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पाकिस्तान में खुदाई के दौरान मिला 2300 साल पुराना दुर्लभ खजाना, प्राचीन बौद्ध मंदिर बदलेगा इतिहास?

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पेशावर, दिसंबर 19: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में 2300 साल पुराना अत्यंत प्राचीन भगवान बुद्ध से संबंधित एक मंदिर मिला है। मंदिर मिलने के साथ साथ सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि, मंदिर के साथ साथ एक दुर्लभ खजाना भी मिला है। इसके अलावा पुरातत्वविदों की टीम ने कई दुर्लभ और बेशकीमकी कलाकृतियां भी खोजने में सफलता हासिल की हैं।

2300 साल पुरानी बौद्ध मूर्ति मिली

2300 साल पुरानी बौद्ध मूर्ति मिली

पाकिस्तान के पेशावर में पुरातत्वविदों ने खुदाई के दौरान 2300 साल पुरानी भगवान बौद्ध का अतिप्राचीन मंदिर खोजने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इटली के पुरातत्वविदों की टीम ने उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में बौद्ध काल के 2,300 साल पुराने अप्सिडल मंदिर और कुछ अन्य बेशकीमती कलाकृतियों की खोज की है। ये खुदाई पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्वात जिले की बारिकोट तहसील के बजीरा में की जा रही है और यहीं पर खुदाई के दौरान पाकिस्तान मे खोजा गया अब तक का सबसे पुराना भगवान बुद्ध का मंदिर मिला है। इस खोज को पुरातत्वविदों ने काफी ज्यादा महत्वपूर्ण बताया है।

तक्षशिला से भी पुराना खोज

तक्षशिला से भी पुराना खोज

खुदाई को लेकर इतालवी पुरातत्वविदों ने कहा कि, ''एक ऐतिहासिक स्थल पर संयुक्त खुदाई के दौरान पाकिस्तानी और इतालवी पुरातत्वविदों ने अन्य कीमती कलाकृतियों को बरामद करने के अलावा उत्तर पश्चिम पाकिस्तान में बौद्ध काल के 2,300 साल पुराने अप्सिडल मंदिर की खोज की है। स्वात में खोजा गया मंदिर पाकिस्तान के तक्षशिला में मिले मंदिरों से भी पुराना है।'' पुरातत्वविदों ने कहा कि, ''मंदिर के अलावा बौद्ध काल की 2,700 से ज्यादा दूसरी बेशकीमती कलाकृतियों को भी खुदाई के दौरान जमीन के अंदर से बरामद किया गया है, जिनमें अतिप्राचीन सिक्के, अंगूठियां, बर्तन और ग्रीस के राजा मेनेंडर काल की खरोष्ठी भाषा का लेखन भी शामिल है।''

तक्षशिला से भी प्राचीन है स्वात?

तक्षशिला से भी प्राचीन है स्वात?

पाकिस्तान में इतालवी पुरातात्विक मिशन के प्रमुख डॉ लुका मारिया ओलिवरी ने कहा कि, बौद्ध काल के अतिप्राचीन मंदिर की खोज ने साबित कर दिया है कि, स्वात तक्षशिला की तुलना में सबसे पुराने पुरातात्विक अवशेषों का घर है। उन्होंने कहा कि, स्वात जिले के ऐतिहासिक बजीरा शहर में खुदाई के दौरान और अधिक पुरातात्विक स्थलों की बरामदगी के बारे में इतालवी विशेषज्ञों ने विश्वास जताया है। पाकिस्तान संग्रहालय एवं पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ अब्दुस समद ने बताया कि, बड़ीकोट स्वात का बजीरा शहर तक्षशिला अवशेषों से भी पुराना है।

खैबर पख्तूनख्वा में खुदाई जारी

खैबर पख्तूनख्वा में खुदाई जारी

शीर्ष इतालवी विश्वविद्यालयों के पुरातत्वविद और खैबर पख्तूनख्वा पुरातत्व विभागों के पीएचडी छात्र बजीरा शहर में इन स्थलों की खुदाई में लगे हुए हैं। हाल ही में बजीरा शहर में कलाकृतियों की खोज ने साबित कर दिया कि स्वात छह से सात धर्मों के लिए पवित्र स्थान रहा है। डॉ समद ने खुलासा किया है कि, केपी सरकार ने धारा चार के तहत चौदह पुरातात्विक स्थलों को खरीदा है जहां खुदाई चल रही थी। पाकिस्तान में इटली के राजदूत एंड्रियास फेरारेस ने संवाददाताओं से कहा कि, पाकिस्तान में पुरातात्विक स्थल दुनिया के विभिन्न धर्मों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि, खैबर पख्तूनख्वा पुरातत्व विभाग के सहयोग से इतालवी पुरातत्व मिशन पिछले सत्तर वर्षों से पाकिस्तान में पुरातात्विक स्थलों की रक्षा और खुदाई कर रहा है।

मिस्र में मिला था सूर्य मंदिर

मिस्र में मिला था सूर्य मंदिर

पाकिस्तान में खोज से पहले पुरातत्वविद मिस्र में भी अतिप्राचीन सूर्य मंदिर की खोज कर चुके हैं। पिछले महीने मिस्र और जर्मनी के पुरातत्वविदों ने इस खोज को अंजाम दिया है। पुरातत्वविदों के मुताबिक, प्राचीन समय में मातराय प्राचीन हेलियोपोलिस का हिस्सा था, जो निचले मिस्र की राजधानी और एक प्रमुख धार्मिक केंद्र था। पुरातत्वविदों ने जब अवशेष को गंभीरता से खंगाला और उसका परीक्षण किया, तो पता चला कि उस वक्त ब्लॉक और टुकड़े बेसाल्ट से बने होते थे और माना जाता है कि ये अवशेष उस वक्त के राजा राजा नेकटेनबो-1 के मंदिर के पश्चिमी और उत्तरी मोर्चे से संबंधित हैं।

कुछ हफ्ते पहले हुई है खोज

कुछ हफ्ते पहले हुई है खोज

मिस्र के स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर के मध्य क्षेत्र में खुदाई कार्य के दौरान कुछ हफ्ते पहले यह खोज की गई है। अहराम ऑनलाइन की एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि, टीम द्वारा खोजे गए ब्लॉक और टुकड़े बेसाल्ट से बने हैं और मंदिर के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से से संबंधित हैं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका उत्तरी विस्तार अभयारण्य को सीमा के मुख्य अक्ष से जोड़ता है और यह मंदिर सूर्य देवता को समर्पित था, जिन्हें मिस्र में हेलिओस भी कहा जाता है। मंदिर के पश्चिमी और उत्तरी ढांचे का बेसाल्ट ब्लॉक नील नदी के पूर्व में ग्रेटर काहिरा के उत्तरी क्षेत्र में स्थित जिले में मिले हैं और उत्तरी तरफ से मंदिर के विस्तार में पाए गए हैं।

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English summary
Archaeologists in Pakistan have managed to find a 2,300-year-old Buddha statue during excavations.
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