तालिबान ने बजाया पाकिस्तान का बाजा, तहरीक-ए-तालिबान के खिलाफ ना एक्शन लेंगे, ना लेने देंगे

टीटीपी का मकसद पूरे पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना है और पाकिस्तान का दुर्भाग्य ये है, कि टीटीपी को कट्टर स्थानीय लोगों का समर्थन हासिल है, लिहाजा आतंकियों को हमले करने में बिल्कुल भी वक्त नहीं लगता है।

TTP IN Pakistan

TTP IN Pakistan: तहरीक-ए-तालिबान से डरे पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के तालिबान शासकों से गुहार लगाई है और उससे टीटीपी के खिलाफ एक्शन लेने की अपील की है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) लगातार पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों के साथ व्यापक कहर बरपा रहा है, जिससे पाकिस्तान परेशान हो गया है। पाकिस्तान के साथ दिक्कत ये है, कि हमला करने के बाद टीटीपी के आतंकी अफगानिस्तान भाग जाते हैं, लिहाजा पाकिस्तानी बल कोई कार्रवाई नहीं कर पाती है। लिहाजा, पाकिस्तान की शहबाज सरकार घुटनो पर आ गई है औक तालिबान को रोकने के लिए अफगान तालिबान से भीख मांग रही है।

तालिबान के आगे गिड़गिड़ाती पाक सरकार

तालिबान के आगे गिड़गिड़ाती पाक सरकार

हाल के महीनों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पूरे पाकिस्तान में सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। जबकि, ज्यादातर हमले पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और बलूचिस्तान प्रांतों में हो रहे हैं। वहीं, टीटीपी ने अब पाकिस्तानी पंजाब को भी दहलाना शुरू कर दिया है, जिसने शहबाज सरकार को दहला कर रख दिया है। पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अधिकारियों के हवाले से कहा है, कि पाकिस्तान सरकार ने अफगान तालिबान से टीटीपी को रोकने का आग्रह किया है, लेकिन अफगानिस्तान का तालिबान प्रशासन अभी भी अपने पहले के रुख पर कायम है, कि टीटीपी मुद्दे को हल करने का एकमात्र तरीका बातचीत है। जबकि, टीटीपी ने पिछले साल नवंबर में ही पाकिस्तान के साथ एकतरफा सीजफायर को खत्म कर दिया था।

आतंकियों को पालने की सजा?

आतंकियों को पालने की सजा?

पाकिस्तान को आतंकियों को पालने की सजा भुगतना पड़ रहा है और एक वक्त जो पाकिस्तान भारत के खिलाफ जिहाद का सहारा ले रहा था, उसे अब खुद जिहादियों ने जीना दूभर कर दिया है। हालांकि, पाकिस्तान ने अफगान तालिबान के कहने पर टीटीपी के साथ शांति वार्ता की थी और उस वर्ता के कुछ पॉजिटिव परिणाम भी आए थे और टीटीपी युद्धविराम के लिए सहमत हो गया था, बदले में पाकिस्तान ने जेल में बंद कई टीटीपी आतंकियों को रिहा भी कर दिया था, लेकिन पिछले साल नवंबर महीने ने सीजफायर को एकतरफा तोड़ने का ऐलान कर दिया। युद्धविराम तोड़ने के बाद टीटीपी हर दिन पाकिस्तान पर हमला कर रहा है और दर्जनों सैन्य और पुलिस अधिकारियों को अभी तक मार चुका है। पाकिस्तान के लिए सिरदर्द ये भी है, कि ईरान सीमा से लगते विद्रोही संगठन बलूचों ने भी हमले शुरू कर दिए हैं।

क्या चाहता है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान?

क्या चाहता है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान?

पिछले तीन महीनों में TTP ने पूरे पाकिस्तान में 150 बड़े हमले किए हैं, यानि औसतन हर महीने 50 हमले। जिसमें दर्जनो जवान मारे गये हैं। टीटीपी का मकसद पूरे पाकिस्तान में इस्लामिक सरकार की स्थापना करनी है, ताकि वो पूरे पाकिस्तान में शरिया कानून लागू कर सके। टीटीपी के हमलों की झड़ी ने देश के नागरिक और सैन्य नेतृत्व को अफगान रणनीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर किया है। इस महीने की शुरुआत में, राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने आतंकवादी हमलों में वृद्धि पर चर्चा करने के लिए दो दिनों के लिए एक बैठक की थी। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से कहा है, कि एनएससी के फैसले के मुताबिक, अफगान सरकार को बताया गया है, कि काबुल को टीटीपी के खतरे को बेअसर करना होगा, जैसा कि दोहा समझौते और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठकों में वादा किया गया था।

क्या तालिबान मानेगा पाकिस्तान की बात?

क्या तालिबान मानेगा पाकिस्तान की बात?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान ने सीधे तौर पर टीटीपी के खिलाफ किसी भी तरह के एक्शन लेने से इनकार कर दिया है। वहीं, तालिबान ने पाकस्तान को ये भी कहा है, कि वो टीटीपी से बातचीत करे। इतना ही नहीं, तालिबान पहले ही कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दे चुका है, कि वो किसी भी हालत में अफगानिस्तान पर हमला करने के बारे में नहीं सोचे। ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा है, कि अफगान तालिबान सरकार इस बात पर अड़ी हुई है, कि पाकिस्तान को टीटीपी के साथ बातचीत करनी चाहिए। इस्लामाबाद को बताया गया है, कि काबुल की प्राथमिकता इस्लामिक स्टेट जैसे समूहों से निपटना है, जो उनके शासन के लिए सीधा खतरा पैदा कर रहे हैं। काबुल के शासकों ने पाकिस्तान को सुझाव दिया है, कि इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर पाकिस्तान को निपटाना चाहिए।

Recommended Video

    Pakistan पर कब्जे का Taliban ने किया ऐलान, PAK Army Chief Asim Munir का उड़ा मजाक | वनइंडिया हिंदी
    क्या पाकिस्तान करेगा बातचीत?

    क्या पाकिस्तान करेगा बातचीत?

    पाकिस्तान पहले भी आतंकी संगठन टीटीपी से बात कर चुका है, लेकिन इस बार, रिपोर्ट के मुताबिक शहबाज सरकार ने बातचीत के लिए टीटीपी के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह ने पहले कहा था, कि पाकिस्तान टीटीपी से बात कर सकता है यदि वे आत्मसमर्पण करते हैं और राज्य के आदेश को स्वीकार करते हैं। सूत्रों ने कहा, कि निजी बैठकों में अफगान तालिबान, पाकिस्तान की चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार था, लेकिन टीटीपी के साथ उनके करीबी संबंधों के कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से हिचक रहे थे। आपको बता दें कि, जब अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान में रहने के दौरान टीटीपी ने तालिबान का भारी मदद की थी और अब तालिबान उस नमक का कर्ज उतार रहा है।

    सऊदी अरब बदलेगा आर्थिक मदद देने का तरीका, पाकिस्तान से तंग आकर लिया बड़ा फैसला?

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+