बंदरगाह के बाद एयरपोर्ट भी बेचेगा पाकिस्तान, कंगाली में एक-एक इंच बिक जाएगी जिन्ना के देश की जमीन?
Pakistan Economic Crisis: कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब बंदरगाह के बाद एयरपोर्ट भी बेचने का फैसला किया है और डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ की सरकार इस्लामाबाद एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करने के लिए तैयार हो गई है।
शहबाज शरीफ की सरकार ने सोमवार को फैसला लिया है, कि फिलहाल सिर्फ इस्लामाबाद एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करने का फैसला लिया है। माना जा रहा था, शहबाज सरकार ने पहले पाकिस्तान के तीनों इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स, इस्लामाबाद, कराची और लाहौर एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करने का विचार किया था, लेकिन तीनों एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करने का फैसला फिलहाल रोक दिया गया है।

एयरपोर्ट की बिक्री कर रही शहबाज सरकार
पाकिस्तानी ऑब्जर्वर्स का कहना है, कि तीनों एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करने का विचार फिलहाल के लिए इसलिए छोड़ दिया गया है, क्योंकि इससे सरकार की इमेज और भी खराब हो जाती है। लिहाजा, फिलहाल सिर्फ इस्लामाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईआईए) को ही ऑउटसोर्स का फैसला लिया गया है।
बाकी के दोनों एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करने का फैसला 'जनता की यादाश्त' खत्म होने के बाद लिया जाएगा। आपको बता दें, कि इसी महीने शहबाज सरकार ने कराची एयरपोर्ट को संयुक्त अरब अमीरात को लीज पर दे दिया है। वहीं, अमेरिका में भी पाकिस्तान के एक प्रसिद्ध होटल को लीज पर दिया गया है।
डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार की अध्यक्षता में हवाई अड्डे के संचालन की आउटसोर्सिंग पर एक संचालन समिति की बैठक की गई है। जिसमें विश्व बैंक के अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम के लेन-देन सलाहकार भी उलझन में थे, क्योंकि सरकार ही ये तय नहीं कर पा रही थी, कि तीनों एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स किया जाए, या सिर्फ एक।
इस बैठक के दौरान वर्ल्ड बैंक की तरफ से शामिल International Finance Corporation के अधिकारी काफी अनिश्चित थे, कि सरकार आखिर करना क्या चाहती है।
डॉन के मुताबिक, आखिरकार पाकिस्तान सरकार इस नतीजे पर पहुंची, कि फिलाहल सिर्फ इस्लामाद एयरपोर्ट को ही किसी विदेशी कंपनी के हाथों ऑउटसोर्स किया जाएगा और बाकी के दोनों एयरपोर्ट्स पर फैसला बाद में लिया जाएगा।
ऑउटसोर्स के फैसले के बाद अब इस्लामाबाद एयरपोर्ट से संचालन से संबंधित हर एक फैसला कोई विदेशी कंपनी करेगी।
डिफॉल्ट होने से बचने की कोशिश
डॉन के मुताबिक, पिछले दिनों इकोनॉमिक कॉर्डिनेशन कमेटी (ECC) ने पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय को निर्देश दिया था, कि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए तीनों एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करना चाहिए और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के जरिए तीनों एयरपोर्ट की जमीनों, उसकी संपत्तियों और उससे संबंधित हर एक काम किसी विदेशी कंपनी को सौंप जानिए।
ECC ने सरकार को 25 सालों के लिए तीनों एयरपोर्ट को ऑउटसोर्स करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सिर्फ एक एयरपोर्ट को ही ऑउटसोर्स करने का फैसला लिया गया।
ECC के निर्देश के बाद वर्ल्ड बैंक के आईएफसी के अधिकारी और पाकिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (पीसीएए) के अधिकारियों ने अप्रैल के दूसरे सप्ताह में लेनदेन सेवा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद सलाहकारों की तकनीकी टीमों ने तीनों हवाई अड्डों का दौरा किया था।
बंदरगाह की भी बिक्री कर रहा पाकिस्तान
आपको बता दें, कि इसी महीने पाकिस्तान सरकार ने कराची बंदरगाह को बेचने का फैसला कर लिया है और बिक्री की प्रक्रिया को फाइनल करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है, जो कराची बंदरगाह को बेचने के लिए डील करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, कि ये कमेटी संयुक्त अरब अमीरात से कराची बंदरगाह की बिक्री को लेकर डील को फाइनल करेगा।
इस फैसले के मुताबिक, कराची बंदरगाह टर्मिनलों को सौंपने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की एक नामित एजेंसी के साथ सरकार से सरकार की व्यवस्था के तहत एक मसौदा संचालन, रखरखाव, निवेश और विकास समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता समिति को भी अनुमति दी गई है।
पाकिस्तान की कोशिश अबू धाबी पोर्ट्स ग्रुप की सहायक कंपनी अबू धाबी पोर्ट्स (एडीपी) को टर्मिनलों को सौंपने के लिए एक समझौते पर पहुंचने की है। यूएई सरकार ने पिछले साल पाकिस्तान इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल्स (पीआईसीटी) के प्रशासनिक नियंत्रण वाले कराची पोर्ट टर्मिनलों को हासिल करने में दिलचस्पी दिखाई थी।












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