एक साल में दूसरी बार हवाई हमला, तालिबान का बदला लेने का ऐलान, अफगानिस्तान में आग लगाकर कैसे जल रहा पाकिस्तान?
Pakistan Airstrike in Afghanuistan: अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में पाकिस्तान की तरफ से पिछले हफ्ते किए गये हवाई हमलों में 46 लोगों की मौत हो गई और सीमा पार तनाव बढ़ गया, जिससे दशकों से युद्ध, आतंकवाद और आर्थिक पतन से प्रभावित क्षेत्र में चल रही अस्थिरता उजागर हुई।
यह हमला अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर नाजुक सुरक्षा स्थिति और दोनों देशों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक तनाव को भी उजागर करता है। तालिबान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि पाकिस्तान हमले में मरने वालों में ज्यादातर बच्चे और महिलाएं हैं।

इस एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच काफी तनावपूर्ण संबंध हो गये हैं और इस जटिल स्थिति में सिर्फ तालिबान और पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे अंतरराष्ट्रीय अभिनेता भी शामिल हैं। अमेरिका के निकलने के बाद अब अफगानिस्तान में चीन ने कदम बढ़ाए हैं और उसने हालिया समय में तालिबान शासकों के साथ संबंध मजबूत किए हैं। चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और क्षेत्र में महत्वपूर्ण आर्थिक निवेश के कारण स्थिति पर बारीकी से नजर रखता है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच क्यों बिगड़े संबंध? (Afghanistan-Pakistan Relation)
1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा को लेकर विवाद शुरू हुआ और अफगानिस्तान ने उस डूरंड लाइन को मानने से इनकार कर दिया, जिसे ब्रिटेन ने खींचा था। अफगानिस्तान ने साफ शब्दों में इस सीमा को मान्यता देने से इनकार कर दिया और उसके बाद से ही दोनों देशों के बीच अकसर विवाद होते रहे।
हाल के दशकों में दोनों देशों की सीमा लगातार आतंकवाद और विद्रोह का गवाह रहा है। पाकिस्तान के मौलानाओं ने तालिबान को मजबूत करने के लिए सीमा के इलाकों में लगातार जिहाज को जहर को फैलाया, जिसका नतीजा अब दिख रहा है, कि अब टीटीपी के लोग सख्त शरिया लागू करने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ ही जिहादी जंग शुरू कर चुके हैं।
पाकिस्तान ने सालों तक इस क्षेत्र का इस्तेमाल अफगान आतंकवादियों के लिए एक पनाहगाह जगह के रूप में किया, खासकर सोवियत-अफगान युद्ध (1979-1989) के दौरान, जब पाकिस्तान ने सोवियत सेनाओं के खिलाफ लड़ाई में अफगान मुजाहिदीन गुटों का समर्थन किया था। इस समर्थन के कारण तालिबान जैसे संगठनों का उदय हुआ, जिसने 1990 के दशक में अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया और अल-कायदा सहित आतंकवादी संगठनों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह प्रदान की।
9/11 के बाद के युग ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंधों में बदलाव लाया और 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी आक्रमण के बाद, पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का सहयोगी बन गया। और उसी तालिबान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का साथ देने लगा, जिसके निर्माण में उसने साथ दिया था।
पाकिस्तान ने इस दौरान भारत के खिलाफ उन आतंकवादियों का इस्तेमाल किया और कश्मीर में जिहादी जहर की हवा घोली। यानि, पाकिस्तान ने आतंकवाद का डबल गेम खेला।
आतंकवाद पर डबल गेम का 'बूमरैंग प्रभाव' ? (How Pakistan spread Terrorism in Afghanistan)
पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने 1990 के दशक में तालिबान के गठन का समर्थन किया था और उसने अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। पाकिस्तान की सोच ये थी, कि वो तालिबान का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करे।
लेकिन, पाकिस्तान का ये दांव उल्टा पड़ गया।
