पाकिस्तान: आस्मां जहांगीर के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की महान शख्सियत ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट आस्मां जहांगीर का रविवार को निधन के बाद मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए है, जिसमें कई राजनेता, वरिष्ठ जजों, वकीलों और आस्मां जहांगीर के दोस्तों ने अपने मुल्क के अधिकारों के लिए लड़ने वाली जिंदादिल इंसान को नम आंखों से विदा किया। उनकी अतिंम विदाई पर लाहौर की सड़कों पर जनसैलाब देखने को मिला।

आस्मां जहांगीर के शव को उनके घर लाहौर से गद्दाफी स्टेडियम ले जाया गया, जहां ब्लैक ब्लेजर्स पहने कई वकीलों और राजनेताओं, एक्टिविस्ट्स और आस्मां जहांगीर को चाहने वाले ने अंतिम संस्कार यात्रा में हिस्सा लिया। जब आस्मां जहांगीर को स्टेडियम ले जाया जा रहा था, तभी ड्रोन से उन पर फूलों की बारिश की जा रही थी।
पिछले रविवार को दिल का दौरा पडने की वजह से 66 वर्षीय आस्मां जहांगीर हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो गईं। आस्मां जहांगीर की मौत पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक सभी ने शौक व्यक्त किया। आस्मां जहांगीर को पाकिस्तान में एक मुखर आवाज के रूप में हमेशा के लिए जाना जाएगा, जिन्होंने अपने मुल्क के लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और एक लोकतंत्रिक समावेशी पाकिस्तान का निर्माण के लिए अद्भूत लड़ाई लड़ीं। आस्मां जहांगीर का जन्म 1952 में लाहौर में हुआ था, उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की थीं।
आस्मां जहांगीर, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। इससे पहले 1987 में उन्होंने पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की सह-स्थापना की और 1993 तक महासचिव पद के रूप में अपनी सेवाएं दी। बता दें कि आस्मा जहांगीर ने अपने देश में सैन्य शासन के खिलाफ हमेशा आवाज उठाई थी, इसके लिए उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा था। पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट खालिद अहमद एक आर्टिकल में लिखते हैं कि ऐसी शख्सियत को पैदा होने में पाकिस्तान को बरसों लग जाएंगे।












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