Pakistan: आतंकियों के आगे शहबाज-मुनीर का सरेंडर! टेररिस्ट सैफुल्लाह कसूरी ने दी सीधी धमकी, क्या है वजह? -Video
Pakistan: आतंकवादियों के इशारे पर चलने वाला देश पाकिस्तान एक बार फिर उनके अंगूठे तले दबकर फैसला लेता दिख रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान से इजरायल को मान्यता देने वाले अब्राहम एकॉर्ड्स में शामिल होने के लिए कहा था। लेकिन अब इसे लेकर पाक के आतंकी संगठन आर्मी चीफ और शहबाज शरीफ की सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
आतंकियों ने दी शहबाज-मुनीर को दी धमकी
इसी कड़ी में लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी (Saifullah Kasuri) ने पाकिस्तान के राजनीतिक लीडरशिप और सैन्य अधिकारियों को खुली धमकी दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ने कभी भी इज़राइल को मान्यता देने” पर विचार किया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। एक रैली के दौरान कसूरी ने कहा कि ऐसे किसी भी कदम का विरोध करते हुए उसे खत्म कर दिया जाएगा, बर्बाद और तबाह कर दिया जाएगा।

ट्रंप या टेररिस्ट, किसे चुनेंगे मुनीर?
यह बयान उस वक्त आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अब्राहम एकॉर्ड्स (Abraham Accords) के तहत कई मुस्लिम-बहुल देशों, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, से इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने की अपील की थी। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव और राजनीतिक चर्चा के बीच कसूरी का यह बयान सामने आया, जिसने पूरे मामले को और सेंसटिव बना दिया।
ईद-उल-अज़हा के बाद रैली में सख्त चेतावनी
ईद-उल-अज़हा के बाद आयोजित एक जनसभा में कसूरी ने पाकिस्तान के टॉप कमांडर्स को सीधे निशाने पर लिया। सैफुल्लाह ने साफ कहा कि इज़राइल के प्रति पाकिस्तान की दशकों पुरानी विदेश नीति को बदलने की किसी भी गुप्त कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उसके बयान में यह भी था कि ऐसे किसी भी बदलाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इज़राइल मान्यता और इस्लामिक देशों पर दबाव का दावा
कसूरी ने दावा किया कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय शक्ति इस्लामिक देशों को इज़राइल को मान्यता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। उसने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि पाकिस्तानी सैन्य क्षमता किसी भी बाहरी प्रभाव का मुकाबला कर सकती है।
धार्मिक भावनाओं को बनाया ढाल
अपने भाषण में कसूरी ने जिहाद, शहादत और फ़िलिस्तीन युद्ध से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए समर्थकों को संबोधित किया। उसने कहा कि इज़राइल को मान्यता देने वालों का विरोध किया जाएगा और यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहेगा। उसने अपने भाषण में इसे धार्मिक आस्था और उम्मत की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया।
बयानबाजी या रणनीति
हालांकि डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि कसूरी का यह बयान पूरी तरह से बयानबाजी (staged rhetoric) हो सकता है। यह पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय दबाव, खासकर इज़राइल से जुड़े मुद्दों पर, संतुलन बनाना है। वहीं कुछ लोग इसे फील्ड मार्शल असीम मुनीर (Asim Munir) की विदेश नीति स्थिति से जोड़कर भी देखा है।
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