Mahrang Baloch के समर्थन में उतरीं ग्रेटा थनबर्ग, पाक के खिलाफ फूंका बिगुल, रडार पर आए आसिम मुनीर- Video
Mahrang Baloch Life Sentence: बलोचिस्तान में मानवाधिकारों और लापता लोगों के मुद्दे को लगातार उठाने वाली जानी-मानी सोशल एक्टिविस्ट डॉ. माहरंग बलोच को पाकिस्तान की एक अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी गर्म हो चुका है। इस फैसले के बाद दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और एक्टिविस्ट्स ने चिंता जताई है। खास बात यह है कि स्वीडन की मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता Greta Thunberg भी अब माहरंग के समर्थन में खुलकर सामने आ गई हैं।
माहरंग को लेकर क्या बोलीं ग्रेटा?
ग्रेटा ने कहा है कि, "आप इंसानों को जेल में बंद कर सकते हैं, लेकिन सच को कभी कैद नहीं कर सकते।" उनके इस बयान के बाद मामला और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच कर रहा है।

अदालत का फैसला और बढ़ता विवाद
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब क्वेटा की आतंकवाद विरोधी अदालत (ATC) ने 22 जून 2026 को डॉ. माहरंग बलोच और उनके दो सहयोगियों सिबगतुल्लाह बलोच और बलोच कादिर को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले ने बलोचिस्तान में विरोध की नई लहर पैदा कर दी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस मुकदमे की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। वहीं पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि अदालत की कार्यवाही आम जनता और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से दूर रखी गई।
ग्रेटा थनबर्ग ने क्यों उठाई आवाज?
ग्रेटा थनबर्ग ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर दुनिया भर के लोगों से डॉ. माहरंग बलोच के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि माहरंग कई सालों से उन परिवारों के लिए न्याय मांग रही हैं जिनके परिजन कथित तौर पर जबरन गायब कर दिए गए हैं। ग्रेटा ने यह भी आरोप लगाया कि मुकदमे की सुनवाई एक हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर बंद कमरों में हुई, जहां न मीडिया को पहुंच दी गई और न ही स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को। उनके मुताबिक यह न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मानवाधिकार वकील का भी किया जिक्र
अपने वीडियो में ग्रेटा ने प्रसिद्ध मानवाधिकार वकील Iman Mazari का भी उल्लेख किया। इमान मजारी ने अदालत में माहरंग का पक्ष रखा था। ग्रेटा का कहना है कि इमान मजारी को भी सरकारी नीतियों की आलोचना और नागरिक अधिकारों की वकालत करने के कारण कानूनी दबाव और कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। उन्होंने इसे पाकिस्तान में असहमति की आवाजों पर बढ़ते दबाव का उदाहरण बताया।
कैसे हुई थी माहरंग की गिरफ्तारी?
33 साल की डॉ. माहरंग बलोच को 22 मार्च 2025 को क्वेटा में एक शांतिपूर्ण धरने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यह प्रदर्शन क्वेटा विश्वविद्यालय के छात्रों की कथित जबरन गुमशुदगी और उस मुद्दे पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आयोजित किया गया था। पुलिस ने उन पर क्वेटा सिविल अस्पताल पर हमला करने और लोगों को हिंसा के लिए उकसाने जैसे आरोप लगाए थे। हालांकि उनके समर्थकों और कई मानवाधिकार समूहों ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है।
एक साल से ज्यादा जेल में रहीं
गिरफ्तारी के बाद माहरंग बलोच को एक साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया। इस दौरान उन्हें कथित तौर पर लंबे समय तक एकांत कारावास में भी रहना पड़ा। मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार उनके स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर चिंता जताई थी। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो सकते हैं।
BYC ने फैसले को बताया 'राज्य प्रायोजित अत्याचार'
माहरंग के संगठन Baloch Yakjehti Committee ने अदालत के फैसले को पूरी तरह निराधार बताते हुए "राज्य प्रायोजित अत्याचार" करार दिया है। संगठन का कहना है कि अगर वास्तव में कोई ठोस सबूत मौजूद होता, तो निष्पक्ष सुनवाई कराई जाती। BYC ने दावा किया कि मामले में दर्ज दो अलग-अलग FIR में कई विरोधाभास हैं, जो पूरे केस को संदिग्ध बनाते हैं।
बलोचिस्तान में हड़ताल का आह्वान
फैसले के तुरंत बाद बलोच यकजेहती कमेटी ने 24 जून 2026 को पूरे बलोचिस्तान में शटर-डाउन हड़ताल का आह्वान किया। संगठन ने व्यापारियों, छात्रों, ट्रांसपोर्टरों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। इस आह्वान के बाद प्रांत के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और बंद देखने को मिल सकते हैं।
क्यों संवेदनशील है बलोचिस्तान?
बलोचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर माना जाता है। इसके बावजूद यह पाकिस्तान के सबसे कम विकसित क्षेत्रों में गिना जाता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से गुजरता है, लेकिन स्थानीय लोग लंबे समय से विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत करते रहे हैं। इसी वजह से यहां दशकों से राष्ट्रवादी आंदोलनों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बना हुआ है।
बलोचिस्तान और अन्य क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के खिलाफ चल रही कार्रवाइयों के बीच यह विवाद पाकिस्तान की लोकतांत्रिक छवि और मानवाधिकार रिकॉर्ड की एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले पर पाकिस्तान को और ज्यादा बेइज्जत होना पड़ सकता है।
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