'तुम हिंदू हो', पाकिस्तान की नापाक हरकत, गुरुनानक जयंती पर हजारों खर्च कर गए 14 तीर्थयात्रियों को भेजा वापस
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' के घातक संघर्ष के बाद, पहली बार बड़ी संख्या में सिख तीर्थयात्रियों ने वाघा-अटारी सीमा पार कर पाकिस्तान में प्रवेश किया। यह यात्रा गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती के 10 दिवसीय उत्सव के लिए है। जिसके अंतर्गत भारतीय भक्त पाकिस्तान में स्थित गुरुद्वारे के दर्शन करेंगे। लेकिन अंतर-धार्मिक सद्भाव का प्रतीक इस यात्रा के दौरान भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आया।
पाकिस्तान ने गुरु नानक जयंती के अवसर पर सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान पहुंचे 14 हिंदू तीर्थयात्रियों को भारत वापस भेज दिया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन तीर्थयात्रियों से कहा कि वे सिख नहीं, हिंदू है इसलिए उन्हें वापस लौटना होगा।

ध्यान रहे गुरु नानक देव की जयंती, जिसे गुरुपर्व या प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है, सिखों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस अवसर पर लगभग 1900 सिख तीर्थयात्रियों का एक जत्था अटारी-वाघा सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंचा था, जिसमें अमर चंद और उनका परिवार भी शामिल था।
सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वापस भेजा
रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू श्रद्धालु सिख जत्थे के साथ अटारी-वाघा सड़क मार्ग से पाकिस्तान पहुंचे थे और सभी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली थीं। अमर चंद ने बताया कि उन्हें तीर्थयात्रियों के लिए विशेष बस में चढ़ने को कहा गया था।
दिल्ली और लखनऊ के थे ये तीर्थयात्री
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और लखनऊ के इन 14 हिंदुओं को पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह कहकर वापस भेज दिया कि वे सिख जत्थे के साथ यात्रा नहीं कर सकते क्योंकि वे सिख धर्म के नहीं हैं। इसके बाद सभी को तुरंत भारत वापस भेज दिया गया।
पाकिस्तान बोला- तुम हिंदू हो, तुम सिख नहीं हो...
तीर्थयात्रियों में से एक, अमर चंद ने बताया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनसे स्पष्ट रूप से कहा कि "तुम हिंदू हो, तुम सिख जत्थे के साथ नहीं जा सकते।" अमर चंद के परिवार का दावा है कि वे प्रकाश पर्व के अवसर पर पाकिस्तान के गुरुद्वारों में मत्था टेकना चाहते थे।
अमर चंद ने पीटीआई को बताया कि उन्होंने अपने परिवार के सात सदस्यों के लिए बस टिकटों पर पाकिस्तानी मुद्रा में 95,000 रुपये खर्च किए थे। उन्होंने बताया कि बाद में पांच पाकिस्तानी अधिकारी आए और उन्हें तथा लखनऊ से आए सात अन्य लोगों को बस से उतरने का आदेश दिया।
सीमा पार करने वाले इस जत्थे में कुल 14 हिंदू तीर्थयात्री शामिल थे, जिनमें से सात लखनऊ से और सात दिल्ली से थे। इन सभी को पाकिस्तान में प्रवेश करने से रोक दिया गया और वापस भारत भेज दिया गया, जिससे उनकी धार्मिक यात्रा अधूरी रह गई।












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