Punjab Congress में मानमनौवल बेअसर! भूपेश बघेल के चाय वाले ऑफर को चन्नी ने ठुकराया, अब क्या करेगी कांग्रेस?
Punjab Congress Crisis: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 (Punjab Assembly Election) में अब महज कुछ ही महीनों का समय बचा है, लेकिन पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पंजाब के नए कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) राज्य में मचे सियासी घमासान को शांत करने और चुनाव की नींव रखने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे हुए हैं।
उनके इस पांच दिवसीय दौरे के शुरुआती दो दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन पार्टी को एकजुट करने की उनकी कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके गुट ने भूपेश बघेल की बैठकों से पूरी तरह दूरी बना ली है।

हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि चन्नी गुट के कई नाराज और बागी नेता इस समय दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। वे पंजाब प्रभारी के बजाय सीधे कांग्रेस आलाकमान से मिलकर अपनी शिकायतें रखना चाहते हैं। इस बैठक में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी नदारद दिखे।
प्रभारी बघेल के 3 दांव, जो चन्नी को मनाने में रहे पूरी तरह फेल
चंडीगढ़ पहुंचते ही प्रभारी भूपेश बघेल ने गुटबाजी को खत्म करने के लिए एक के बाद एक तीन बड़े सियासी दांव खेले, लेकिन चन्नी गुट के आगे उनके सारे फॉर्मूले फेल साबित हुए:
1. बाजवा के जरिए कोशिश
चंडीगढ़ आते ही बघेल ने सबसे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा से मुलाकात की। उम्मीद थी कि बाजवा मध्यस्थता (बिचौलिया) करके चन्नी गुट को मना लेंगे। बाजवा ने मीडिया के सामने सब कुछ ठीक होने का दावा भी किया, लेकिन चन्नी गुट टस से मस नहीं हुआ।
2. राजकुमार वेरका की बंद कमरे में बैठक
कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार वेरका ने भी इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की। उन्होंने चन्नी के साथ बंद कमरे में लंबी चर्चा की। माना जा रहा था कि इस बातचीत के बाद चन्नी मान जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद चन्नी या उनके गुट का कोई भी नेता बघेल की डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमेटी (DCC) की मीटिंग में नहीं पहुंचा।
3. चाय पर बुलाने का खुला ऑफर
हताश होकर प्रभारी भूपेश बघेल ने मीडिया के जरिए चन्नी गुट को एक भावुक संदेश भी भेजा। उन्होंने कहा, "अगर कोई मुझे चाय पर बुलाएगा, तो मैं उसके घर जरूर जाऊंगा।" लेकिन चन्नी गुट ने इस 'टी-डिप्लोमेसी' (चाय वाले ऑफर) को भी भाव नहीं दिया।
पंजाब में क्यों नाराज है EX CM चन्नी गुट? राजा वड़िंग से है असली दिक्कत
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस में इस सिरफुटौवल की मुख्य वजह मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग हैं। चन्नी गुट लंबे समय से राजा वड़िंग को हटाने की मांग कर रहा है। लेकिन चंडीगढ़ पहुंचते ही भूपेश बघेल ने साफ संकेत दे दिए कि "चुनाव से पहले राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद से नहीं बदला जाएगा।"
इस बयान के बाद राजा वड़िंग का खेमा तो मजबूत हो गया और वे लगातार बघेल के साथ खड़े नजर आए, लेकिन चन्नी गुट का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। चन्नी गुट ने साफ कर दिया कि वे अब राज्य स्तर पर कोई बात नहीं करेंगे, बल्कि अपनी लड़ाई सीधे दिल्ली दरबार में लड़ेंगे।
हालांकि, राजा वड़िंग इस संकट को कम आंक रहे हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि चन्नी साहब से कोई परमानेंट नाराजगी नहीं है और वे अगले एक-दो दिनों में भूपेश बघेल से वन-ऑन-वन मुलाकात करेंगे।
अब चन्नी के सामने क्या हैं विकल्प?
पंजाब की सियासत में अब हर किसी की नजर चरणजीत सिंह चन्नी के अगले कदम पर टिकी है। उनके पास ये रास्ते बचते हैं। क्या वे आज अपनी जिद छोड़कर बघेल से अकेले में मुलाकात करेंगे? क्या वे अलग बैठकें करके पार्टी पर दबाव बनाने की राजनीति जारी रखेंगे? क्या वे दिल्ली में राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधे मिलकर अपनी बात मनवाएंगे? या फिर राजा वड़िंग के साथ मंच साझा करने पर उनका रुख थोड़ा नरम होगा?
चुनाव से पहले हाईकमान के पास चन्नी-वडिंगा में सुलह कराने के क्या हैं रास्ते?
अगर कांग्रेस पंजाब में एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहती है तो पार्टी नेतृत्व को जल्द कोई समाधान निकालना होगा। हाईकमान के पास फिलहाल कई विकल्प हैं-
अलग-अलग बातचीत: चन्नी और रंधावा से अलग-अलग मुलाकात कर उनकी नाराजगी सुनना।
दोनों गुटों को आमने-सामने बैठाना: राजा वड़िंग और चन्नी के बीच सीधी बातचीत कराकर विवाद खत्म करने की कोशिश।
फैसलों में सभी को साथ रखना: संगठन और चुनाव से जुड़े बड़े फैसलों में सभी वरिष्ठ नेताओं को बराबर की भागीदारी देना।
मुख्यमंत्री चेहरे पर फैसला टालना: भूपेश बघेल पहले ही कह चुके हैं कि 2027 के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा अभी तय नहीं किया जाएगा। इससे सभी दावेदारों को मौका मिलेगा।
टिकट बंटवारे में संतुलन: विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन करते समय सभी गुटों को भरोसे में लेना। पार्टी के बड़े नेताओं को एक मंच पर लाकर कार्यकर्ताओं और जनता के बीच एकजुटता का संदेश देना। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या तीसरे दिन चन्नी और बघेल के बीच जमी बर्फ पिघलती है, या पंजाब कांग्रेस की यह अंदरूनी कलह पार्टी को एक बार फिर हार के रास्ते पर ले जाएगी।
चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किल बढ़ी
पंजाब में कांग्रेस पहले ही सत्ता से बाहर है। ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत किया जाए। लेकिन नेताओं के बीच बढ़ती दूरी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या भूपेश बघेल अपनी पहल से चन्नी गुट की नाराजगी दूर कर पाएंगे या फिर यह मामला सीधे कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचेगा। आने वाले कुछ दिन पंजाब कांग्रेस की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।














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