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Pakistan: इस खूबसूरत बलोच महिला ने लगा दी आसिम मुनीर की लंका, जानिए कौन है ये हसीना?- Video

Pakistan: इन दिनों एक बलोच महिला ने पाकिस्तान की सरकार और सेना की लंका लगाकर रखी है। वे इन दिनों सीधी पाकिस्तानी आर्मी से भिड़ गई हैं और उसके बड़े अधिकारियों कोर्ट के दरवाजे तक घसीट लाई हैं।

दरअसल पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने मजारी उनके और उनके पति हादी अली चट्ट्ठा के खिलाफ विवादित बयान देते हुए दोनों पर पाकिस्तान का बंटवारा करने और विदेशी एजेंट होने के आरोप लगाए थे। जिसके चलते मजारी ने पाकिस्तानी सेना के DG ISPR और पाकिस्तानी आर्मी को कोर्ट में ही लपेट दिया।

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क्या हैं आरोप?

इमान मजारी और हादी अली चट्ट्ठा पर प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत मुकदमा चल रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आपत्तिजनक सामग्री साझा की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने का आरोप

इमान मजारी की तरफ से दर्ज याचिका में कहा गया है कि सैन्य प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे अदालत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और ट्वीट्स से जुड़े मामले को पहले से ही पूर्वाग्रह (prejudiced) के साथ देखा जाने लगा है।

एफआईए केस में अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी

अदालत ने संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) द्वारा इमान मजारी और हादी अली चट्ट्ठा के खिलाफ दर्ज केस में इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन को इस याचिका पर अपना पक्ष रखना होगा। लिहाजा अब DG ISPR को भी अदालत में पहुंचना होगा।

'देशद्रोहियों का वकील' कहे जाने का दावा

इमान मजारी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने उन्हें प्रेस ब्रीफिंग के दौरान "देशद्रोहियों का वकील" और "विदेशी एजेंट" कहा। मजारी का कहना है कि जब उनका मामला अदालत में लंबित है, ऐसे बयान उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।

अनुच्छेद 10-ए के उल्लंघन की दलील

मजारी ने तर्क दिया कि पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 10-ए के तहत उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। उनके अनुसार, इस तरह के सार्वजनिक बयान न केवल उनके खिलाफ माहौल बनाते हैं बल्कि न्यायिक कार्यवाही में सीधा हस्तक्षेप भी करते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखी- जज

न्यायाधीश माजोका ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से वह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डीजी आईएसपीआर को गवाह के तौर पर बुलाने पर कोई फैसला लेने से पहले अभियोजन पक्ष का जवाब सुना जाएगा।

ट्विटर सर्च और स्क्रीनशॉट पर खुलासे

जिरह के दौरान गवाह शहरोज़ रियाज़ ने स्वीकार किया कि उसने ट्विटर पर इमान मजारी और महरंग बलूच को ठीक से सर्च किया था। उसने बताया कि केस में कुल 11 पेज के स्क्रीनशॉट शामिल किए गए थे। वहीं, बुधवार की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (एनसीसीआईए) के अधिकारी और अभियोजन पक्ष के गवाह शहरोज़ रियाज़ से जिरह भी हुई। बचाव पक्ष ने उनसे उनकी शैक्षणिक योग्यता, वेतन और इस केस में जुटाए गए सबूतों को लेकर कई सवाल पूछे।

कोर्ट रूम से 'ISI के लोगों' को हटाने की मांग

सुनवाई के दौरान इमान मजारी ने अदालत से अनुरोध किया कि 'आईएसआई के लोगों' को कोर्ट रूम से बाहर निकाला जाए। इस पर जज माजोका ने उनसे कहा कि वे पहले यह स्पष्ट करें कि वे किन लोगों की बात कर रही हैं।

बीवाईसी और बीएलए में फर्क न जानने की स्वीकारोक्ति

गवाह ने यह भी माना कि उसे बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) और प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के बीच का अंतर नहीं पता था, जो जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। साथ ही, यह बताता है कि जांच कितनी सघन हुई है।

मरियम नवाज़ के भाषण का वीडियो भी शामिल

5 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में मुख्य अभियोजन गवाह अनीसुर रहमान से जिरह पूरी हुई थी। इस दौरान अदालत में कई राजनीतिक भाषणों और वीडियो बयानों को चलाकर दिखाया गया। इन वीडियो में पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ का एक भाषण भी शामिल था, जिसमें "वर्दी आतंकवाद के पीछे है" और "बाजवा चोर है" जैसे नारे सुनाई दे रहे थे।

राज्य विरोधी नारों पर गवाह की अनिश्चित प्रतिक्रिया

जब गवाह से पूछा गया कि क्या ऐसे नारे राज्य के विरोध के बराबर माने जा सकते हैं, तो अनीसुर रहमान ने कहा कि वह केवल आधिकारिक तौर पर वीडियो की समीक्षा करने के बाद ही इस पर टिप्पणी कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान पूर्व डीजी आईएसपीआर आसिफ गफूर का लापता व्यक्तियों के मुद्दे पर एक वीडियो बयान भी चलाया गया, लेकिन गवाह रहमान ने उस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जिरह में आर्मी के गवाह ने स्वीकार किया कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि पाकिस्तान में जबरन लापता किए जाने का मुद्दा कितना गंभीर है, क्या इस पर कोई आयोग मौजूद है या इस मामले में सरकार की आधिकारिक नीति क्या है।

विभाजन भड़काने और सेना को बदनाम करने का आरोप

एनसीसीआईए का कहना है कि दंपति के सोशल मीडिया पोस्ट भाषाई आधार पर विभाजन फैलाने वाले थे और उन्होंने सशस्त्र बलों को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की।

एफआईआर में लगाए गए गंभीर आरोप

एनसीसीआईए द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक, मजारी और चट्ट्ठा ने खैबर-पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में जबरन गायब होने के मामलों के लिए सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही, उन पर बीएलए और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे प्रतिबंधित संगठनों के विचारों को बढ़ावा देने का भी आरोप है।

मजारी और उनके पति का इनकार: केस राजनीति से प्रेरित

इमान मजारी और हादी अली चट्ट्ठा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और उन्हें निशाना बनाने के लिए दर्ज किया गया है।

आरोप तय, जज के खिलाफ अविश्वास याचिका

अदालत ने अक्टूबर 2024 में दंपति पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे। इसके बाद उन्होंने न केवल केस को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की, बल्कि मौजूदा जज मुहम्मद अफजल माजोका के खिलाफ अविश्वास याचिका भी दायर की है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट में बताएं।

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