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Pakistan Afghanistan War: अफगानिस्तान या पाक, किसकी सेना ज्यादा पावरफुल? लंबी जंग में कौन जीतेगा- Explainer

Pakistan Afghanistan War: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पार हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद तनाव तेजी से बढ़ गया है। दोनों देश एक-दूसरे पर भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इस जंग में होने वाली मौतों और घायलों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक डेटा सामने नहीं आया है।

ये झड़प बॉर्डर से निकलकर अब शहरों तक पहुंच गई है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई शहरों में एयर स्ट्राइक का दावा किया, जबकि अफगानिस्तानी सेना का कहना है कि उन्होंने बीती शाम इस्लामाबाद में एक सफल ड्रोन अटैक किया है। ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि अगर युद्ध लंबे समय तक चला तो कौन किस पर भारी पड़ सकता है।

Pakistan Afghanistan War

किसके पास कितने हथियार?

अफगान अधिकारियों ने पुष्टि की कि उन्होंने पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में डूरंड रेखा के साथ जवाबी कार्रवाई की है। जैसे-जैसे संघर्ष तेज हो रहा है, दोनों देशों के बीच सैन्य ताकत की तुलना फिर चर्चा में है। क्षमता, जनशक्ति और मारक शक्ति के मामले में दोनों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

ग्लोबल रैंकिंग में बड़ा अंतर

Global Firepower इंडेक्स के मुताबिक, पाकिस्तान की सैन्य ताकत दुनिया के 145 देशों में 14वें स्थान पर है, जिसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.2626 है। वहीं अफगानिस्तान 121वें स्थान पर है, जिसका स्कोर 2.7342 है। लंदन स्थित International Institute for Strategic Studies (IISS) के मुताबिक, पाकिस्तान के सशस्त्र बलों को चीन से हथियारों की आपूर्ति, मजबूत भर्ती और लगातार मिल रहे इन्वेस्टमेंट का लाभ मिलता है।

तालिबान के आने से कमजोर हुआ अफगानिस्तान

समाचार एजेंसी Reuters के मुताबिक, 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद अफगानिस्तान की सैन्य क्षमता में गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता की कमी के कारण आधुनिकीकरण और रक्षा सहयोग तक उसकी पहुंच सीमित हो गई है। वर्तमान में, कोई भी देश तालिबान से खुले तौर पर हथियारों की डील नहीं कर रहा है।

सैनिक संख्या में भारी अंतर

ग्लोबल फायरपावर के मुताबिक, पाकिस्तान के पास लगभग 6,60,000 एक्टिव सैन्य जवान हैं। इनमें 5,60,000 सेना में, 70,000 वायुसेना में और 30,000 नेवी में शामिल हैं। इसके अलावा 5,50,000 रिजर्व कर्मी और 5,00,000 अर्धसैनिक बल भी हैं।

इसके मुकाबले अफगानिस्तान के पास लगभग 1,72,000 एक्टिव सैन्य जवान हैं, हालांकि इसे 2,00,000 तक बढ़ाने की योजना बताई गई है। जनसंख्या में भी बड़ा अंतर है-पाकिस्तान की आबादी 252 मिलियन से ज्यादा है, जबकि अफगानिस्तान की लगभग 40 मिलियन है। इससे पाकिस्तान को बड़ा पब्लिक पावर पूल मिलता है।

हवाई ताकत: सबसे बड़ा अंतर

हवाई ताकत में पाकिस्तान को निर्णायक बढ़त हासिल है। ग्लोबल फायरपावर के अनुसार, पाकिस्तान 1,397 विमानों का संचालन करता है, जिनमें 331 लड़ाकू जेट, 90 समर्पित हमलावर विमान, 379 हेलीकॉप्टर और 55 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

इसके विपरीत, अफगानिस्तान के पास कोई आधुनिक लड़ाकू विमान नहीं है। अनुमानों के मुताबिक उसके पास कम से कम छह विमान और 23 हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें से कई सोवियत दौर के हैं और उनको कौन चलाएगा या वे किस कंडीशन में है, ये भी जानकारी नहीं है।

जमीनी ताकत और टैंक क्षमता

जमीनी ताकत में भी पाकिस्तान आगे है। उसके पास 2,677 टैंक, 59,000 से अधिक बख्तरबंद वाहन, 662 स्व-चालित तोपें, 2,629 टोन्ड आर्टिलरी और 652 मोबाइल रॉकेट लॉन्चर हैं। अफगानिस्तान के पास लगभग 3,902 बख्तरबंद वाहन बताए जाते हैं। हालांकि उसके पास मौजूद सोवियत युग के टैंक और तोपों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं है।

मिसाइल और न्यूक्लियर क्षमता

Missile Defence Advocacy.org के मुताबिक, तालिबान को स्टिंगर (8 किमी रेंज) और SA-24 इगला-एस (6 किमी रेंज) जैसे MANPADS सिस्टम हैं, जो विरासत में मिले हैं। 2021 में तालिबान ने कथित तौर पर 300 किमी रेंज वाली स्कड-बी बैलिस्टिक मिसाइल और 68 किमी रेंज वाली FROG-7 रॉकेट सिस्टम भी खोजे थी, जो सोवियत दौर की हैं।

इसके उलट, पाकिस्तान के पास शाहीन मिसाइल की अच्छी खासी सीरीज और अबाबील जैसी लंबी दूरी के मिसाइल सिस्मट हैं। साथ ही, उसके पास 170 के करीब न्यूक्लियर हथियार भी हैं। अनुमान है कि उसके पास लगभग 170 न्यूक्लियर हथियार हैं। अफगानिस्तान के पास कोई न्यूक्लियर क्षमता नहीं है।

नेवी और रक्षा बजट

अफगानिस्तान के पास कोई नेवी नहीं है। वहीं, पाकिस्तान के पास आठ पनडुब्बियां, नौ फ्रिगेट, छह कॉर्वेट और कई गश्ती पोतों वाली एक एक्टिव नेवी है। रक्षा बजट में भी बड़ा अंतर है। पाकिस्तान का रक्षा बजट लगभग 9.1 बिलियन डॉलर है (वैश्विक रैंक 38), जबकि अफगानिस्तान का बजट लगभग 145 मिलियन डॉलर है (रैंक 136)। यह अंतर खरीद, प्रशिक्षण और तकनीकी उन्नयन पर सीधा असर डालता है।

जमीनी हकीकत

पारंपरिक सैन्य ताकत के आंकड़े पाकिस्तान को स्पष्ट बढ़त देते हैं, लेकिन सीमा संघर्ष केवल हथियारों के आंकड़ों से तय नहीं होते। इलाके की भौगोलिक कठिनाई, अनियमित युद्ध, स्थानीय समर्थन और राजनीतिक कारक भी नतीजों को प्रभावित करते हैं। वहीं गोरिल्ला युद्ध नीति ऐसी तालिबान का वो हथियार है जिसके दम पर वह अमेरिका से 20 सालों से भी ज्यादा वक्त तक लड़ता रहा और आखिर में अमेरिका को ही घुटने टेकने पड़े।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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