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Pakistan News: पाकिस्तान की बल्ले-बल्ले, खैबर-पख्तूनख्वा में मिला तेल-गैस का विशाल भंडार

Pakistan Oil and Gas Discovery: कंगाली और आतंकवाद के दोराहे पर खड़े पाकिस्तान के लिए खैबर-पख्तूनख्वा से एक ऐसी खबर आई है, जिसे वहां की सरकार 'कुदरत का करिश्मा' मान रही है। कंगाली की कगार पर पहुंचे जिन्ना के देश की धरती ने तेल और गैस का एक विशाल खजाना उगला है। विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के लिए यह खोज किसी लाइफ-सपोर्ट सिस्टम से कम नहीं है।

हालांकि, सवाल यह है कि क्या आतंकवाद और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा यह देश इस 'सोने से भी कीमती' खजाने का सही इस्तेमाल कर पाएगा या यह भी बदहाली की भेंट चढ़ जाएगा?

Pakistan Oil and Gas Discovery

Khyber Pakhtunkhwa Oil Treasure: धरती के सीने में मिला काला सोना

खैबर-पख्तूनख्वा के कोहाट जिले में ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (OGDCL) को हाइड्रोकार्बन का एक बहुत बड़ा भंडार मिला है। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने करीब 5,170 मीटर की गहराई तक खुदाई की, जिसके बाद 187 मीटर का एक विशाल हाइड्रोकार्बन क्षेत्र सामने आया। दावों के मुताबिक, यहां से रोजाना 4,100 बैरल कच्चा तेल और लगभग 1 करोड़ 5 लाख क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का उत्पादन किया जा सकता है, जो पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक बड़ा सहारा है।

शहबाज शरीफ की 'ऑक्सीजन' वाली उम्मीद

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस खोज को देश की तकदीर बदलने वाला अवसर मान रहे हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ने का मतलब है-महंगे आयात पर निर्भरता कम होना। सरकार ने इसी साल से 'शेल गैस कार्यक्रम' पर काम शुरू कर दिया है, जिसका लक्ष्य तेल के कुओं की संख्या बढ़ाकर उत्पादन को कई गुना करना है। शहबाज इसे पाकिस्तान की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं।

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इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की बड़ी चुनौती

खजाना मिलना एक बात है, लेकिन उसे जमीन से निकालकर लोगों तक पहुँचाना दूसरी। पाकिस्तान की वर्तमान आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वह रिफाइनरियों और पाइपलाइनों के विशाल नेटवर्क पर भारी निवेश कर सके। कर्ज के जाल में फंसा पाकिस्तान अब विदेशी निवेशकों की ओर देख रहा है, लेकिन अस्थिर अर्थव्यवस्था को देखते हुए कोई भी देश वहां पैसा लगाने से पहले सौ बार सोचेगा। बिना आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के यह बेशकीमती खजाना सिर्फ जमीन के नीचे दबा एक सपना बनकर रह सकता है।

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सुरक्षा और विद्रोही समूहों का खतरा

जिस इलाके (खैबर-पख्तूनख्वा) में यह भंडार मिला है, वह लंबे समय से अशांत रहा है। वहां सक्रिय विद्रोही समूह और बढ़ता आतंकवाद ऐसी बड़ी परियोजनाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। पाकिस्तान की सेना के लिए इन तेल और गैस के कुओं को आतंकियों से सुरक्षित रखना एक सिरदर्द साबित होगा। यदि सरकार सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाती, तो विदेशी कंपनियां काम छोड़कर भाग सकती हैं, जैसा कि बलूचिस्तान की परियोजनाओं के साथ पहले भी कई बार हो चुका है।

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