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PM Modi In Israel: क्या है I2U2? पीएम मोदी ने इजरायली संसद में किया जिक्र, भारत के लिए क्यों जरूरी- Explainer

PM Modi In Israel: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की इजरायल यात्रा पर हैं। जिसके पहले दिन उन्होंने इजरायली संसद को संबोधित किया। पीएम मोदी ने अपनी इस स्पीच में कई सारे मुद्दों पर बात की। जिसमें से एक था I2U2. जिसके बाद I2U2 एक कीवर्ड के रूप में इंटरनेट पर छाने लगा। आइए, आसान भाषा में समझते हैं क्या है I2U2 और कैसे हुआ इसका उदय।

क्या है I2U2?

I2U2 ग्रुप का नाम पहली बार साल 2021 के अक्टूबर में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से लिया था। तब यह सवाल उठने लगा था कि आखिर यह नया ग्रुप क्या है और इसका मकसद क्या होगा? लेकिन 2022 में यह ग्रुप एक औपचारिक मंच के रूप में सामने आ चुका है, जिसकी बैठक 14 जुलाई 2022 को आयोजित की गई। इसी दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Joe Biden 13 से 16 जुलाई 2022 तक मिडिल ईस्ट के दौरे पर थे। उसी यात्रा के दौरान I2U2 की बैठक आयोजित की गई, जिससे यह साफ हो गया कि अमेरिका इस पहल को गंभीरता से ले रहा है।

PM Modi In Israel

I2U2 का मतलब क्या है?

I2U2 नाम चार देशों के नामों के पहले अक्षरों से बना है- India, Israel, UAE और USA. यानी भारत, इज़रायल, यूनाइटेड अरब अमीरात और अमेरिका। UAE के भारत में राजदूत अहमद अलबन्ना ने इसे 'पश्चिम एशियाई क्वाड' भी कहा था। यह तुलना इसलिए की गई क्योंकि जैसे इंडो-पैसिफिक में QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) है, वैसे ही पश्चिम एशिया में यह चार देशों का नया ग्रुप है।

अक्टूबर 2021 में रखी गई थी नींव

इस ग्रुप की शुरुआत अक्टूबर 2021 में हुई थी। उस समय भारत के विदेश मंत्री Dr. S Jaishankar इज़रायल के दौरे पर थे। उसी दौरान चारों देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक हुई थी। उस समय इसे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग मंच कहा गया था। यानी शुरुआत में इसका फोकस सुरक्षा या सैन्य मुद्दों पर नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग पर था।

शेरपा-स्तर की नियमित बातचीत

भारत के विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इन देशों के बीच शेरपा-स्तर पर नियमित बातचीत होती रही है। शेरपा-स्तर की बातचीत का मतलब है कि वरिष्ठ अधिकारी मिलकर एजेंडा और संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा करते हैं।
इस ग्रुप का घोषित उद्देश्य है- आपसी हित के सामान्य क्षेत्रों पर चर्चा करना और अपने-अपने क्षेत्रों तथा उससे आगे व्यापार और निवेश में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना। मतलब साफ है कि इस ग्रुप का फोकस इकॉनोमिक डिवेपमेंट और इन्वेस्टमेंट पर है।

6 बड़े सहयोग क्षेत्र तय

• जल (Water)
• ऊर्जा (Energy)
• परिवहन (Transport)
• अंतरिक्ष (Space)
• स्वास्थ्य (Health)
• खाद्य सुरक्षा (Food Security)

I2U2 देशों ने मिलकर 6 बड़े सेक्टर्स की पहचान की है, जिनमें वे साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। ये क्षेत्र हैं- जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा। इन क्षेत्रों में संयुक्त निवेश को बढ़ावा देना इस ग्रुप का टारगेट है।
इन देशों की योजना है कि वे बुनियादी ढांचे का मॉडर्नाइजेशन करें, इंडस्ट्रीज के लिए कार्बन कम करने के रास्ते खोजें, पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाएं और हरित के साथ-साथ उभरती टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा दें।

भारत और इज़रायल के बढ़ते रिश्ते

यह ग्रुप इस बात का संकेत भी देता है कि भारत पश्चिम एशिया के देशों, खासकर इज़रायल, के साथ अपने रिश्ते तेजी से मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों में भारत और इज़रायल के बीच रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ा है।

G7 समिट सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने UAE का संक्षिप्त दौरा भी किया था। इससे पहले मई 2022 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति M. Venkaiah Naidu ने भी UAE की यात्रा की थी। यह दिखाता है कि भारत पश्चिम एशिया के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।
इज़रायल, भारत, UAE और अमेरिका का यह नया ग्रुप-जिसे I2U2 कहा जाता है। यह क्षेत्रीय सहयोग के एक नए मॉडल को आगे बढ़ाता है।

पश्चिम एशिया की बदलती राजनीति

2020 के अब्राहम समझौतों के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। पहले जहां इज़रायल को कई अरब देशों से अलग-थलग देखा जाता था, वहीं अब सहयोग और साझेदारी का नया दौर शुरू हुआ है। I2U2 उसी बदलते जियो-पॉलिटिकल नजरिए का हिस्सा है। यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी साझेदारी का मंच है।

क्या है I2U2 का मैसेज?

I2U2 यह दिखाता है कि दुनिया की राजनीति अब सिर्फ सैन्य गठबंधनों तक सीमित नहीं है। अब देश आर्थिक सहयोग, टेक्नोलॉजी, हरित ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी साथ आ रहे हैं।भारत के लिए यह ग्रुप पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का मौका है। वहीं अमेरिका के लिए यह क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का एक जरिया है।
कुल मिलाकर, I2U2 एक ऐसा मंच है जो पश्चिम एशिया और उससे आगे के देशों के बीच सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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