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पाकिस्तान में मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने चर्च को फूंका, ईशनिंदा के आरोप में आगजनी, दहशत में ईसाई

Pakistan News: पाकिस्तान में वैसे तो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को करीब करीब खत्म किया जा चुका है, लेकिन जो कुछ भी बचे हैं, उनकी जिंदगी भी नर्क बनाकर रख दी गई है। इस बार मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने फैसलाबाद जिले में एक चर्च को फूंक दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईशनिंदा का आरोप लगाकर चर्च को जला दिया गया है और उसे नेस्तनाबूद कर दिया गया है। लाहौर स्थिति बिशप, आजाद मार्शल के मुताबिक, पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर एक और हमले में, फैसलाबाद जिले में एक चर्च में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई है।

ईशनिंदा के आरोपों के बाद भीड़ ने पंजाब प्रांत के फैसलाबाद जिले में एक चर्च में तोड़फोड़ की और उसे नष्ट कर दिया।

pakistan church

पाकिस्तान में चर्च में लगाई गई आग

बिशप मार्शल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर लिखते हुए कहा है, कि "यह लिखते समय मेरे पास शब्द नहीं हैं। हम, बिशप, पुजारी और आम लोग पाकिस्तान के फैसलाबाद जिले में जरनवाला घटना पर बहुत दुखी और व्यथित हैं।"

उन्होंने कहा, "जिस वक्त में इस मैसेज को टाइप कर रहा हूं, उस वक्त यहां एक चर्च में आग लगाई जा रही है। बाइबिल का अपमान किया गया है और ईसाइयों पर, पवित्र कुरान का उल्लंघन करने का झूठा आरोप लगाया गया है और उन्हें प्रताड़ित किया गया है।"

बिशप मार्शल ने कहा, कि वह न्याय और उन पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा की मांग की है और कहा है, कि जिस पाकिस्तान में अभी भी स्वतंत्रता दिवस मनाया गया है, आजादी का जश्न मनाया गया है, वहां अल्पसंख्यकों के पास कोई आजादी नहीं है।

हालांकि, पाकिस्तान की स्थापना 1947 में एक सहिष्णु और समतावादी देश बनाने के इरादे से की गई थी, लेकिन, वो सिर्फ कहने के लिए था। पाकिस्तान को एक इस्लामिक देश बनाया गया और पिछले 76 सालों में अल्पसंख्यकों को करीब करीब खत्म कर दिया गया है।

अल्पसंख्यकों के लिए काल बना पाकिस्तान

पिछले महीने ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने कहा था, कि 1947 में आजादी के बाद से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23 फीसदी से घटकर 3 फीसदी रह गई है।

उन्होंने कहा, कि "इसके पीछे कई कारण हैं, मुख्य कारणों में से एक था जब पाकिस्तान को इस्लामिक देश घोषित किया गया था। 1973 में, जब संविधान की स्थापना हुई, तो अनुच्छेद 2 में कहा गया था, कि इस्लाम एक राज्य धर्म होगा। अनुच्छेद 41 (2) में ) यह घोषित किया गयास कि राष्ट्रपति हमेशा एक मुस्लिम होगा। अनुच्छेद 91 में दोहराया गया, कि प्रधान मंत्री हमेशा एक मुस्लिम होगा। 1980 के दशक में संविधान में कई संशोधन हुए, जब तानाशाह मुहम्मद जिया-उल-हक ने संशोधन किया।"

नवीद वाल्टर ने कहा, कि "पाकिस्तान का संविधान शरिया कानून के अनुसार है।"

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा, कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए ईशनिंदा कानून लाया गया था। इसके लागू होने के बाद से पूरे पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं और कई लोग जेल में बंद हैं।

बीएनएन नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, जून में भी, बहावलपुर की एक स्थानीय अदालत ने 22 वर्षीय ईसाई युवक नोमान मसीह को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। उस फैसले पर विभिन्न मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

इसी महीने में एक और हिन्दू युवक को पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वहीं, पिछले साल पाकिस्तान में श्रीलंका के रहने वाले एक मैनेजर को ईशनिंदा के आरोप में पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था।

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