Nirjala Ekadashi 2026: 'एक घड़ा पानी भी बदल सकता है किस्मत', पंडित दयानंद ने बताए दान का महत्व
Nirjala Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है, 25 जून को ये पावन दिन है। काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक साल 2026 में निर्जला एकादशी बहुत शुभ योग लेकर आ रही है, इस दिन जल तक का त्याग करके व्रत रखा जाता है इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि ' इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है, ये एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है बल्कि ये संयम, सेवा और दान का संदेश भी देती है। इस दिन किया गया दान समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करने के साथ-साथ व्यक्ति के भीतर करुणा और परोपकार की भावना को भी मजबूत करता है।'

क्यों खास है निर्जला एकादशी?
दयानंद शास्त्री के अनुसार निर्जला एकादशी का संबंध भगवान विष्णु और महाभारत काल के भीमसेन से माना जाता है। पौराणिक कथाओं में जिक्र है कि भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे इसलिए वे नियमित एकादशी व्रत नहीं कर पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी पर निर्जला व्रत रखने का सुझाव दिया था, कहा जाता है कि इस एक व्रत के प्रभाव से उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हुआ।
सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति
तभी से निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी पर क्या करें?
निर्जला एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर भगवान के भजन-कीर्तन और ध्यान में समय बिताते हैं।
किन चीजों का दान करना रहेगा शुभ?
दयानंद शास्त्री के अनुसार निर्जला एकादशी पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को निम्न वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है
- जल से भरा घड़ा: गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को राहत देने के लिए जल से भरा मिट्टी का घड़ा दान करना पुण्यदायी माना जाता है।
- छाता और पंखा: तेज धूप और गर्मी से बचाव के लिए छाता, हाथ का पंखा या विद्युत पंखा दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
- सत्तू और शरबत: निर्जला एकादशी पर सत्तू, शरबत, फल और ठंडे पेय पदार्थों का दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
- वस्त्र दान: गरीब और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र दान करना विशेष पुण्यदायी माना गया है। विशेष रूप से सफेद या हल्के रंग के वस्त्र दान किए जा सकते हैं।
- अन्न और फल: अनाज, फल तथा भोजन सामग्री का दान करने से परिवार में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होने की मान्यता है।
| दान की वस्तु | धार्मिक एवं व्यावहारिक महत्व |
|---|---|
| जल से भरा मिट्टी का घड़ा | गर्मी में प्यासों को शीतल जल उपलब्ध कराना सबसे बड़ा पुण्य है। इससे कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं। |
| छाता और हाथ का पंखा | तेज धूप और लू से रक्षा करने वाली सामग्री के दान से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर जीवन के कष्टों को दूर करते हैं। |
| सत्तू और मीठा शरबत | ग्रीष्म ऋतु के अनुकूल सुपाच्य और ठंडे भोजन का दान करने से परिवार में अन्न-धन के भंडार हमेशा भरे रहते हैं। |
| सफेद या हल्के रंग के वस्त्र | जरूरतमंद लोगों को इस मौसम में आरामदायक वस्त्र दान करने से आत्मिक सुख मिलता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। |













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