Pakistan Turkiye Relation: तुर्किए पाकिस्तान की क्या मदद कर रहा? कश्मीर पर भी पाक से साथ रहे एर्दोगन
Pakistan Turkiye Relation: फरवरी 2023 में तुर्किए में आए भारी भूकंप ने हजारों लोगों की जान ले ली थी, लेकिन उस वक्त भारत ने तुर्किए की काफी मदद की थी। भारत ने अपनी NDRF दो बड़ी टीमें तुर्किए में भेजी जिसने वहां तेजी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर कई लोगों की जान बचाई थी। इसके अलावा चिकित्सा कैंप, पैरामेडीकल स्टाफ, राशन, बच्चों और लोगों के लिए कपड़े यहां तक कि बच्चों के लिए खिलौने तक भेजे थे। इस मदद का खर्चा आंका जाए तो कई करोड़ रुपए की मदद उस वक्त भारत ने तुर्किए को पहुंचाई थी। इसके अलावा अकेले केरल राज्य ने तुर्किए को 10 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मदद भेजी थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव में तुर्किए की संलिप्तता को देखें तो ऐसा कहीं से नहीं लगता कि तुर्किए को भारत का वो एहसान याद है।
पाकिस्तान कर रहा तुर्किए के ड्रोन से हमला
भारत ने गुरुवार रात पाकिस्तान की ओर से किए गए एक बड़े ड्रोन हमले को सफलतापूर्वक रोक लिया था। इस हमले में पश्चिमी सीमा पर 36 जगहों को निशाना बनाया गया, जिसमें 300 से ज़्यादा ड्रोन शामिल थे। जिन जगहों को निशाना बनाया गया था, उनमें रिहायशी और सैन्य दोनों तरह के इलाके शामिल थे। इसके अलावा स्कूल और अस्पताल जैसी जगहों को भी निशाना बनाया गया। वहीं इन हमलों में जो ड्रोन मार गिराए वे शुरुआती जांच में तुर्किए निर्मित लग रहे हैं। क्योंकि ये ड्रोन्स तुर्किए के असीसगार्ड सोंगर मॉडल के हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इसकी पुष्टि की।

पाकिस्तान पहुंचा तुर्किए का C-130 हरक्यूलिस विमान
2 मई को तुर्किए का एडा क्लास एंटी-सबमरीन कोरवेट कराची बंदरगाह पर पहुंचा और 27 अप्रैल को तुर्किए का C-130 हरक्यूलिस विमान वहां उतरा। तुर्किए का दावा है कि ये नियमित एक्सरसाइज का हिस्सा थे और इसमें पड़ाव थे और उसने किसी भी हथियार के शामिल होने से साफ इनकार किया था। हालांकि, पाकिस्तान के साथ तुर्किए की साझेदारी भारत के प्रति उसके रुख से बिल्कुल अलग है।
तुर्किए-पाकिस्तान संबंधों का इतिहास
तुर्किए और पाकिस्तान के बीच का रिश्ता उनकी साझा इस्लामी पहचान में साफ दिखता है। कोल्ड वॉर के दौरान, वे CENTO और RCD जैसे गठबंधनों का हिस्सा थे। संकटों में उन्होंने लगातार एक-दूसरे का समर्थन किया है, जैसे कि साइप्रस में ग्रीस के खिलाफ़ तुर्किए का समर्थन करने वाला पाकिस्तान। जब भी कभी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर को लेकर बात होती तब तुर्किए पाकिस्तान के नेरेटिव का खुलकर समर्थन करता है। रेसेप तैयप एर्दोगन के उदय के बाद से, संबंध और भी मजबूत हुए हैं। एर्दोगन ने 2003 से कई बार पाकिस्तान का दौरा किया है, जिसमें उनका आखिरी दौरा फरवरी में हुआ था जिसमें पाकिस्तान ने तुर्किए को SCO (Strategic Cooperation Counil) के लिए बुलाया था।
साथ में प्रैक्टिस करती हैं तुर्किए-पाक की सेनाएं
तुर्किए पाकिस्तान और मलेशिया जैसे गैर-खाड़ी मुस्लिम देशों के साथ सहयोग की मांग करके खाड़ी के अपने प्रतिद्वंद्वी सऊदी अरब और यूएई के साथ कॉम्प्टीशन की कोशिश करता है। 2019 कुआलालंपुर शिखर सम्मेलन ने मुस्लिम दुनिया में सऊदी नेतृत्व को चुनौती देते हुए इस रणनीति का उदाहरण पेश किया था। हाल ही में हिंद महासागर क्षेत्र पर तुर्किए का ध्यान बढ़ा है। 2017 में, इसने सोमालिया में अपना सबसे बड़ा विदेशी बेस स्थापित किया और 2024 में मालदीव को बायकर टीबी-2 ड्रोन बेचे। तुर्किए की नौसेना अक्सर पाकिस्तान की नौसेना के साथ ज्वॉइंट प्रैक्टिस करती है।
