Pakistan: संसद में पास हुआ भ्रष्टाचार से बचाने वाला बिल, जानता को चूना लगाने के लिए शरीफ ने बनाया प्लान!
Pakistan: वैसे तो पाकिस्तान के नेताओं और अफसरों की भ्रष्टाचारी के किस्से दुके-छुपे नहीं रहते। बावजूद इसके भ्रष्टाचार की पोल न खुल सके इसलिए पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (National Assembly) ने बुधवार को एक अहम बिल पास कर दिया है। इस नए कानून के तहत सांसदों को सुरक्षा कारणों के चलते एक साल तक अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक न करने की अनुमति मिल सकती है। यानी अब पाकिस्तान के सांसद जितनी मर्जी संपत्ति खड़ी करें, उसे सुरक्षा कारणों का हवाला देकर छिपाया जा सकता है।
संपत्ति की जानकारी गोपनीय रखने की मिलेगी छूट
इस संशोधन के अनुसार, पाकिस्तान नेशनल असेंबली के अध्यक्ष या सीनेट चेयरमैन को यह अधिकार मिलेगा कि वे चुनाव आयोग (ECP) को सांसदों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करने से रोक सकें। यह फैसला तब लिया जाएगा जब यह माना जाए कि संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक होने से किसी सांसद या उसके परिवार की जान और सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

डॉन अखबार ने क्या बताया
डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गोपनीयता तभी दी जाएगी जब सार्वजनिक प्रकटीकरण से सांसद या उसके परिवार को वास्तविक सुरक्षा जोखिम हो। यानी यह छूट सभी के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा मामलों में लागू की जाएगी। मतलब जिस पार्टी की सत्ता होगी उसकी बल्ले-बल्ले है। दूसरी तरफ पाकिस्तानी आवाम इसे भ्रष्टाचार से बचाने वाला बिल बता रही है। जिसका इमरान खान की पार्टी PTI ने भी विरोध किया है।
अब तक क्या था नियम?
वर्तमान नियमों के तहत, नेशनल असेंबली, सीनेट और प्रांतीय विधानसभाओं के सभी सांसदों को हर साल 31 दिसंबर तक चुनाव आयोग को अपनी पूरी संपत्ति और देनदारियों की जानकारी देना होती थी। इसमें जीवनसाथी और बच्चों की संपत्ति की जानकारी भी शामिल होती है।
चुनाव अधिनियम की धारा 138 की भूमिका
चुनाव अधिनियम की धारा 138 के अनुसार, चुनाव आयोग को सांसदों द्वारा दी गई संपत्ति घोषणाओं को आधिकारिक गजट में प्रकाशित करना अनिवार्य है। यही वजह है कि यह जानकारी अब तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहती थी। जिससे जानने के बाद अक्सर मीडिया और जनता अपने फेवरेट माननीयों से सवाल पूछ लिया करती थी। इसलिए अब न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी।
नए विधेयक में क्या बदला
नए विधेयक में धारा 138 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत सांसदों को अधिकतम एक वर्ष तक संपत्ति विवरण सार्वजनिक न करने की छूट मिल सकती है। हालांकि, शर्त यह है कि सांसद को अपनी पूरी और सच्ची संपत्ति की जानकारी गोपनीय रूप से चुनाव आयोग को देनी होगी।
सिर्फ एक धारा नहीं, कई बदलाव
इस बदलाव के साथ-साथ नेशनल असेंबली ने चुनाव अधिनियम की नौ अन्य धाराओं में भी संशोधन किया है। संशोधित कानून को अब "चुनाव (संशोधन) अधिनियम, 2026" कहा जाएगा। इनमें से अधिकतर संशोधन 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद हुए न्यायिक बदलावों के अनुसार कानूनी शब्दावली को अपडेट करने के लिए किए गए हैं, ताकि कानून मौजूदा न्यायिक ढांचे से मेल खा सके।
सुप्रीम कोर्ट से फेडरल कॉन्स्टीट्यूशनल कोर्ट तक
उदाहरण के तौर पर, कानून में जहां पहले "सुप्रीम कोर्ट" का जिक्र था, वहां अब "संघीय संविधान" से संबंधित शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। यह बदलाव संघीय संवैधानिक न्यायालय (Federal Constitutional Court - FCC) के गठन को दर्शाता है।
27वें संवैधानिक संशोधन का असर
गौरतलब है कि नवंबर में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन के तहत एफसीसी की स्थापना की गई थी और सैन्य नेतृत्व संरचना में भी बड़ा पुनर्गठन किया गया था। मौजूदा संशोधन उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
अभी कानून बनने में बाकी है एक कदम
हालांकि, यह विधेयक अभी पूरी तरह कानून नहीं बना है। इसके लिए सीनेट की मंजूरी और राष्ट्रपति की औपचारिक सहमति अभी बाकी है। इन दोनों चरणों के बाद ही यह संशोधन आधिकारिक रूप से लागू हो पाएगा।
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