आज की तारीख में ना सिर्फ तालिबान के साथ पाकिस्तान के संबंध काफी ज्यादा बिगड़ चुके हैं, बल्कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के आम लोगों को भी अपने खिलाफ कर लिया है। तालिबान से जुड़े समूह, जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), पाकिस्तान के भीतर हमले करते हुए पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ हो गए हैं। टीटीपी का मकसद पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकना है, जिसके कारण पाकिस्तान के भीतर ही काफी हिंसा और संघर्ष हुआ है।

पक्तिका प्रांत का स्ट्रैटजिक महत्व क्या है? (Strategic importance of Paktika province)
पक्तिका, अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों में से एक है, जो पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों की सीमा से सटा हुआ है। यह क्षेत्र वर्षों से विद्रोही गतिविधियों का केंद्र रहा है, जिसमें पाकिस्तानी तालिबान (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, यानि TTP) सहित विभिन्न आतंकवादी समूह अफगान और पाकिस्तानी बलों से छिपने के लिए बीहड़ इलाकों का इस्तेमाल करते हैं।
यह प्रांत, डूरंड लाइन के पास होने के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जो इसे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच आतंकवादियों के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।
पक्तिका की भौगोलिक स्थिति भी अफगान सरकार और पाकिस्तान दोनों के लिए इस क्षेत्र को सुरक्षित करना मुश्किल बनाती है। पहाड़ी और जंगली क्षेत्र, विद्रोहियों को प्राकृतिक आश्रय प्रदान करते हैं, जबकि जटिल सीमा, दोनों देशों के बीच लड़ाकों और हथियारों की आसान आवाजाही को काफी आसान बना देती हैं। पिछले कुछ वर्षों में, विभिन्न आतंकवादी समूहों ने सीमा पार हमले करने के लिए इन मुश्किल परिस्थितियों का जमकर फायदा उठाया है।
पक्तिका, पाकिस्तान के तीन जिलों की सीमा से सटा है, जिसमें बलूचिस्तान प्रांत का झोब जिला और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दो जिले, दक्षिण वजीरिस्तान और उत्तरी वजीरिस्तान शामिल हैं। गौरतलब है, कि दक्षिण वजीरिस्तान वह जिला है, जहां इस महीने 21 दिसंबर को एक सैन्य चौकी पर हमला हुआ था, जिसमें पाकिस्तानी सेना के 16 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए सीमा पार से आए आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया है।
इस साल मार्च की शुरुआत में अफगान तालिबान ने कहा था, कि पाकिस्तानी विमानों ने अफगानिस्तान के भीतर पक्तिका और खोस्त इलाकों पर बमबारी की, जिसके बाद पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा था, कि हाफिज गुल बहादुर समूह से जुड़े आतंकवादियों को निशाना बनाया गया था।
एयरस्ट्राइक को लेकर पाकिस्तान ने क्या कहा? (Taliban Pakistan Conflict Reason Explained)
पाकिस्तान ने पक्तिका हवाई हमलों के पीछे आतंकवादियों के खिलाफ अभियान बताया है। पाकिस्तान ने कहा है, कि उसका मकसद सीमा क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी समूहों को खत्म करना है।
पाकिस्तान ने लंबे समय से अफगानिस्तान पर विद्रोहियों को पनाह देने का आरोप लगाया है, जो अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले करने के लिए करते हैं, खास तौर पर आदिवासी इलाकों और ख़ैबर पख़्तूनख्वा प्रांत में। जवाब में, पाकिस्तान ने तर्क दिया है, कि उसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए अफगान क्षेत्र पर हवाई हमले और सैन्य अभियान चलाने का अधिकार है।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर आतंकवाद
अफगानिस्तान में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों, विशेष रूप से टीटीपी की मौजूदगी इन हवाई हमलों के प्राथमिक कारणों में से एक है। टीटीपी, पाकिस्तानी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर कई हमलों में शामिल रहा है, जिसके कारण पाकिस्तान को कई हमलों का सामना करना पड़ा है। इन समूहों को अक्सर क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए दोषी ठहराया जाता है, और पाकिस्तान की सेना इन हवाई हमलों को खतरे को रोकने के लिए एक आवश्यक उपाय के रूप में देखती है।

