी में डूब गईं। कई जगह पानी का बहाव इतना तेज था कि दोपहिया वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ा। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में हालात बिगड़ जाते हैं।
जाम बढ़ने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने कई जगह मोर्चा संभाला। बंद पड़े वाहनों को क्रेन से हटाया गया ताकि रास्ता खुल सके। साथ ही सोशल मीडिया पर एडवाइजरी जारी कर लोगों से जलभराव वाले मार्गों से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की गई।
स्थानीय लोगों ने क्या कहा?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधूरे निर्माण कार्य, खुले गड्ढे और खराब जल निकासी व्यवस्था की वजह से हर मानसून में यही हाल होता है। उनका कहना है कि सिर्फ दावे करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी ड्रेनेज सिस्टम तैयार करना होगा। फिलहाल लोगों की मांग है कि जल निकासी का काम तेजी से किया जाए ताकि आने वाले दिनों में बारिश के दौरान शहर पूरी तरह ठप न पड़े।














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