आटे की एक-एक बोरी के लिए लड़ रहे पाकिस्तानी, भारत से हजार साल तक लड़ने का भरा था दंभ, हाल देखिए...
पाकिस्तान नया लोन लेकर पुराना लोन भरता है और एक बार फिर से पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 5 अरब डॉलर से घट गया है और अगर पाकिस्तान को मदद नहीं मिलती है, तो वो डिफॉल्ट हो जाएगा।

Pakistan News: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक राजनीति रैली के दौरान कहा था, कि 'हम एक हजार साल तक भारत से जंग लड़ेंगे' और भुट्टो से पहले और भुट्टो के बाद, पाकिस्तान के जितने भी प्रधानमंत्री हुए, उन्होंने भारत को एक दुश्मन की तरह ही देखा और भारत के खिलाफ कभी छद्म युद्ध तो कभी सीधी युद्ध करते रहे। लेकिन, इसका नतीजा क्या हुआ, इसे आज के पाकिस्तान की कुछ तस्वीरों से काफी आसानी से समझा जा सकता है। पाकिस्तान आज भूख से जंग लड़ रहा है, जबकि भारत 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

'भारत से हजार साल तक लड़ेंगे'
पाकिस्तान के नेताओं ने हमेशा से अपने देश में भारत के खिलाफ जहर उगलकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकी हैं और इन नेताओं में जुल्फीकार अली भुट्टो का जिक्र इसलिए हो रहा है, क्योंकि उन्होंने कहा था, कि हम भूखे रह लेंगे, लेकिन हजार साल तक भारत के खिलाफ जंग लड़ेंगे। जुल्फीकार अल भुट्टो का वो भाषण भले ही राजनीतिक था, लेकिन पाकिस्तान की जनता की नस्लों के लिए वो भाषण खतरनाक साबित हुआ। पाकिस्तान ने विकास के रास्ते को हमेशा के लिए छोड़ दिया और भारत के खिलाफ अरबों रुपये के हथियार खरीदना जारी रखा। पाकिस्तान की सरकारों ने आतंकवादियों को पाला, पोसा और उन्हें भारत के खिलाफ जंग लड़ने के लिए तैयार करने में हजारों करोड़ रुपये फूंके। आतंकवादियों की नस्लें तैयार करने के लिए अपनी ही जनता को कट्टर बनाया और फिर आज के पाकिस्तान का निर्माण हुआ, जो भयानक कट्टर बन चुका है और जहां आतंकवाद अपने ही घर को फूंकने पर आमादा है।
पाकिस्तान का हाल देखिए
पाकिस्तान आज कर्ज के पैसों पर जिंदा है और पाकिस्तान के अलग अलग इलाकों से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वो डराने वाली हैं। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री शौकत तरीन ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें पाकिस्तान के दर्जनों लोगों को आटे की एक बोरी के लिए लड़ते हुए देखा जा सकता है। शौकत तरीन, इमरान खान के प्रधानमंत्री काल में देश के वित्तमंत्री थे और उन्होंने देश के हालात पर सवाल उठाते हुए पूछा है, कि "क्या आपने ऐसा इस देश में पहले कभी देखा है? हमने कायदे आजम के देश के साथ क्या किया है?" इस वीडियो में कई लोगों को गेहूं की बोरी को पकड़े हुए देखा जा सकता है और उसे किसी भी तरह से अपने साथ ले जाना चाहते हैं। पाकिस्तान का क्या हाल हो गया है, इस वीडियो को देखकर आसानी से समझा जा सकता है।
आटा के लिए जान की बाजी लगाते लोग
पाकिस्तान में कुल चार प्रांत हैं, जिनमें से तीन प्रांतों में आटा खत्म हो चुका है। ये तीन प्रांत हैं बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध। बलूचिस्तान के खाद्य मंत्री ने कहा है, कि पंजाब सरकार ने उनसे गेहूं भेजने का वादा किया था, लेकिन अब उन्होंने गेहूं भेजने से इनकार कर दिया है। स्थिति ये है, कि पाकिस्तान में आटा की कीमत 150 से 180 रुपये किलो हो गई है। वहीं, पाकिस्तान का एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक बुजुर्ग को फर्श पर लेटे हुए देखा जा सकता है, जो कह रहे हैं, कि अगर आटा नहीं मिला, तो गाड़ी उनके ऊपर चढ़ा दिया जाएगा। बुजुर्ग को कहते हुए सुना जा सकता है, कि 'हमें खत्म कर दो, ना हम रहेंगे और ना ही हम आटा लेने आएंगे।' ये वीडियो पाकिस्तान के दुर्भाग्य को दर्शाता है और बताता है, कि एक कट्टर देश का क्या हाल हो जाता है।

पाकिस्तान ने विकास नहीं, जंग चुना
पाकिस्तान ने आजादी के बाद से ही विकास का रास्ता नहीं, बल्कि जंग का रास्ता चुना। पाकिस्तान जंग के दलदल में फंसता चला गया, लेकिन पाकिस्तान के हुक्मरान अपने नागरिकों के दिल को जिहाद की ज्वाला से जलाते रहे। पाकिस्तान की जनता 'गजवा-ए-हिंद', 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान', 'सिंध से हिंद तक', 'दिल्ली में सुबह का नाश्ता करेंगे', जैसे सपनों के सहारे जीती रही, जबकि उनके नेता अमेरिकी डॉलर्स से अपनी बोरियां भरते रहे। आलम ये है, कि पाकिस्तान में रिटायर्ड होने के बाद हर जनरल देश छोड़कर चला जाता है। पाकिस्तान का हर सैन्य अधिकारि करोड़ों-अरबों में खेलता है और देश की आम जनता एक किलो आटा के लिए एक दूसरे का जान लेने पर आमादा रहती है।
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भारत से दुश्मनी ने कहीं का नहीं छोड़ा
पाकिस्तान को लेकर ये काफी आश्चर्यजनक बात है, कि कर्ज के ब्याज का भुगतान करने के लिए पाकिस्तान ने जहां 2.2 ट्रिलियन रुपये खर्च किए गये, वहीं देश के विकास पर सिर्फ 119 अरब ही खर्च किए गये। यानि, देश के विकास पर किया गया यह खर्ज, देश के कर्ज और रक्षा पर खर्च किए गए पैसे से काफी कम है। विकास पर खर्च पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 133 अरब रुपये यानि 53 प्रतिशत कम रहा है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने कर्ज का ब्याज चुकाने में बेतहाशा खर्च किए हैं और अब पाकिस्तान सरकार आईएमएफ के साथ सहमत वार्षिक प्राथमिक बजट घाटे के लक्ष्य से चूक जाएगी। देश की खराब स्थिति को रोकने के लिए शहबाज शरीफ ने अपने वित्तमंत्री को भी बदल दिया है, लेकिन नये वित्तमंत्री भी अभी तक फेल साबित हो रहे हैं और सिर्फ इतना कह रहे हैं, कि पाकिस्तान डिफॉल्ट नहीं होगा। लेकिन, भले ही देश डिफॉल्ट ना हो, लेकिन जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वो पाकिस्तान के एक नाकाम देश साबित होने पर जरूर मुहर लगाते हैं।












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