ऑउट ऑफ कंट्रोल होता क्षेत्र
अफगानिस्तान पर नियंत्रण रखने वाले तालिबान के लिए पक्तिका प्रांत पर पूर्ण नियंत्रण रखना मुश्किल है, और इस क्षेत्र में दर्जनों इस्लामिक गुट हैं, जिनके अपने अपने एजेंडे हैं। जिसकी वजह से पूरे इलाके में भारी हिंसा होती रही है। 2021 में अमेरिका की वापसी के बाद अफगानिस्तान में तालिबान के फिर से उभरने से स्थिति और भी खराब हो गई है।
पाकिस्तान, अफगानिस्तान सरकार को सीमा पार विद्रोह से प्रभावी ढंग से निपटने में असमर्थ मानता है, और अपने हवाई हमलो को सही ठहराता है। लेकिन, इन हवाई हमलों के पीछे पाकिस्तान की मंशा कुछ और ही है।
पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया एजेंसियों की लंबे समय से अफगानिस्तान पर प्रभाव बनाए रखने में रणनीतिक दिलचस्पी रही है। हवाई हमले करके, पाकिस्तान का लक्ष्य सीमा पर सक्रिय आतंकवादी समूहों को खत्म करना नहीं, बल्कि उनपर नियंत्रण कायम करना है। ताकि, उन आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल वो अपने मकसद के लिए कर सके।
पाकिस्तान की सेना पर अक्सर घरेलू मतदाताओं, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान क्षेत्रों में आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का दबाव रहता है।
अफगानिस्तान में हवाई हमले, अपने नागरिकों को यह संकेतक देने के लिए है, कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही यह अफगानिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद से लड़ने के पाकिस्तान के संकल्प के बारे में संदेश भी देता है।
लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि पाकिस्तान का डबल गेम आने वाले वक्त में एक ऐसे संघर्ष को जन्म दे सकता है, जिसमें पाकिस्तान ही जलेगा।
इस लड़ाई के अंत में पाकिस्तान ही क्यों जलेगा?
तालिबान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख़्वारज़मी ने कहा है, कि पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि इस तरह की मनमानी कार्रवाई किसी भी समस्या का समाधान नहीं करती है। ख़्वारज़मी के मुताबिक, इन हमलों में बच्चों और नागरिकों को निशाना बनाया गया है।
प्रवक्ता ने कहा, कि "इस्लामिक अमीरात इस क्रूर कृत्य को सभी अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का उल्लंघन और एक स्पष्ट आक्रमण मानता है और इसकी कड़ी निंदा करता है। पाकिस्तानी पक्ष को यह समझना चाहिए, कि इस तरह की मनमानी कार्रवाई किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।"
वहीं पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने हवाई हमलों को एक जबरदस्त आक्रामकता और अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। हामिद करज़ई के कार्यालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है, कि "हामिद करजई दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव को क्षेत्र में चरमपंथ को बढ़ावा देने और अफगानिस्तान को लगातार कमजोर करने की पाकिस्तान की दोषपूर्ण नीतियों का परिणाम मानते हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने अच्छे पड़ोसी और अच्छे पड़ोसी संबंधों पर आधारित सभ्य संबंधों की स्थापना को दोनों देशों के हित में बताया।"
नेशनल रिकॉन्सिलिएशन के हाई काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने भी कहा, कि पक्तिका प्रांत पर पाकिस्तान के हवाई हमले अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन हैं। नेशनल रिकॉन्सिलिएशन के हाई काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष ने एक बयान में जोर देकर कहा, कि दोनों देशों के बीच मौजूदा समस्याओं को कूटनीतिक तरीकों और आपसी सम्मान के आधार पर बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications