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Pakistan Selling PIA : बिकने की कगार पर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन (PIA), लेकिन खरीदेगा कौन?

Pakistan Selling PIA : पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की आर्थिक स्थिति को लेकर जब भी कोई ख़बर आती थी तो इसमें हर साल बढ़ते हुए घाटे की चर्चा होती थी या फिर ऐसी खबरें सामने आती थीं कि तेल का दाम ना चुका पाने के कारण पीआईए के विमान को किसी देश ने जबरन रख लिया. अब पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि पीआईए ने 21 साल के लंबे अरसे के बाद पहली बार मुनाफ़ा कमाया है. पाकिस्तान सरकार एक बार फिर अपनी राष्ट्रीय एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) के प्राइवेटाइजेशन की तैयारी में है। इससे पहले 2024 में एयरलाइन की नीलामी करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब इसे कोई खरीददार ही नहीं मिले और इसके कारण पीआईए को कोई माई बाप नसीब ना हो सका। उस समय सबसे ज़्यादा बोली सिर्फ़ 10 बिलियन डॉलर की थी। अब PIA के प्राइवेटाइजेशन की चर्चा फिर से शुरू हो गई है।

मई तक बिक जाएगी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स

प्राइवेटाइजेशन और निवेश मंत्री अब्दुल अलीम खान ने घोषणा की कि मई तक पूरे पीआईए का प्राइवेटाइजेशन कर दिया जाएगा। बुधवार को प्रधानमंत्री की मौजूदगी में एक बैठक हुई। इस बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया कि पीआईए के विभाजन की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होगी। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीआईएसीएल) के विभाजन के लिए एक लैटर भी तब तक प्रकाशित होने वाला है।

Pakistan Selling PIA

घाटे का बेताज बादशाह PIA

2011 से ही PIA लगातार घाटे में चल रही है, जिसका उसकी माली हालत पर बहुत बुरा असर पड़ा है। अकेले 2011 में ही एयरलाइन को 26.76 अरब रुपये का घाटा हुआ था। 2013 तक यह घाटा बढ़कर 44.53 अरब रुपये हो गया था। 2018 में PIA का कुल कर्ज 3.3 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 550 अरब रुपये तक पहुंच गया। हालात ये थे कि विमानों में तेल डलाने तक के पैसे पीआईए के पास नहीं बचे थे।

सरकार ने चुकाया कर्जा तब घाटे से उबरी पीआईए

2023 के पहले नौ महीनों में PIA ने 75.76 बिलियन रुपये का कुल घाटा दर्ज किया। हालांकि, 2024 में, लगभग दो दशकों में पहली बार, PIA ने 2.26 बिलियन रुपये का लाभ दर्ज किया। यह बदलाव इसलिए संभव हुआ क्योंकि सरकार ने 600 बिलियन रुपये से अधिक के कर्ज और ब्याज की जिम्मेदारी ली।

फायदे की एक छोटी सी उम्मीद

डीमर्जर तब होता है जब किसी बड़ी इकाई को इसमें सुधार या घाटे को कम कीरने के लिए छोटे भागों में विभाजित किया जाता है। और यही बात PIA पर लागू हो रही है। शुरुआत में, निजी निवेशकों को इसके 51% से 100% शेयर बेचने से पहले इसे डीमर्ज किया जाएगा। जिसका मकसद के वित्तीय बोझ को कम करना है और एयरलाइन को नई दिशा देना। उम्मीद है कि इस फैसले से पीआईए को एक नई दिशा मिलेगी और यह चलता रहेगा। हालांकि जब तक कोई इसे खरीद नहीं लेता तब तक मामला संशय में ही है।

किराए में हो सकती है बढ़ोतरी

पीआईए के प्राइवेटाइजेशन और विभाजन से जनता पर मिला-जुला प्रभाव पड़ सकता है। एक तरफ, एयरलाइन को पहले मिलने वाली राशि को कहां लगाना है इस पर जोर होगा और दूसरा, प्राइवेटाइजेशन के बाद टिकट के दामों में बढ़ोतरी की पूरी संभावना है। सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तानी जनता की जेब पर कैंची चलना तय लग रहा है।

मौजूदा कर्मचारियों की नौकरी पर संकट

इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों की छंटनी जैसे उपाय भी लागू किए जा सकते हैं, जिससे पाकिस्तान भर में कई परिवार प्रभावित हो सकते हैं। जिनमें पायलट से लेकर क्रू मेंबर्स तक की फैमिली शामिल हो सकती हैं।

अभी कितने कर्ज में पीआईए?

वर्तमान में कुल कर्ज 697.05 अरब रुपये है - जो पहले से ही पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्योंकि विमान उड़ाना भी जरूरी है और आर्थिक गतिविधियों को भी नहीं रोका जा सकता। लिहाजा, भले ही पाकिस्तान अपनी एयरलाइन का प्राइवेटाइजेशन कर ले, लेकिन ये रास्ता भी उतना आसान नहीं होगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है हमें कॉमेंट में जरूर बताएं

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