सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस पर बोले गृह मंत्री, कहा- 5 साल में 30 करोड़ लोगों को मिली नई ऊर्जा

सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच साल पूरे हो गए हैं, जिसमें एकीकृत सहकारी डेटाबेस, एक नई रैंकिंग प्रणाली, सीएससी के माध्यम से पीएसीएस सेवाओं का विस्तार, और मजबूत ऋण और उर्वरक नेटवर्क जैसी प्रमुख उपलब्धियों का विवरण दिया गया है। किसानों को सशक्त बनाने, पारदर्शिता और टिकाऊ ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मंत्रालय ने बीते पांच वर्षों में सहकारिता से जुड़े देश के 32 करोड़ लोगों को नई ऊर्जा दी है और जब देश 2047 में आजादी की शताब्दी मनाएगा, तब 'समृद्ध भारत' की मजबूत नींव सहकारिता आंदोलन ही होगी।

Cooperation Ministry Five-Year Milestones

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और मुरलीधर मोहोल, राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव आतिश चंद्र और पशुपालन-डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं, सहकारी महासंघों, सहकारी बैंकों, डेयरी सहकारी समितियों, भारत टैक्सी, पैक्स और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों ने भी भागीदारी की।

अमित शाह ने कहा कि ठीक पांच साल पहले इसी दिन देश के 32 करोड़ लोगों और 30 क्षेत्रों की 8 लाख 50 हजार से अधिक सहकारी संस्थाओं की 75 साल पुरानी प्रतीक्षा पूरी हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पहले 75 वर्षों तक सहकारिता आंदोलन उपेक्षा का शिकार रहा और उसे दोयम दर्जे का समझा जाता रहा।

गृह मंत्री ने बताया कि जब भी उनकी पार्टी या गठबंधन को सत्ता में आने का मौका मिला, ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र पर खास जोर दिया गया। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जनजातीय मंत्रालय की स्थापना और 2019 में जल शक्ति, मत्स्य पालन तथा पशुपालन-डेयरी मंत्रालयों के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना इसी कड़ी में एक बड़ा कदम था।

'राज्यों के अधिकार में दखल का आरोप गलत साबित हुआ'

शाह ने कहा कि मंत्रालय बनने के समय सबसे बड़ा विवाद यह था कि संविधान में सहकारिता राज्य का विषय है और केंद्रीय मंत्रालय राज्यों के काम में दखल देगा। उन्होंने कहा कि पांच साल बाद भी विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों ने कभी ऐसी शिकायत नहीं की, और यही मंत्रालय की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके मुताबिक मंत्रालय राज्यों के काम में दखल देने के बजाय उनकी मदद, नीति-निर्माण और उत्कर्ष के लिए काम करता रहा है।

पांच स्तंभों पर हुआ काम: एकीकृत डेटाबेस से लेकर रैंकिंग फ्रेमवर्क तक

गृह मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने पांच वर्षों में पांच स्तंभों के आधार पर काम किया है। पहले स्तंभ के तहत संस्थागत सुधार, सुशासन और पारदर्शिता मजबूत करने के लिए सहकारिता का एकीकृत डेटाबेस तैयार किया गया, जिसमें 30 क्षेत्रों की 8,58,000 सहकारी समितियों और 32 करोड़ सदस्यों का डेटा, ऑडिट स्टेटस, टर्नओवर और ABC ग्रेडेशन शामिल है। इसी साल सहकारी संस्थाओं के लिए एक रैंकिंग फ्रेमवर्क भी शुरू किया गया है, जिसके तहत हर क्षेत्र की शीर्ष पांच सहकारी समितियों को पहचान और प्रोत्साहन दिया जाएगा।

शाह ने बताया कि बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2002 में 50 महत्वपूर्ण संशोधन कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लोकतांत्रिक बनाया गया है, और इसी सोच के तहत त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी शुरू की गई है, जो पैक्स से लेकर शीर्ष स्तर तक पेशेवर प्रबंधन तैयार करेगी। उनका कहना था कि इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यकुशलता सुधरेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