कश्मीर पर पाक के समर्थन में तुर्किए
कश्मीर पर तुर्किए के समर्थन से पाकिस्तान को फ़ायदा हुआ है। एर्दोगन ने फरवरी में कश्मीरियों के साथ एकजुटता दोहराई, जिस पर भारत ने विरोध जताया। पाकिस्तानी विधायकों ने हाल के तनावों के दौरान चीन और अज़रबैजान के साथ तुर्किए को एक प्रमुख समर्थक के रूप में स्वीकार किया। रक्षा क्षेत्र में पाकिस्तान को तुर्किए से सबसे ज़्यादा फ़ायदा मिलता है। 2015-2019 और 2020-2024 के बीच तुर्किए के हथियारों के निर्यात में 103% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे तुर्किए, पाकिस्तान का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है।
तुर्किए के कौन-कौन से हथियार पाक के पास
तुर्किए की राजधानी अंकारा और इस्लामाबाद के बीच 1988 में स्थापित मिलिट्री एडवाइजरी ग्रुप के रूप में एक बड़ा कदम था। पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हाल ही में हुई डील में बायरकटर ड्रोन और केमानकेस मिसाइलें शामिल हैं, जिनमें असिसगार्ड सोंगर एक नया शामिल है। इसके अलावा तुर्किए पाकिस्तानी नेवी को और मजबूत बनाने में मदद करने में लगा है। 2018 में, STM Defence Technologies ने पाकिस्तानी नौसेना के लिए चार कोरवेट के लिए $1 बिलियन का सौदा किया था। एसटीएम पाकिस्तान के लिए अगोस्टा पनडुब्बियों को भी अपग्रेड करता है।
पाक-तुर्किए की दोस्ती में भारत कहां?
कश्मीर मुद्दे पर तुर्किए का पाकिस्तान को समर्थन भारत के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक बार तुर्किए को पाकिस्तान की भारत के खिलाफ वाले मामलों में मदद न करने की सलाह दी थी। भारत इस गठबंधन का मुकाबला ग्रीस समर्थित साइप्रस और आर्मेनिया के साथ संबंधों को मजबूत करके कर रहा है, जो तुर्किए के हितों के विरोधी हैं। अज़रबैजान के साथ संघर्ष के बीच भारत 2024 के अंत तक आर्मेनिया का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन जाएगा
भारत ने तुर्किए को किया नजरअंदाज
अमेरिका ने अपना ध्यान अफगानिस्तान-पाकिस्तान से हटाकर भारत के साथ हिंद-प्रशांत साझेदारी पर केंद्रित कर लिया है और 2022 से अपनी आधिकारिक रणनीति में इस्लामाबाद को दरकिनार कर दिया है। इस बीच, भारत के मध्य पूर्व-यूरोप इकॉनोमिक कोरिडोर (Middle East Europe Economic Corridor) में तुर्किए को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।इस कॉरिडोर की एर्दोआन ने आलोचना की है।
पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहा तुर्किए
दरअसल तुर्किए को एक ऐसा सहयोगी चाहिए जिसके जरिए वह मेडिटेरेनियन सी में खुद की स्थिति मजबूत कर सके और अरब सागर में खुद को मिलने वाले सहयोग को और बढ़ा सके। साथ ही साथ हिन्द प्रशांत क्षेत्र में भारत के बढ़ते दबदबे से भी वह परेशान है। इसके अलावा भारत का मेडिटेरेनियन सी में बढ़ते दखल से भी एर्दोगन चिंतित हैं। लिहाजा ऐसे में वह पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए हुए हैं। हालांकि तुर्किए और पाकिस्तान की इस्लामिक विचारधाराओं में जमीन-आसमान का फर्क है।
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