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पाकिस्तान ने जिस फिल्म को आधिकारिक तौर पर ऑस्कर में भेजा, उसे देश में ही क्यों कर दिया बैन?

फिल्म समीक्षकों ने इस फिल्म की काफी प्रशंसा की है और इसे एक जबरदस्त फिल्म बताया है और पाकिस्तान सरकार ने भी साल 2023 के लिए फिल्म को ऑस्कर के लिए भेजा है।

Pakistan Ban Joyland: ये सुनना काफी हैरानी भरा हो सकता है, कि एक देश जिस फिल्म को आधिकारिक तौर पर ऑस्कर में भेजता है, उसी फिल्म को अपने देश में बैन कर देता है। लेकिन, पाकिस्तान में ऐसा हुआ है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में जॉयलैंड फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसे फिल्म समीक्षकों ने एक मास्टरपीस बताया है। जॉयलैंड फिल्म की हर फिल्म समीक्षकों ने जबरदस्त तारीफ की है, लेकिन आधिकारिक तौर पर ऑस्कर में भेजने के बाद पाकिस्तान सरकार ने देश में इस फिल्म के रिलीज पर रोक लगा दी है।

जॉयलैंड फिल्म पर लगा बैन

जॉयलैंड फिल्म पर लगा बैन

पाकिस्तान सरकार ने सईम सादिक की फिल्म जॉयलैंड पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया है, कि इसमें "अत्यधिक आपत्तिजनक सामग्री" है। रिपोर्ट के मुताबिक, जॉयलैंड एक मध्यवर्गीय परिवार के बारे में लाहौर की पृष्टभूमि में बुनी गई एक काल्पनिक कहानी है, जिसमें व्हीलचेयर पर आ चुके एक पिता अपने दो बेटों और बहुओं पर हुकुम जमाते हुए जिंदगी जीता है। पिता चाहते हैं, कि उनके बच्चे उन्हें पोते-पोतियां दें, लेकिन कहानी में उस वक्त मोड़ आ जाता है, जब उनके छोटे बेटे हैदर को एक इंटरसेक्स डांसर बीबा से प्यार हो जाता है, जिसके साथ वह काम करता है। हैदर एक थिएटर में काम करता है, जहां बीबा एक स्टेज डांसर होती है और दोनों के एक साथ आने के बाद हंगामा मच जाता है।

समीक्षकों को पसंद आई फिल्म

समीक्षकों को पसंद आई फिल्म

फिल्म समीक्षकों ने इस फिल्म की काफी प्रशंसा की है और इसे एक जबरदस्त फिल्म बताया है और पाकिस्तान सरकार ने भी साल 2023 के लिए फिल्म को ऑस्कर के लिए भेजा है। पहले इस फिल्म को सरकार की तरफ से रिलीज करने की इजाजत मिल गई थी और इस साल अगस्त में ही फिल्म को रिलीज किया जाना था, लेकिन धीरे-धीरे फिल्म को लेकर विवाद बढ़ने लगा और फिल्म के कंटेट पर गंभीर सवाल उठने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के खिलाफ सैकड़ों लिखित शिकायत दर्ज करवाई गई। जिसके बाद पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म को बैन करते हुए कहा कि, "फिल्म में अत्यधिक आपत्तिजनक सामग्रियां हैं, जो हमारे समाज के सामाजिक मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं है और मोशन पिक्चर अध्यादेश की धारा 9 में निर्धारित 'शालीनता और नैतिकता' के मानदंडों का उल्लंघन करता है।

कान्स में प्रदर्शत पहली पाकिस्तानी फिल्म

कान्स में प्रदर्शत पहली पाकिस्तानी फिल्म

जॉयलैंड, पाकिस्तान की पहली फिल्म है, जो कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की गई, लेकिन ये फिल्म पाकिस्तान में ही नहीं दिखाई जा सकती है। फिल्म पर बैन लगने के बाद अभिनेता सरवत गिलानी ने लिखा है कि, "ये काफी शर्मनाक है, कि 6 सालों में 200 पाकिस्तानियों की मेहनत से बनाई गई एक पाकिस्तानी फिल्म, जिसे टोरंटो से लेकर काहिरा और कान तक में स्टैंडिंग ओवेशन मिला, उसे अपने ही देश में रोका जा रहा है।" वहीं, पाकिस्तान की समाजशास्त्री निदा किरमानी ने कहा कि, "अभी पता चला है कि जॉयलैंड पाकिस्तान में रिलीज़ नहीं हो रही है, एक ऐसी फिल्म जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से काफी प्रशंसा प्राप्त कर रही है। हमारे नीति निर्माता अभी भी पाकिस्तानी दर्शकों को बच्चों की तरह ट्रीट कर रहे हैं, हमें नैतिकता की आड़ में कला और संस्कृति से वंचित कर रहे हैं"।

पाकिस्तान में फिल्मों पर मुसीबत

पाकिस्तान में फिल्मों पर मुसीबत

फिल्म निर्माता जवारिया वसीम ने लिखा कि, "दो साल पहले, जब मैंने पाकिस्तान छोड़ा था, तो 'अभद्रता और अनैतिकता' की बात कहकर ही मेरी फिल्म 'जिंदगी तमाशा' पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। और दो साल बाद, जॉयलैंड को उसी रणनीति के साथ सेंसर किया जा रहा है। यह देखकर दिल दहल जाता है कि चीजें थोड़ी भी नहीं बदली हैं, शायद बस बदतर हो गई हैं।" हालांकि, फिल्म का विरोध करने वाले पाकिस्तान के लोगों का कहना है कि, फिल्म की आड़ में कुरान के खिलाफ की बातें नहीं करने दी जाएंगी और कुरान में जो लिखा है, उसके अलावा किसी की भावनाओं का कोई मोल नहीं है।

कट्टरपंथ से हारती फिल्में

कट्टरपंथ से हारती फिल्में

कट्टरपंथी विचारधारा ने पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री का काफी नुकसान किया है। जनरल जिया उल हक जब पाकिस्तान की सत्ता के सिरमौर बने तो उन्होंने पाकिस्तानी में इस्लामी शालन लागू कर दिया, जिसका सबसे बड़ा असर पाकिस्तीन फिल्मों पर पड़ा। इस्लामी नियम लागू होने के साथ ही पाकिस्तानी फिल्म उद्योग तबाही के कगार की तरफ बढ़ने लगा। बीसीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 'जिया उल हक के कार्यकाल से पहले पाकिस्तान का शाहनूर स्टूडियो लाहौर शहर के केन्द्र में बने इलाके में फैला था लेकिन अब ये सिकुड़ कर बहुत कम रह गया है। कट्टरपंथी रवैये की वजह से फिल्म निर्माताओं को आजादी नहीं मिल पाती है। फिल्मों के स्क्रिप्ट को बार बार बदला जाता है, उसमें कांट-छांट की जाती है। किसी तरह का विवाद ना हो उसके लिए स्क्रिप्ट में इतने बदलाव किए जाते हैं कि आखिर में स्क्रिप्ट ही हटा दिया जाता है। पाकिस्तानी फिल्म प्रोड्यूसर्स का मानना है कि, क्रिएटिव स्वतंत्रता के बिना आप फिल्मों का निर्माण नहीं कर सकते हैं और इसीलिए पाकिस्तान की फिल्म इंडस्ट्री तबाह हो रही है।

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