ना पैसा, ना तेल... संकट में फंसा पाकिस्तान, डॉलर बचाने शहबाज शरीफ देंगे कर्मचारियों को ज्यादा छुट्टी!
इमरान खान को संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पीएम पद से हटाकर शहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन तो गये हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने कुछ भी ऐसा नहीं किया है, जिससे लगे, कि आर्थिक संकट से बचने की कोशिश की जा रही है.
इस्लामाबाद, मई 24: पाकिस्तान में विदेशी मुद्रा भंडार काफी तेजी से कम होता जा रहा है, लिहाजा पाकिस्तान ने पिछले हफ्त गैर-जरूरी सामानों के आयात पर पाबंदी लगा दी थी और अब पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, देश में ईंधन बचाने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार सरकारी कर्मचारियों के लिए ज्यादा छुट्टी का ऐलान कर सकती है।

नकदी संकट में फंसा पाकिस्तान
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में सोमवार को कहा गया है कि, नकदी की कमी से जूझ रही पाकिस्तान सरकार कार्य दिवसों की संख्या को कम करके ईंधन को बचाने की कोशिश की तरफ सरकार कदम बढ़ा सकती है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार अनुमान लगा रही है कि, अगर कर्मचारियों को हफ्ते में ज्यादा छुट्टियां दी जाएं, तो एक साल में 2.7 अरब डॉलर तक विदेशी मुद्रा बचाया जा सकता है। वहीं, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान का अनुमान है, कि अगर कर्मचारियों को ज्यादा छुट्टियां दी जाती हैं, तो एक साल में 1.5 अरब डॉलर से 2.7 अरब डॉलर तक विदेशी मुद्रा बचाया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष (FY22) के पहले 10 महीनों (जुलाई-अप्रैल) के लिए पाकिस्तान का कुल तेल आयात 17 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक हो गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 96 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है।
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नकदी संकट से निकल पाएगा पाकिस्तान?
इमरान खान को संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटाकर शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री बन तो गये हैं, लेकिन अभी तक शहबाज शरीफ की सरकार ने कुछ भी ऐसा कदम नहीं उठाया है, जिससे लगे, कि आर्थिक संकट से निकलने की कोशिश सरकार की है। हालांकि, इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह कुछ महीने बाद होने वाले चुनाव हैं और गठबंधन सरकार का मानना है कि, अगर कड़े फैसले लिए जाते हैं, को उन्हें चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है। प्रधानमंत्री पद से हटने से पहले इमरान खान ने तेल की कीमतों में भारी सब्सिडी दे दी थी, जिससे आईएमएफ ने पाकिस्तान को लोन की किश्त रोक दी, लेकिन इमरान खान तो चले गये, लेकिन शहबाज शरीफ फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं।

तेल पर क्यों फंस गया है पाकिस्तान?
पाकिस्तान में मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक कुल तेल आयात 17 बिलियन अमरीकी डालर हो चुका है, इसमें 8.5 अरब डॉलर के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात है और 4.2 अरब डॉलर के पेट्रोलियम क्रूड का आयात शामिल है, जो क्रमश: 121 प्रतिशत और 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि, किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले बिजली प्राधिकरण और पेट्रोलियम डिविजनों को सलाह दी गई है, कि वो हर प्वाइंट पर काफी सोच समझकर विश्लेषण करें और फिर आखिरी रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने कहा कि, केंद्रीय बैंक के अनुमानों में ज्यादातर खुदरा व्यापार और सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों सहित सप्ताह में सामान्य कार्य दिवसों में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत शामिल है। यानि सरकार का मानना है कि, अगर सरकारी कर्मचारी दफ्तर नहीं आएंगे, तो ईंधन की बचत होगी। लेकिन, कई एक्सपर्ट इस नजरिए को यह कहकर खारिज करते हैं, कि इससे ईंधन की खपत बढ़ ही जाएगी, क्योंकि लोग घरों में तो बैठेंगे नहीं, वो अपने परिवार के साथ घूमने निकल जाएंगे।

सरकार किन विकल्पों पर कर रही विचार?
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ईंधन की खपत कम करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें एक विकल्प पूरे देश में लॉकडाउन लगाना भी शामिल है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार के पास एक सुझाव ये भी आया है, कि सरकारी कर्मचारियों को हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही दफ्तर बुलाया जाए और ऐसा करने से एक महीने में 122 मिलियन डॉलर बचाए जा सकते हैं और इस हिसाब से एक साल में 1.5 अरब डॉलर का बचत होगा। वहीं, सरकार जिस दूसरे विकल्प पर विचार कर रही है, उसके हिसाब से चार वर्किंग डे, 2 छुट्टी और हफ्ते में एक दिन लॉकडाउन लगाने का प्लान है और ऐसा करने पर एक महीने में 175 मिलियन डॉलर और एक साल में 2.1 अरब डॉलर बचाए जा सकते हैं।

सरकार के पास कई प्लान
वहीं, पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार जिस एक और विकल्प पर विचार कर रही है, उसमें एक ये है, कि चार वर्किंग डे, एक छुट्टी और हफ्ते में दो लॉकडाउन शामिल है और सरकार का अनुमान है, कि इस विकल्प में एक महीने में 230 मिलियन डॉलर बचाए जा सकते हैं और एक साल में सरकार 2.7 अरब डॉलर बचा सकती है। इसके साथ ही पाकिस्तान के ऊर्जा विभाग ने भी सरकार को फौरन ऊर्जा खपत कम करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि, काम के दिन कम किए जाएं। इसके साथ ही ऊर्जा विभाग ने कहा है कि, कॉमर्शियल एक्टिविटीज को भी सिर्फ दिन तक सीमित किए जाएं और रात के वक्त काम बंद किए जाएं, ताकि ऊर्जा को बचाया जा सके।

गैर-जरूरी सामानों के आयात पर बैन
दरअसल, पाकिस्तान का चालू खाता घाटा नियंत्रण से बाहर हो गया है और विदेशी मुद्रा भंडार में काफी तेज गिरावट आई है, वहीं पाकिस्तानी रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है। पिछले हफ्ते पाकिस्तान की केन्द्रीय मंत्री मरियम औरंगजेब ने संवाददाताओं से कहा कि, 'वे सभी गैर-जरूरी विलासिता की वस्तुएं जिनका व्यापक जनता द्वारा उपयोग नहीं किया जाता है, उनके आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है'। उन्होंने कहा कि, ये उपाय राजकोषीय अस्थिरता को दूर करने के लिए हैं, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान की पिछली सरकार को दोषी ठहराया है। आपको बता दें कि, इमरान खान को पिछले महीने अविश्वास मत में देश की अर्थव्यवस्था को गलत तरीके से चलाने के आरोप में बाहर कर दिया गया था।

मुश्किल स्थिति में फंसा पाकिस्तान
आपको बता दें कि, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त काफी तेजी से बिगड़ रही है और पाकिस्तान को अगर फौरन मदद नहीं मिली, को देश के हालात अगले कुछ महीनों में श्रीलंका जैसे ही हो जाएंगे। कुछ अनुमानों में इस वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान का चालू खाता घाटा लगभग 17 अरब डॉलर या उसकी जीडीपी से 4.5% से ज्यादा हो गया है। पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आई है और पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने इस महीने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा है कि, फरवरी के अंत में पाकिस्तान के पास 16.3 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जिसमें 6 अरब डॉलर और खत्म हो चुके हैं और पाकिस्तान के पास अब सिर्फ 10 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। वहीं, पाकिस्तान की फाइनेंस टीम कतर की राजधानी दोहा में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से दोबारा बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रही है।
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