बिकना शुरू हुआ पाकिस्तान, शहबाज शरीफ की सरकार ने जारी किए अध्यादेश, भड़के इमरान खान
शहबाज सरकार के इस अध्यादेश पर अभी तक राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने दस्तखत नहीं किए हैं, जो इमरान खान के करीबी है, लेकिन इस अध्यादेश के मुताबिक, पाकिस्तान की जो भी संपत्ति बेची जाएगी, उसपर सुनवाई नहीं होगी।
इस्लामाबाद, जुलाई 24: क्या पाकिस्तान श्रीलंका से पहले ही बिक जाएगा? ये सवाल पाकिस्तान के लोग ही शहबाज सरकार के उस फैसले पर उठा रहे हैं, जिसमें देश की संपत्तियों को बेचने का अध्यादेश लाया गया है। पाकिस्तान सरकार ने एक अध्यादेश पेश किया है, जिसके तहत कोई दूसरा देश, पाकिस्तान की संपत्तियों को खरीद सकता है और रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान की कई सरकारी संपत्तियों को खरीदने की इच्छा जताई है। वहीं, पाकिस्तान सरकार के इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच ट्विटर वार शुरू हो चुका है।

क्या है सरकार का अध्यादेश?
पाकिस्तान की सरकार ने एक ऐसे अध्यादेश को मंजूरी दी है, जिसके तहत तमाम नियमों और जांच प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर पाकिस्तान सरकारी की प्रॉपर्टी को दूसरे देश खरीद सकते हैं। इस अध्यादेश को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ साथ उनकी कैबिनेट के सभी साथियों ने मंजूरी दी है और पाकिस्तानी मीडिया का कहना है, कि शहबाज सरकार ने देश को दिवालिया होने से बचाने के लिए उठाया है। पाकिस्तान सरकार देश के 80 अरब डॉलर के आयात को नियंत्रित करने में नाकामयाब रही है और दूसरी तरफ पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 8 अरब डॉलर से भी कम हो गया है और आईएमएफ के साथ भी पाकिस्तान सरकार की बातचीत फंसी हुई है।

सरकारी अध्यादेश में क्या है?
हालांकि, शहबाज सरकार के इस अध्यादेश पर अभी तक राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने दस्तखत नहीं किए हैं, जो इमरान खान के करीबी है, लेकिन इस अध्यादेश के मुताबिक, पाकिस्तान की जो भी संपत्ति बेची जाएगी, पाकिस्तान की अदालतें उन मामलों का सुनवाई नहीं कर सकती हैं और उन मामलों को लेकर दायर याचिका पर अदालतों के विचार करने पर भी रोक लगा दी गई है। वहीं, सरकार ने गुरुवार को तेल और गैस कंपनियों और सरकार के स्वामित्व वाले बिजली संयंत्रों के हिस्से को यूएई को 2 अरब डॉलर से 2.5 अरब डॉलर तक बेचने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी है, ताकि डिफ़ॉल्ट से बचा जा सके। आपको बता दें कि, पिछले दिनों शहबाद सरकार ने यूएई से कर्ज मांगे थे, लेकिन पिछला कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से यूएई ने और कर्ज देने से मना कर दिया था, जिसके बाद पाकिस्तान ने यूएई के हाथों में सरकारी संपत्तियों को बेचना शुरू किया है।

इमरान खान के साथ तकरार
वहीं, पाकिस्तान सरकार के इस अध्यादेश के बाद शहबाज शरीफ और इमरान खान के बीच ट्विटर पर वाकयुद्ध शुरू हो गया है और इमरान खान ने शहबाज शरीफ पर जमकर निशाना साधा है। अध्यादेश पारित होने के बाद इमरान खान ने अपने ट्वीट में शहबाज सरकार को 'आयातित सरकार' बताते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और उन्होंने प्राइम मिनिस्टर को 'क्राइम मिनिस्टर' कहकर संबोधित किया है। इमरान खान ने अपने ट्वीट में कहा कि, 'अमेरिकी साजिश के तहत लाई गई एक आयातित सरकार, जिसे एक क्राइम मिनिस्टर लीड कर रहा है, और जिसमें पूरा जरदारी परिवार शामिल है, जो एक नंबर का करप्ट है, वो सरकारी संपत्ति को बेच रहे हैं, उनपर कैसे विश्वास किया जा सकता है, वो भी तमाम प्रक्रियाओं और कानून जांचों को दरकिनार करना इस अध्यादेश का प्रावधान है।' आगे इमरान खान ने शहबाज शरीफ और जरदारी पर 30 सालों तक पाकिस्तान को लूटने का आरोप लगाया और पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
जांच आयोग को किया गया समाप्त
समाचार एजेंसी एएनआई ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून का हवाला देते हुए बताया है कि, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की कैबिनेट ने देश को डिफ़ॉल्ट होने से बचाने के लिए छह प्रासंगिक कानूनों की रेग्यूलेटरी चेक को समाप्त कर दिया है। वहीं, इमरान खान के हमले के बाद, पीएम शहबाज ने एक ट्वीट में कहा कि "इमरान नियाज़ी एक मेमोरी लॉस से पीड़ित हैं और उन्हें कुछ पुरानी बातें याद करने की आवश्यकता है"। उन्होंने कहा कि, "एक, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, उनके शासन के दौरान भ्रष्टाचार बढ़ा था। यहां तक कि बड़े घोटालों के अलावा ट्रांसफर और पोस्टिंग भी बिक्री के आधार पर होती थी। और दूसरे लोग इसकी कीमत चुका रहे थे और इमरान खान ने ही देश की अर्थव्यवस्था के मैनेजमेंट को खराब कर दिया'। उन्होंने इमरान खान पर देश की वैश्विक प्रतिष्ठा और स्थिति और मित्र देशों के साथ उसके संबंधों को "गहरी चोट" पहुंचाने का भी आरोप लगाया।












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