पेट्रोल की बढ़ती कीमत से परेशान हुआ कर्मचारी, एयरपोर्ट पर गधा-गाड़ी ले जाने की मांगी परमिशन
पाकिस्तान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के एक कर्मचारी ने सरकार द्वारा एक बार फिर ईंधन की कीमतें बढ़ाए जाने के बाद काम पर आने-जाने के लिए गधा-गाड़ी के इस्तेमाल की अनुमति मांगी है।
इस्लामाबाद, 03 जूनः पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजलों की कीमत आसमान छू रही है। इस बीच पाकिस्तानी परिवहन के वैकल्पिक साधनों की तलाश में जुट गए हैं। पाकिस्तान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के एक कर्मचारी ने सरकार द्वारा एक बार फिर ईंधन की कीमतें बढ़ाए जाने के बाद काम पर आने-जाने के लिए गधा-गाड़ी के इस्तेमाल की अनुमति मांगी है।

एयरपोर्ट पर गधा गाड़ी लाने दिया जाए
राजा आसिफ इकबाल जो इस्लामाबाद में रहते हैं, उन्होंने नागरिक उड्डयन प्राधिकरण को पत्र लिख कहा है कि वह पेट्रोल की कीमत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के कारण मोटर चालित निजी वाहन में आने में असमर्थ हैं। इसलिए उन्हें अपनी गधे-गाड़ी को हवाईअड्डे पर लाने की अनुमति दी जाए।

प्रवक्ता ने कहा, ये एक मीडिया स्टंट
इकबाल 25 वर्षों से नागरिक उड्डयन प्राधिकरण में सेवारत हैं और फिलहाल इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कार्यरत हैं। हालांकि, नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के प्रवक्ता सैफुल्ला खान ने कहा कि यह पत्र बस एक मीडिया स्टंट है। मीडिया में खबर बनने के लिए लोग ऐसा करते हैं। हकीकत तो यह है कि हर कर्मचारी को ईंधन भत्ता दिया जाता है। उन्होंने कहा कि उन्हें पिक-एंड-ड्रॉप सेवा प्रदान की जाती है। हवाई अड्डे पर कर्मचारियों के लिए एक मेट्रो बस सेवा भी उपलब्ध है।

इमरान खान ने सरकार को कोसा
गौरतलबह है कि पाकिस्तान सरकार ने शुक्रवार को ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की है। पाकिस्तान में पेट्रोल अब 209.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल 204.15 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने तेल की बढ़ती कीमत पर सरकार को कोसा है। उन्होंने कहा कि देश के नेता रूस से सस्ता तेल खरीदना नहीं चाहते क्योंकि वो अमेरिका से डरते हैं।

तेल की बढ़ी कीमत को बताया जायज
वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने तेल की बढ़ रही कीमतों का जिम्मेदार पूर्व प्रधआनमंत्री इमरान खान को ठहराया। उन्होंने कहा कि इमरान खान के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के गलत फैसलों के कारण देश को दिवालिया नहीं होने दे सकते, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ रही थीं और सरकार को पेट्रोलियम सब्सिडी पर प्रतिमाह लगभग 120-130 अरब रुपये का नुकसान हो रहा था।












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