Kolkata Taratala Tragedy: मलबे से आती चीखें, कटा हुआ हाथ निकला बाहर, लाशों का हाल रूह कंपाने वाला-मौत का मंजर
Kolkata Taratala Warehouse Collapses Tragedy Eyewitness: दोपहर ढाई बजे का वक्त। कोलकाता के औद्योगिक इलाके ताराताला में ब्रेस ब्रिज के पास ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर निर्माणाधीन गोदाम का शेड ताश के पत्तों की तरह ढह गया। लोहे की भारी पोलें और टीन की छत एक साथ चरमरा कर नीचे गिर पड़ीं। उस पल में वहां 50 से 60 मजदूर काम कर रहे थे, कुछ पोलें ठीक कर रहे थे, कुछ सामान संभाल रहे थे, कुछ बस दोपहर का खाना खा रहे थे। एक पल में सब कुछ तबाह हो गया। चीखें आसमान छूने लगीं। मलबे के नीचे दबी जानें दर्द से चिल्ला रही थीं। रेस्क्यू टीम पहुंची तो जो दृश्य देखा, वह किसी को भी रुला देने वाला था।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने कांपते स्वर में बताया कि सर, सर... यहां एक शव है। एक शख्स का सिर पूरी तरह कुचला हुआ, लोहे की बीम के नीचे दबा। कहीं कटा हुआ हाथ मलबे से बाहर झांक रहा था। कहीं पैर लटक रहे थे। खून और धूल का मिश्रण सब कुछ लाल कर रहा था। मजदूरों की चीखें अभी भी मलबे से आ रही थीं कि बचाओ... पानी दो... हम जिंदा हैं। लेकिन मलबा इतना भारी कि हर कदम पर मौत का साया ताक रहा था।

हादसे का वह पल, जो रूह कंपा दे, मलबे में 50-60 लोग दबे-कितने मौतें
घटना बुधवार 24 जून 2026 दोपहर करीब 1:30 बजे हुई। यह एक चाय के गोदाम का निर्माण कार्य था, जिसकी जमीन पोर्ट ट्रस्ट से पट्टे पर ली गई थी। शंभू बेरा नामक व्यक्ति ने यह काम लिया था। लोहे की बड़ी-बड़ी पोलें खड़ी की गई थीं और ऊपर टीन का शेड लगाया जा रहा था। मजदूर रोज की तरह काम पर आए थे। परिवार का पेट पालने के लिए सुबह से मेहनत कर रहे थे। आधे घंटे पहले ही एक बीम हिलने लगा था, लेकिन उन्हें लगा शायद ठीक हो जाएगा। वे अंदर घुसकर उसे संभालने की कोशिश कर रहे थे। तभी धमाके जैसी आवाज के साथ पूरा ढांचा गिर पड़ा।

मलबे में 50-60 लोग दब गए। शुरुआती रिपोर्ट्स में 5-6 मौतों की आशंका जताई गई, जबकि कई घायल निकाले गए। SSKM अस्पताल में मृतकों और घायलों को लाया गया। कुछ के सिर कुचले हुए थे, कुछ के हाथ-पैर टूटे हुए, कई की हालत गंभीर। स्थानीय लोगों की चीख-पुकार पर तुरंत बचाव कार्य शुरू हुआ।
रेस्क्यू की जंग, मशीन कटर से बचाव अभियान, काटी गए लोहे के बीम
पुलिस, दमकल, आपदा प्रबंधन टीम, NDRF और भारतीय सेना के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। क्रेनें, गैस कटर और हेवी मशीनरी से लोहे की बीम काटी जा रही थीं। हर बीम हटाने के साथ नई चीख सुनाई देती। 'पानी भेजा जा रहा है... चिंता मत करो... हम यहीं हैं'। पुलिस का संदेश मलबे के अंदर तक पहुंचाया जा रहा था। लेकिन समय के साथ उम्मीद कम होती जा रही थी।

भाजपा विधायक राकेश सिंह मौके पर पहुंचे और साफ कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, लापरवाही है। शंभू ने गंदगी फैलाई थी। तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी भी घटनास्थल पहुंच रहे हैं। नबन्ना में कंट्रोल रूम खोल दिया गया। हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए: 1070, 8697981070, 033-22143526।
मौत का मंजर - जो आंखें कभी नहीं भूलेंगी

मलबे से निकले दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। एक शव पेट के बल लेटा हुआ, सिर पूरी तरह दबा। दूसरे के पैर बीम से कुचले हुए, हाथ बाहर लटक रहा। कटे अंग, कुचली हुई देहें, यह नजारा देखकर अनुभवी रेस्क्यू वर्कर भी भावुक हो गए। टीवी9 बांग्ला की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रत्यक्षदर्शी ने कांपते स्वर में बताया कि सर, सर... यहां एक शव है। 'सर, अपने पैरों के पास देखिए... शव किस तरह पड़ा है। वह तस्वीर देखकर किसी की भी आंखें नम हो जाएंगी।

अभी भी मलबे के नीचे कई लोग फंसे हैं। उनकी चीखें धीमी पड़ रही हैं, लेकिन उम्मीद बाकी है। सेना के जवान एक-एक करके अंदर घुस रहे हैं। क्रेन से बीम हटाए जा रहे हैं। हर सफल रेस्क्यू पर तालियां बजती हैं, लेकिन हर शव निकलने पर सन्नाटा छा जाता है।
क्यों हुआ यह हादसा? लापरवाही की कहानी

यह हादसा अचानक नहीं आया। निर्माण कार्यों में सुरक्षा की अनदेखी कोलकाता और पूरे देश में आम बात है। डिजाइन की गलती, घटिया सामग्री, बिना इंजीनियरिंग निरीक्षण के काम, अस्थायी सपोर्ट का अभाव, ये सब मिलकर मौत का जाल बुनते हैं।
यह गोदाम पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर था। क्या मंजूरी ली गई? क्या सेफ्टी ऑडिट हुआ? सवाल उठ रहे हैं। भाजपा विधायक ने साफ कहा कि लापरवाही है। मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरण के काम पर लगाया गया। भारी बीम हिलने के बावजूद काम रोका नहीं गया।













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