PM Modi Croatia visit: 1 हजार आइलैंड और डेलमेशियन डॉग, क्रोएशिया कितना गजब? जहां पहुंचें हैं पीएम मोदी
PM Modi Croatia Visits: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय तीन देशों के विदेश दौरे पर हैं। इसके अंतिम पड़ाव में उन्होंने क्रोएशिया की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत की है। इससे पहले वह साइप्रस गए और फिर कनाडा में आयोजित 51वें G7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया। यह यात्रा विशेष इसलिए भी है क्योंकि यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली आधिकारिक यात्रा है।
यह ऐतिहासिक क्षण न केवल भारत-क्रोएशिया द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर है, बल्कि यूरोपीय संघ के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भी रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ज़ाग्रेब, क्रोएशिया की राजधानी में हो रही है, जहां वह प्रधानमंत्री आंद्रेय प्लेंकोविच और राष्ट्रपति ज़ोरान मिलानोविच से मुलाकात करेंगे। आईए जानते हैं कितना खास है द्वीपों का ये देश.......
Croatia islands: एक खूबसूरत द्वीपों का देश हा क्रोएशिया की भौगोलिक विशेषता
क्रोएशिया यूरोप के उत्तर-पश्चिमी बाल्कन प्रायद्वीप में स्थित एक भौगोलिक दृष्टि से विविध और अर्धचंद्राकार आकार वाला देश है। इसकी समुद्री सीमा एड्रियाटिक सागर से मिलती है, जहां क्रोएशिया के 1,244 द्वीप, छोटे टापू और चट्टानें फैली हुई हैं। इनमें से केवल 78 द्वीपों पर जनजीवन है, जबकि शेष द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध हैं।
क्रोएशिया की भूमि तीन प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में बंटा हुआ है:
- पैन्नोनियन मैदान - देश के उत्तर और पूर्वी हिस्से में विस्तृत मैदान हैं।
- दीनारिक पर्वतमाला - केंद्र में स्थित ये पहाड़ियाँ देश को समुद्र से जोड़ती हैं।
- दालमटिया और इस्त्रिया क्षेत्र - ये ऐतिहासिक और तटीय क्षेत्र हैं जो क्रोएशिया की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं।
- क्रोएशिया का सबसे ऊँचा पर्वत 'दिनारा' है, जिसकी ऊँचाई 1,831 मीटर (6,007 फीट) है।
Croatia का प्राचीन काल से आधुनिक गणराज्य तक
क्रोएशिया की सभ्यता का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में यह क्षेत्र यूनानी और फिर रोमन साम्राज्य का हिस्सा रहा। छठी सदी के अंत में क्रोएट जनजातियों का आगमन हुआ और 879 ईस्वी में ड्यूक ब्रानिमिर के काल में इसे पहली बार एक स्वतंत्र देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
- 925 ईस्वी: टोमिस्लाव प्रथम के राजा बनने पर क्रोएशिया को राज्य का दर्जा मिला।
- 1102: हंगरी के साथ व्यक्तिगत संघ में प्रवेश किया।
- 1527: ऑस्ट्रिया के फर्डिनेंड प्रथम को ओटोमन आक्रमण के समय क्रोएशियाई सिंहासन सौंपा गया।
- 1918: ऑस्ट्रो-हंगरी से अलग होकर स्लोवेनिया, क्रोएट्स और सर्ब का स्वतंत्र राज्य बना।
- 1941-45: द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजी शासन के कठपुतली राज्य का हिस्सा रहा।
- 1991: यूगोस्लाविया से स्वतंत्रता की घोषणा। इसके बाद चार वर्षों तक स्वतंत्रता संग्राम चला।
- 2013: यूरोपीय संघ का सदस्य बना।
- 2023: यूरो अपनाया गया, जो इसकी यूरोपीय एकता की दिशा में बड़ी छलांग है।
क्रोएशिया की जनसंख्या लगभग 39 लाख है, लेकिन विश्व भर में फैले प्रवासी क्रोएशियनों की संख्या भी इतनी ही मानी जाती है। देश की संस्कृति गहराई से रोमन कैथोलिक धर्म से जुड़ी है, जो इसे पूर्वी यूरोप के ऑर्थोडॉक्स प्रभाव से अलग बनाती है।
ज़ाग्रेब, देश की राजधानी, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र है। वहीं डबरोव्निक, अपने प्राचीरों और समुद्र तटीय सौंदर्य के कारण दुनिया भर के पर्यटकों का प्रिय स्थल बन चुका है। इसे "एड्रियाटिक का मोती" भी कहा जाता है।
भारत-क्रोएशिया संबंधों की नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक और रणनीतिक है। यह भारत के 'एक्ट ईस्ट' और 'लिंक वेस्ट' नीति को मूर्त रूप देने की दिशा में एक और कदम है। क्रोएशिया जैसे यूरोपीय संघ के सदस्य देश के साथ विज्ञान, शिक्षा, पर्यटन, समुद्री व्यापार और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
प्रधानमंत्री की आंद्रेय प्लेंकोविच से मुलाकात में आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल साझेदारी और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त सहयोग पर बातचीत की उम्मीद है। इसके अलावा, राष्ट्रपति ज़ोरान मिलानोविच के साथ होने वाली वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने पर जोर रहेगा।
एक ऐतिहासिक पल
किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली क्रोएशिया यात्रा केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि यह दो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्रों के बीच एक नई साझेदारी की शुरुआत है। ज़ाग्रेब की सड़कों पर भारतीय ध्वज के साथ जो स्वागत देखा गया, वह न केवल राजनीतिक संवाद का संकेत है बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ती नजदीकी का प्रतीक भी है।
यह यात्रा आने वाले वर्षों में भारत और क्रोएशिया के संबंधों को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगी - इतिहास, संस्कृति और सहयोग की साझी विरासत के साथ।












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