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BrahMos missiles: बस बहुत हो गया! चीन से चिढ़ा फिलीपींस भारत से मांगेगा और ब्रह्मोस मिसाइल, क्या है इरादा?

Philippines wants BrahMos missiles: दक्षिण चीन सागर में चीन लगातार फिलीपींस को परेशान कर रहा है और पिछले कुछ महीनों में बार बार फिलीपींस और चीन की नेवी के बीच टक्कर हुई है। चीनी नेवी ने कई बार फिलीपींस के जहाजों पर पानी की बौछारों से हमला किया है।

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और इस तनाव के पीछे की वजह है, दक्षिण चीन सागर पर कब्जा करने की ड्रैगन की चाहत। चीन, दक्षिण चीन सागर का एक इंच क्षेत्र भी किसी को नहीं देना चाहता है, जबकि फिलीपींस, जो दक्षिण चीन सागर के तट पर बसा है, वो भी इस समुद्र के एक हिस्से पर अपना दावा करता है।

Philippines wants BrahMos missiles

भारत से और ब्रह्मोस खरीदेगा फिलीपींस!

एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि फिलीपींस, दक्षिण चीन सागर में अपने समुद्री तटों की मजबूत सुरक्षा के लिए भारत से और ज्यादा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें खरीदने पर विचार कर रहा है। फिलीपींस मरीन कोर का लक्ष्य 2026 तक इन एंटी-शिप मिसाइलों की दो अतिरिक्त बैटरियां हासिल करना है, जो पहले से ही ऑर्डर की गई तीन बैटरियों में शामिल होंगी।

WION की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपींस नौसेना को पहले से ही तीन ब्रह्मोस बैटरियां मिलनी तय हैं, जिनमें से प्रत्येक में चार लांचर हैं, जिनमें तीन मिसाइलें हैं जो 290 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम हैं। WION की रिपोर्ट में कहा गया है, कि इस अधिग्रहण से फिलीपींस की समुद्री खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने की क्षमता में मजबूत वृद्धि होगी। WION का कहना है, कि फिलीपींस की संभावित अतिरिक्त खरीद से भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और पूर्वी एशियाई देशों में हथियारों की रेस के बीच ब्रह्मोस मिसाइल की बाजार क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं, ज्यादा ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीददारी करने से फिलीपींस की समुद्री खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने की क्षमता बढ़ेगी।

भारत-फिलीपींस में रक्षा संबंध और होंगे मजबूत

फिलीपींस और भारत के बीच गहरे रक्षा संबंध, चीन के साथ अपने क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के बीच पिछले कुछ सालों में काफी गहरे हुए हैं और दोनों के लिए सिरदर्द कॉमन है। ब्रह्मोस की डिलीवरी फिलीपींस के लिए दक्षिण चीन सागर में आक्रामक कार्रवाइयों का मुकाबला करने और विवादित क्षेत्रों पर अपनी संप्रभुता का दावा करने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, फिलीपींस को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें लंबी दूरी, सर्विलांस, ​​टोही क्षमताओं और वायु रक्षा परिसंपत्तियों की कमी शामिल है।

इसके अलावा फिलीपींस की जमीनी सेना भी भूमि नौसैनिक हमलों के लिए इन मिसाइलों को खरीदने पर विचार कर सकती है। जिससे भारत को ब्रह्मोस की और बैटरियों के नये ऑर्डर मिल सकते हैं।

और ज्यादा ब्रह्मोस मिसाइलों के अधिग्रहण से चीन के साथ संघर्ष में अमेरिका के सहयोगी के रूप में फिलीपींस की कमजोरियों में से एक को दूर किया जा सकता है। इससे दक्षिण चीन सागर में चीन के शक्ति प्रक्षेपण और समुद्री क्षेत्रों पर हमला करने की क्षमता का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, यह कदम अमेरिका और सहयोगियों को यह संकेत दे सकता है, कि फिलीपींस चीन की सेना के खिलाफ उतना असहाय नहीं है, जितना कि यह लग सकता है। इसके अलावा, WION की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने का भारत का फैसला, एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है, जो चीन के साथ गर्म और ठंडे संबंधों के बीच हिंद महासागर से परे भारत-प्रशांत क्षेत्र तक अपना प्रभाव बढ़ाता है।

जिस तरह से हिंद महासागर में चीन, भारत के लिए परेशानियां बढ़ा रहा है, भारत भी चीन को जैसे का तैसा जवाब देने की कोशिश कर रहा है और इस काम में फिलीपींस काफी अहम भूमिका निभा रहा है। भारत ने अब दक्षिण चीन सागर में युद्धपोतों को भी भेजना शुरू कर दिया है।

ब्रह्मोस मिसाइलों की संख्या में वृद्धि से दोनों देशों की अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता पर जोर मिलता है। इससे क्षेत्रीय तनाव कम होता है। इससे जहां एक तरफ जहां फिलीपींस की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, वहीं भारत के हथियार निर्यात में भी इजाफा होता है।

Philippines wants BrahMos missiles

ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम कितना खतरनाक?

ब्रह्मोस नाम भारतीय ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों से लिया गया है। 1998 के समझौते के तहत, ब्रह्मोस एयरोस्पेस का निर्माण हुआ, जो DRDO और एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (एनपीओएम) के बीच एक संयुक्त उद्यम था। इसका उद्देश्य सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली का डिजाइन, विकास और निर्माण करना था।

12 जून 2001 को ब्रह्मोस मिसाइल का पहली बार ओडिशा के चांदीपुर में भूमि-आधारित लॉन्चर से टेस्ट किया गया था। तब से, मिसाइल के अलग अलग वेरिएंट बनाए जा चुके हैं और इसे कई बार अपग्रेड किया गया है। अभी ब्रह्मोस के नये वर्जन का निर्माण चल रहा है, जिसकी मारक क्षमता और स्पीड और भी ज्यादा होगी।

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की मारक क्षमता 292 किलोमीटर है, और इसके नये वेरिएंट की मारक क्षमता 500 किलोमीटर तक किया जा रहा है। इस मिसाइल में इतनी खूबियां हैं, कि कई छोटे देशों के लिए ब्रह्मोस मिसाइल फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने हाल ही में खुलासा किया है, कि मिसाइल के ऑर्डर का पोर्टफोलियो 7 अरब डॉलर के आंकड़े को छू गया है। कंपनी के एक्सपोर्ट डायरेक्टर प्रवीण पाठक ने इसी साल फरवरी में रियाद में वर्ल्ड डिफेंस शो में कहा था, कि "ब्रह्मोस के ऑर्डर का पोर्टफोलियो पहले ही 7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें भारतीय और निर्यात दोनों ऑर्डर शामिल हैं।"

सबसे खास बात ये है कि ब्रह्मोस मिसाइल थल सेना, वायु सेना और जल सेना तीनों के काम आता है। ब्रह्मोस 10 मीटर की ऊंचाई पर भी उड़ान भरने में सक्षम है और दुनिया की कोई रडार इसे पकड़ नहीं सकती है। रडार ही नहीं किसी भी मिसाइल डिटेक्टिव प्रणाली को धोखा देने में ब्रह्मोस मीलों आगे है और इसको मार गिराना करीब करीब असम्भव है।

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