'मंत्रियों को हद में रखिए', शहबाज सरकार पर भड़के Bilawal Bhutto, PoK को लेकर Khawaja से ठनी- Video
Bilawal Vs Khawaja Asif: पाकिस्तान की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के अंदर चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। सरकार में शामिल प्रमुख सहयोगी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और उनके मंत्रियों पर खुलकर निशाना साधा है। उन्होंने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की एक विवादित टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री को सलाह दी है कि वे अपने मंत्रियों की बयानबाजी पर काबू रखें।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में गठबंधन सहयोगियों के बीच बढ़ता तनाव सरकार के लिए नई परेशानी बन सकता है।

ख्वाजा आसिफ के बयान से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़ा है। वहां लंबे समय से महंगाई, बिजली संकट और नागरिक अधिकारों को लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "आप कश्मीरी नहीं हैं।" उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। नेशनल असेंबली में बोलते हुए बिलावल भुट्टो ने सीधे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर उनके मंत्री ऐसी बयानबाजी न करें, जिससे भ्रम और विवाद पैदा हो।
कश्मीर मुद्दे पर सरकार को दी चेतावनी
संसद में अपने संबोधन के दौरान बिलावल भुट्टो ने कहा कि कश्मीर केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील विषय है। इसलिए सरकार के मंत्रियों को बहुत सोच-समझकर बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गैर-जिम्मेदाराना बयान पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बिलावल के मुताबिक सरकार को अपनी कैबिनेट के भीतर अनुशासन बनाए रखना चाहिए ताकि देश की छवि खराब न हो।
पीओके के प्रशासनिक रवैये पर भी उठाए सवाल
बिलावल ने केवल ख्वाजा आसिफ के बयान की आलोचना नहीं की बल्कि पीओके के प्रति सरकार की नीति और प्रशासनिक रवैये पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक समस्याओं का समाधान केवल प्रशासनिक आदेशों या सख्ती से नहीं निकल सकता। ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए लोकतांत्रिक संवाद और बातचीत सबसे बेहतर रास्ता है। उन्होंने सरकार को लोगों की शिकायतें सुनने और राजनीतिक समाधान तलाशने की सलाह दी।
खुद को बताया लोकतंत्र का समर्थक
अपने भाषण में बिलावल ने खुद को सरकार का विरोधी नहीं बल्कि लोकतंत्र का समर्थक बताते हुए कहा कि कुछ ताकतें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने का मतलब चुनी हुई सरकार और प्रधानमंत्री के पद को मजबूत करना है। इसलिए राजनीतिक दलों को मिलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करनी चाहिए।
स्थानीय निकाय चुनावों पर भी सरकार घिरी
बिलावल भुट्टो ने देश में लंबे समय से लंबित स्थानीय निकाय चुनावों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब सिंध में स्थानीय निकायों को लेकर इतनी चर्चा होती है, तो पंजाब और इस्लामाबाद में चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। उनका कहना था कि स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पूरे देश में समय पर चुनाव होना जरूरी है।
सहयोगी दल MQM-P को भी दी चुनौती
बिलावल ने अपनी ही सहयोगी पार्टी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (MQM-P) को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि यदि एमक्यूएम-पी को सिंध की स्थानीय सरकार की कार्यप्रणाली से इतनी शिकायत है, तो केवल बयान देने के बजाय उसे संघीय मंत्रिमंडल छोड़ देना चाहिए। इस बयान ने गठबंधन के भीतर मौजूद अविश्वास को बाहर लाकर रख दिया है।
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