Mir Yar Baloch: 'चीन करेगा बलूचिस्तान पर कब्जा, हम भारत के साथ', पाकिस्तान से जयशंकर को किसने लिखा लेटर?
Mir Yar Baloch letter to Jaishankar: बलूच नेता मीर यार बलूच द्वारा भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखा गया खुला खत अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े भूचाल का संकेत है। इस पत्र में न केवल पाकिस्तान के दशकों पुराने अत्याचारों का कच्चा चिट्ठा खोला गया है, बल्कि चीन के उस खतरनाक इरादे का भी पर्दाफाश किया गया है जो भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
बलूचिस्तान की आजादी की मांग और भारत के साथ आध्यात्मिक व रणनीतिक संबंधों की दुहाई देते हुए इस पत्र ने इस्लामाबाद और बीजिंग के गठजोड़ को सीधी चुनौती दी है।

चीन की सैन्य तैनाती का बड़ा खुलासा
मीर यार बलूच ने अपनी चिट्ठी में सबसे चौंकाने वाला दावा चीन की सेना को लेकर किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) अब अपने अंतिम चरण में है और पाकिस्तान की मिलीभगत से चीन जल्द ही बलूचिस्तान की धरती पर अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात करने वाला है। बलूच नेता के अनुसार, यदि बलूच रक्षा बलों को मजबूत नहीं किया गया, तो अगले कुछ महीनों में यह क्षेत्र चीनी सैनिकों का अड्डा बन जाएगा, जो भारत के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा होगा।
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पाकिस्तान की जड़ों पर प्रहार: उखाड़ फेंकने की मांग
पत्र में पाकिस्तान के 79 सालों के शासन को आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का काल बताया गया है। मीर यार ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि अब समय आ गया है कि इस कैंसर रूपी समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाए। उन्होंने बलूचिस्तान की संप्रभुता और शांति के लिए पाकिस्तान के अस्तित्व को ही चुनौती दे दी है। बलूच नेता ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई की भी सराहना करते हुए भारत से और भी ठोस कदम उठाने की अपील की है।
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साझा विरासत: हिंगलाज माता का आध्यात्मिक बंधन
भारत और बलूचिस्तान के बीच केवल रणनीतिक ही नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक संबंधों का भी जिक्र इस पत्र में किया गया है। मीर यार ने 'हिंगलाज माता मंदिर' (नानी मंदिर) का उदाहरण देते हुए कहा कि यह पवित्र स्थल दोनों क्षेत्रों की साझा विरासत और शाश्वत आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने भारत को याद दिलाया कि 6 करोड़ बलूच जनता की इच्छा के विरुद्ध चीनी हस्तक्षेप न केवल बलूचिस्तान के लिए, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सुरक्षा सीमाओं के लिए भी घातक सिद्ध होगा।
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भारत से सैन्य और रणनीतिक सहयोग की पुकार
बलूच नेता ने नई दिल्ली से पारस्परिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को 'ठोस और कार्रवाई योग्य' बनाने की मांग की है। उनका तर्क है कि भारत और बलूचिस्तान के सामने मौजूद खतरे वास्तविक हैं, इसलिए दोनों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने अपील की है कि बलूचिस्तान की आजादी समर्थक ताकतों को नजरअंदाज न किया जाए। यह पत्र संकेत देता है कि बलूचिस्तान अब अपनी मुक्ति के लिए पूरी तरह से भारत के सक्रिय सहयोग और कूटनीतिक हस्तक्षेप की ओर देख रहा है।












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