'PAK आर्मी और ISI बलूचिस्तान में कर रही अपहरण', मौलाना फजल-उर-रहमान के बयान से पाकिस्तान में भूचाल
Balochistan News Hindi: जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजल-उर-रहमान ने पाकिस्तानी सेना और ISI को लेकर ऐसा बयान दिया है जिससे पाकिस्तानी की राजनीति गर्म हो गई है। मौलाना फजल ने खैबर पख्तूनख्वा में आयोजित एक जनसभा में पाकिस्तानी सेना और ISI पर बलूचिस्तान में नागरिकों के जबरन अपहरण और गायब होने का गंभीर आरोप लगाया।
उनके मुताबिक बलूच समुदाय के युवा और एक्टिविस्ट लगातार लापता हो रहे हैं, और उनके परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति, सुरक्षा तंत्र और मानवाधिकार स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचने वाला है।

फजल-उर-रहमान ने क्या कहा?
मौलाना फजल-उर-रहमान ने जनसभा में सीधे तौर पर कहा कि बलूचिस्तान में बदअमली का राज है। उन्होंने आरोप लगाया कि, लोग रातों-रात उठाए जाते हैं और उनकी कोई जानकारी नहीं रहती। फजल ने याद दिलाया कि जब इस तरह की घटनाएं शुरू हुईं, तब भी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम ने आवाज बुलंद की थी। उनका यह बयान पाकिस्तान के किसी बड़े राजनीतिक नेता द्वारा सेना और ISI के खिलाफ इतनी खुली आलोचना का दुर्लभ उदाहरण है।
बलूचिस्तान में दशकों का संकट
बलूचिस्तान पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील और विवादास्पद प्रांतों में से एक माना जाता है, जहां दशकों से राजनीतिक और सामाजिक तनाव बने हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले कई वर्षों में हजारों बलूच कार्यकर्ताओं, युवाओं और सामाजिक एक्टिविस्ट्स को जबरन उठाकर लापता किया गया है। कई परिवार सालों से अपने गुमशुदा परिजनों की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। ये फोर्स्ड डिसअपियरेंस पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति, सुरक्षा तंत्र और मानवाधिकार स्थिति की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिनी जाती हैं, जो देश की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय छवि दोनों पर प्रभाव डालती हैं।।
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मौलाना के बयान से बवाल
पाकिस्तान में आमतौर पर सेना और ISI के खिलाफ सार्वजनिक आलोचना नहीं होती क्योंकि उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव बहुत मजबूत है। ऐसे में फजल-उर-रहमान का बयान समय और परिस्थितियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पाकिस्तान की आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती आतंरिक अशांति के बीच आया है, जो देश की राजनीति में नए तनाव पैदा कर सकता है।
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