चोरी हो गई 5 करोड़ की सोने वाली रामचरितमानस? कहां है काकभुशुंडि? राम मंदिर ट्रस्ट ने मीडिया के सामने दिखाया सच
अयोध्या के राम मंदिर में पिछले कुछ दिनों से करोड़ों रुपये के कीमती चढ़ावे और गहने गायब होने की अफवाहें हवा में तैर रही थीं। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक यह दावा किया जा रहा था कि श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक गायब हो चुके हैं। लेकिन अब इन तमाम कयासों और आरोपों पर फुल स्टॉप लग गया है।
राम मंदिर परिसर में करीब तीन घंटे तक चली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हाई-प्रोफाइल बैठक खत्म होने के बाद एक बेहद चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने न सिर्फ इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया, बल्कि बंद कमरों से निकालकर वो बेशकीमती खजाना सीधे मीडिया के कैमरों के सामने रख दिया, जिसे लेकर लगातार घमासान मचा हुआ था।

रामचरित मानस से काकभुशुंडि तक, अब राम मंदिर ट्रस्ट ने दिखाया वो चढ़ावा
इस पूरे विवाद की जड़ में पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन का एक गंभीर आरोप था। उनका कहना था कि अप्रैल 2024 में उनके परिवार ने मंदिर को करीब 5 करोड़ रुपये की कीमत वाली सोने की परत चढ़ी 'रामचरितमानस' भेंट की थी।
कुछ दिनों तक इसे श्रद्धालुओं के देखने के लिए रखा गया, लेकिन बाद में यह अचानक वहां से हटा दी गई। जब उन्होंने इस बारे में ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री चंपत राय से पूछताछ की, तो उन्हें कोई साफ जवाब नहीं मिला। इसी के बाद यह बात फैल गई कि सोने की रामायण समेत कई कीमती चीजें गायब हो चुकी हैं।
इन आरोपों का जवाब देने के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज खुद सामने आए। उन्होंने 06 जुलाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर उन सभी पांच खास चीजों को टेबल पर सजा दिया, जिन्हें लेकर अफवाहें उड़ रही थीं। इनमें 5 करोड़ रुपये की वो सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस, भगवान राम के पावन चरण चिन्ह, कीमती हार और काकभुशुंडि की प्रतिमा शामिल थी। गोविंद देव गिरि ने साफ कहा कि किसी भी सामान के चोरी होने का दावा पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है।
2800 से ज्यादा सामानों का पूरा लेखा-जोखा है सुरक्षित
स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने बकायदा रिकॉर्ड रूम का भारी-भरकम रजिस्टर मीडिया को दिखाया। उन्होंने बताया कि रामलला के दरबार में अब तक कुल 2,926 बेशकीमती भेंटें आ चुकी हैं, जिनमें से 2,800 से ज्यादा सामानों की पूरी लिस्ट इस रजिस्टर में दर्ज है। मीडिया के सामने लाई गईं पांच चीजें सिर्फ एक बानगी थीं ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।
ट्रस्ट ने अपनी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कुछ बड़े एलान भी किए हैं।
- भौतिक सत्यापन (Physical Verification): हर साल एक जानी-मानी चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) फर्म मंदिर में मौजूद एक-एक जेवर और कीमती सामान का खुद जाकर मिलान करती है।
- ओपन चैलेंज: अगर किसी भी श्रद्धालु को अपनी दी हुई भेंट के बारे में कोई शंका है, तो वह किसी भी दिन अयोध्या आकर ट्रस्ट के अधिकारियों से मिलकर उसकी पूरी जानकारी ले सकता है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन संभालेंगे कमान
इस पूरी बैठक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला प्रशासनिक फेरबदल के रूप में सामने आया। दान चोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए वर्तमान महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे ट्रस्ट ने तुरंत स्वीकार कर लिया। इस अहम बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास समेत 9 में से 7 स्थाई सदस्य मौजूद थे, लेकिन चंपत राय और अनिल मिश्रा को इससे दूर रखा गया था।
चंपत राय की जगह अब भारतीय वन सेवा (IFS) के रिटायर्ड अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया कार्यवाहक (अंतरिम) महासचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, विवादों में आए गोपाल नागरकट्टे का नाम भी विशेष आमंत्रित सदस्यों की लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
सामने आया 3200 करोड़ से ज्यादा के दान का पूरा गणित
- राम मंदिर ट्रस्ट को दान के जरिए अब तक कुल ₹3,264 करोड़ की भारी-भरकम राशि मिली थी। इस कुल दान में से ₹2,370 करोड़ मंदिर के भव्य निर्माण और उससे जुड़े अन्य जरूरी कामों पर खर्च किए जा चुके हैं।
- ट्रस्ट की स्थापना से लेकर 31 मार्च, 2026 तक रामलला के दरबार में भक्तों द्वारा ₹582 करोड़ की नकद चढ़ावा राशि अर्पित की गई।
- भक्तों से मिले इस नकद चढ़ावे में से ₹391 करोड़ मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं, संचालन और अन्य प्रशासनिक खर्चों में इस्तेमाल हुए हैं।
- इन सभी खर्चों के बाद बची हुई बाकी की पूरी रकम पूरी पारदर्शिता के साथ ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित रखी हुई है।
22 जुलाई को होगी अगली बड़ी बैठक, आएगी SIT की फाइनल रिपोर्ट
मामला भले ही शांत होता दिख रहा हो, लेकिन ट्रस्ट कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। दोषियों को सजा दिलाने के लिए एक छोटी विशेष समिति का गठन किया गया है, जो आगे की व्यवस्थाएं देखेगी। प्रशासन की मदद से चल रही एसआईटी (SIT) की जांच में अब तक 8 आरोपी दबोचे जा चुके हैं।
ट्रस्ट की अगली बड़ी बैठक 22 जुलाई को होने जा रही है। उस समय तक एसआईटी की अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट भी सामने आ जाएगी। उसी बैठक में आगे की कानूनी कार्रवाई, नए पदाधिकारियों और कुछ नए परमानेंट न्यासियों (ट्रस्टियों) की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा, ताकि भविष्य में व्यवस्था पर कोई उंगली न उठा सके।














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