पैक्स को मिली नई पहचान, 55,000 पैक्स दे रहे CSC सेवाएं

मंत्री ने कहा कि पैक्स के लिए मॉडल बायलॉज तैयार किए गए हैं, जिन्हें अब पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश ने अपनाया है। आज 55,000 पैक्स सीएससी के जरिए गांवों में रेल टिकट बुकिंग, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और सरकारी योजनाओं के आवेदन सहित 300 से अधिक सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 39,000 पैक्स किसान समृद्धि केंद्र और 600 से अधिक जन औषधि केंद्र बन चुके हैं, जबकि 75 पैक्स पेट्रोल-डीजल आउटलेट और 118 पैक्स जल आपूर्ति योजनाओं का रखरखाव कर रहे हैं।

शाह ने बताया कि 3,000 करोड़ रुपये की लागत से पैक्स के कंप्यूटरीकरण का काम हुआ है और 50,000 पैक्स अब ई-पैक्स के रूप में घोषित होकर पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से काम कर रहे हैं, जिससे ई-ऑडिट जैसी पारदर्शी व्यवस्था भी लागू हो सकी है।

सहकारी बैंकों का कारोबार 19.6 लाख करोड़ से बढ़कर 25 लाख करोड़ पार

तीसरे स्तंभ के तहत सहकारी क्षेत्र में क्रेडिट प्रवाह बढ़ाने पर काम हुआ है। डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा, ई-केवाईसी और डिजिटल लोन जैसी सुविधाओं से शहरी और जिला सहकारी बैंक आगे बढ़े हैं। शाह के अनुसार जिला सहकारी बैंकों का कुल कारोबार 19.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। उन्होंने गुजरात के 'सहकारिता में सहकार' मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि इससे जिला सहकारी बैंकों की जमा राशि बढ़ी और कई बैंक घाटे से मुनाफे में आए। शहरी सहकारी बैंकों का शुद्ध लाभ लगभग दोगुना हुआ है, जबकि पांच वर्षों में सकल एनपीए 12.8 प्रतिशत से घटकर 6.2 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 5.1 प्रतिशत से घटकर 0.7 प्रतिशत रह गया है। एनसीडीसी का शुद्ध एनपीए भी अब लगभग नगण्य हो गया है, वहीं एनसीडीसी ने सहकारिता क्षेत्र में 70,000 करोड़ रुपये का नया निवेश किया है।

भारत बीज सहकारी समिति बनेगी देश की सबसे बड़ी बीज कंपनी

गृह मंत्री ने बताया कि सहकारिता के बाजार लिंकेज को मजबूत करने के लिए निर्यात और जैविक उत्पादन के लिए तीन नई सहकारी समितियां बनाई गई हैं, वहीं डेयरी क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी के लिए तीन और समितियां बनी हैं। उन्होंने कहा कि भारत बीज सहकारी समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन कंपनी बन जाएगी, जो किसानों को शुद्ध और बिना मिलावट वाला बीज उपलब्ध कराएगी। केले, पपीते और आलू के किसानों के लिए हर राज्य में नई यूनिट लगाकर टिश्यू कल्चर तकनीक से बीज पहुंचाए जाएंगे, जिसके लिए गुजरात की बनास डेयरी का मॉडल अपनाया जा रहा है।

शाह ने जैविक खेती पर जोर देते हुए कहा कि केमिकल उर्वरकों का इस्तेमाल घटाने से उत्पादन कम होने की आशंका गलत साबित हुई है, बल्कि इससे उत्पादन बढ़ा है और भूमि का संरक्षण भी हुआ है। उन्होंने बताया कि शुगर और डेयरी क्षेत्र में शत-प्रतिशत सर्कुलर इकोनॉमी लाई जा रही है, जिससे डीएपी का सस्ता और बेहतर विकल्प तैयार होगा। उन्होंने किसानों से डीएपी छोड़कर इस नए विकल्प को अपनाने की अपील भी की।

