पाकिस्तान-IMF में कर्ज के लिए आखिरी दौर की बातचीत, 30 जून को खत्म हो रहा समय, फिर श्रीलंका जैसा हाल?

Pakistan-IMF Talk: पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बीच कर्ज की किश्त के लिए आखिरी दौर की बातचीत चल रही है और कर्ज हासिल करने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार ने एड़ी की चोटी का जोर लगा दिया है। शहबाज शरीफ की सरकार को पता है, कि अगर आईएमएफ से लोन नहीं मिलता है, तो पाकिस्तान किन हालातों में पहुंच जाएगा।

डॉन अखबार ने बुधवार को मामले से परिचित लोगों का हवाला देते हुए बताया है, कि पाकिस्तान 2.5 अरब डॉलर की नई क्विक स्टैंडबाय असिस्टेंस के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से बातचीत कर रहा है। डॉन ने बताया है, कि आईएमएफ का पाकिस्तान को लेकर कार्यक्रम 30 जून को समाप्त हो रहा है और शहबाज शरीफ की सरकार 30 जून से पहले किसी भी कीमत पर कर्ज हासिल करने की कोशिश में लगी है।

Pakistan-IMF Talk

जल्द कर्ज लेने की पाकिस्तान की कोशिश

डॉन अखबार के अनुसार, पाकिस्तान आईएमएफ से जल्द से जल्द लोन हासिल करना चाहता है, इसके लिए उसने अल्पकालिक व्यवस्था प्लान पेश किया है। ये लोन 6 से 9 महीने के बीच के लिए होगा और अगले 15 दनों के अंदर पाकिस्तान को आईए्मएफ से 1.1 अरब डॉलर का लोन मिल जाएगा।

इसके अलावा, 500-500 मिलियन डॉलर अलग से पाकिस्तान को दिया जाना प्रस्तावित है और इसके लिए भी आईएमएफ दो से तीन अलग समीक्षाएं करेगा। जिसमें कहा गया है, कि यह योजना इस साल के अंत में देश को नवनिर्वाचित प्रशासन में बदलने में मदद करेगी।

नकदी की कमी से जूझ रहा पाकिस्तान 6.7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम तक पहुंच हासिल करने के लिए फंड के नुस्खों के मुताबिक निर्णायक कदम उठा रहा है, जो छह महीने से अधिक समय से विलंबित है। इस्लामाबाद ने ऋणदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए, देश के बजट में बदलाव किया है, करों और ऊर्जा की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है, ताकि पाकिस्तान से 1.1 अरब डॉलर का लोन फौरन हासिल हो सके।

रिकॉर्ड मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बीच दक्षिण एशियाई देश पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश में डॉलर बचाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने विदेशी सामानों का आयात बंद कर दिया है। लेकिन,अभी तक पाकिस्तान को कोई फायदा हासिल नहीं हुआ है। पाकिस्तान इससे पहले साल 1950 से 23 बार IMF के बेल ऑउट कार्यक्रम में जा चुका है, लेकिन उसके बाद भी देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर नहीं ला पाया।

सिर्फ दो दिनों का है वक्त बाकी

इससे पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आईएमएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के साथ मंगलवार को टेलीफोन कॉल पर बातचीत की थी और बाद मे ये उम्मीद जताई है, कि पाकिस्तान को एक या दो दिनों में कर्ज मिल जाएगा। पिछले 6 दिनों में ये चौथी बार है, जब शहबाज शरीफ ने आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर से बात की है।

आपको बता दें, कि पाकिस्तान को अगर 30 जून तक आईएमएफ से कर्ज नहीं मिलता है, तो देश बहुत गंभीर स्थिति में फंस जाएगा, क्योंकि आईएमएफ का बेलऑउट पैकेज प्रोग्राम 30 जून को खत्म हो रहा है और उसके बाद पाकिस्तान को नये सिर्फ से आईएमएफ के साथ बेलऑउट पैकेज के लिए बात करनी होगी और मौजूदा हालात में आईएमएफ से पाकिस्तान को कर्ज की किश्त मिल जाएगी, इसकी संभावना काफी कठिन है।

अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और अर्थशास्त्रियों को डर है, कि अगर 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान को आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर की कर्ज की किश्त नहीं मिलती है, तो पाकिस्तान सरकार इस महीने विदेशी ऋण चुकाने से चूक सकती है, यानि पाकिस्तान डिफॉल्ट कर जाएगा।

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