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Pakistan: PoK में नेपाल जैसा Gen-Z आंदोलन, शहबाज सरकार के खिलाफ फूटा युवाओं का गुस्सा, गिरेगी शहबाज सरकार?

Pakistan: PoK में ने कॉलेज फीस बढ़ाने और मूल्यांकन प्रक्रिया के खिलाफ विरोध शुरू किया था जो अब शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन में बदल गया है। जिसकी तुलना अब नेपाल के Gen-Z आंदोलन से हो रही है। लिहा शुरुआती शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने अब एक व्यापक राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जिससे आसिम मुनीर तक अब परेशानी में आ सकते हैं।

छात्रों पर फायरिंग से बिगड़े हालात

शुरुआत में यह प्रदर्शन Gen-Z द्वारा किया गया था लेकिन अब इसमें बड़ी तादाद में अलग-अलग उम्र के लोगों की एंट्री हो गई है। ये विरोध प्रदर्शन पहले तो शांतिपूर्ण थे, लेकिन मुजफ्फराबाद में एक अज्ञात बंदूकधारी द्वारा छात्रों पर गोली चलाने की घटना के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, जिसमें एक छात्र घायल हो गया। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हुए देखा गया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। बताया गया कि यह घटना पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई।

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नेपाल की तर्ज पर बढ़ रहा प्रदर्शन

इस घटना के बाद छात्रों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने टायरों को आग लगा दी, तोड़फोड़ की और पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह स्थिति नेपाल और बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों में देखे गए Gen-Z के विरोध प्रदर्शनों के समान है।

बढ़ी फीस और एग्जाम में धांधली

विरोध प्रदर्शन मुजफ्फराबाद के एक बड़ी यूनिवर्सिटी में बढ़ती फीस और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुए थे। आंदोलन ने गति पकड़ी तो प्रशासन ने तत्काल यूनिवर्सिटी में राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया।

इंटरमीडिएट के छात्र भी प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं। उनकी मुख्य शिकायत नए शैक्षणिक वर्ष में मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर पर एक नई ई-मार्किंग या डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत है।

जो परीक्षा दी ही नहीं उसमें भी पास

30 अक्टूबर को, छह महीने की देरी के बाद इंटरमीडिएट प्रथम वर्ष की परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए गए थे। लेकिन छात्रों ने रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए और निराकरण की मांग की। जब यूनिवर्सिटी ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया तो छात्र भड़क उठे, जिससे आक्रोश फैल गया। वहीं जब मामला बढ़ा तो यूनिवर्सिटी ने साधने के नाम पर एक और ब्लंडर कर दिया। जिसमें कुछ मामलों में, छात्रों को उन विषयों में भी पास कर दिया गया जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं थी। सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।

छात्रों से फीस के नाम पर वसूली

प्रदर्शनकारियों ने पुनर्मूल्यांकन शुल्क माफ करने की भी मांग की है, जो प्रति विषय पेपर 1,500 रुपये निर्धारित किया गया है। इसका मतलब है कि जिन छात्रों को अपने सभी सात विषयों का पुनर्मूल्यांकन करवाना है, उन्हें 10,500 रुपये चुकाने होंगे।

लाहौर में फैल सकता है आंदोलन

यह मुद्दा लाहौर जैसे पाकिस्तानी शहरों में भी गूंजा है, जहां पिछले महीने इंटरमीडिएट के छात्रों ने लाहौर प्रेस क्लब के बाहर धरना दिया था। हालांकि, छात्रों की शिकायतें अब केवल शैक्षणिक मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें जर्जर बुनियादी ढांचा, खराब स्वास्थ्य सेवा और परिवहन की कमी भी शामिल हो गई है।

सरकार और सेना की ज्यादती

हालांकि, पाकिस्तानी सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने के प्रयास में गोलीबारी की गई, जिससे यह सेना प्रमुख असीम मुनीर के तहत सैन्य ज्यादतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन में बदल गया, जिसने क्षेत्र को ठप कर दिया। अंततः, शरीफ सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ एक समझौता करके कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अशांति समाप्त हुई।

क्या गिरेगी सरकार?

यह नया विरोध-प्रदर्शन पिछले महीने के विरोध से अलग है, क्योंकि इस बार नेतृत्व जनरेशन Z के हाथों में है, जबकि पिछली बार राजनीतिक वर्ग और कार्यकर्ताओं का बोलबाला था। इसका समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में पड़ोसी नेपाल में भी युवा-नेतृत्व वाला एक विद्रोह हुआ था, जिसने केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार को गिरा दिया था।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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