गोमय सहकारी समिति और श्वेत क्रांति-2 पर जोर

मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के 'अन्नदाता से ऊर्जादाता' मिशन को आगे बढ़ाने के लिए इसी कार्यक्रम में शुरू हुई गोमय सहकारी समिति लिमिटेड, पशु आहार, पशु स्वास्थ्य, कृत्रिम गर्भाधान, गोबर प्रबंधन, जैविक उर्वरक और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के जरिए डेयरी क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था को गति देगी। उन्होंने श्वेत क्रांति-2 के तहत सभी राज्यों के डेयरी फेडरेशनों से अगले दो वर्षों में दूध देने वाले किसानों की संख्या में कम से कम 35 प्रतिशत बढ़ोतरी का लक्ष्य रखने का आग्रह किया। सहकारी चीनी क्षेत्र में चीनी, इथेनॉल, बगास, ऊर्जा, प्रेसमड, जैविक खाद और सल्फर उत्पादन तक की पूरी व्यवस्था लागू करने की भी जानकारी दी।

शाह ने बताया कि गन्ने के अधिक मूल्य भुगतान पर कर राहत दिलाई गई है और पुराने कर विवाद सुलझाए गए हैं, जिसके तहत अकेले गन्ना किसानों का करीब 46,000 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स माफ किया गया है। नेशनल हैवी इंजीनियरिंग कोऑपरेटिव के पुनरुद्धार की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जो डेयरी और खाद उत्पादन से जुड़ी मशीनरी बनाएगी। उन्होंने बताया कि भारत टैक्सी अगले दो वर्षों में देश के 500 से अधिक शहरों और हर राज्य में उपलब्ध होगी।

'20% कृषि ऋण, 35% उर्वरक वितरण सहकारिता के जरिए'

गृह मंत्री ने बताया कि आज करीब 20 प्रतिशत कृषि ऋण, 35 प्रतिशत उर्वरक वितरण और 31 प्रतिशत चीनी उत्पादन सहकारिता के माध्यम से हो रहा है। उन्होंने बताया कि भारत टैक्सी की तर्ज पर यूटिलिटी एग्रीगेटर कोऑपरेटिव को और विकसित किया जाएगा, जबकि इफको-टोक्यो के सफल इंश्योरेंस मॉडल के आधार पर एक सहकारी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी बनाने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब सहकारिता के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और मंत्रालय का प्रयास रहेगा कि इस क्षेत्र का पूरा मुनाफा किसानों और पशुपालकों तक पहुंचे।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत में अमित शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने भारतीयता और भारतीय संस्कृति के प्रति श्रद्धा करोड़ों कार्यकर्ताओं के मन में स्थापित की। शाह ने कहा कि मुखर्जी नहीं होते तो आज कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होता, और उनके आंदोलन के कारण ही असम व पश्चिम बंगाल आज भारत का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि मुखर्जी का अनुच्छेद 370 हटाने का सपना प्रधानमंत्री मोदी ने पूरा किया, और सरकार ने तय किया है कि मुखर्जी की 125वीं जयंती गांव से शहर तक धूमधाम से मनाई जाएगी।

कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास, लोकार्पण और शुभारंभ किया। इनमें 135 अन्न भंडारण गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण, 47 गोदामों का शिलान्यास, अमूल और एनसीसीएफ द्वारा सहकार वन का भूमि पूजन, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में बीबीएसएसएल की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन शामिल रहा। इसके अलावा एनसीडी 3.0 और जियो-टैग मोबाइल एप्लिकेशन, एनडीडीबी के दूध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल, कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी-स्टेट लिमिटेड और गोमय सहकारी समिति मल्टी-स्टेट लिमिटेड का उद्घाटन भी हुआ।

एनयूसीएफडीसी की दो प्रमुख पहलों — केंद्रीकृत कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म 'सहकार सीबीएस' और शहरी सहकारी बैंकों के लिए एआई-संचालित संवादात्मक प्लेटफॉर्म 'सहकार सहयोगी' — का भी अनावरण किया गया। कार्यक्रम में 50,000 पैक्स के ई-पैक्स में रूपांतरण का काम भी पूरा हुआ, जिसे जमीनी स्तर पर सहकारी संस्थाओं के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस मौके पर बीबीएसएसएल और आईसीएआर के बीच बीज प्रणालियों को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुए। अमित शाह ने डेयरी सहकारी समितियों के लिए आदर्श उप-विधियों और मंत्रालय की पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया।

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