Pak Petrol Price: Pakistan में टूटे सारे रिकॉर्ड, पेट्रोल के दाम पहुंचे 400 पार, डीजल-LPG ने भी मचाया हाहाकार
Pak Petrol Price: अमेरिका-ईरान के जंग ने मिडिल ईस्ट से भी ज्यादा किसी को तोड़ा है तो वो है पाकिस्तान। क्योंकि किसी भी देश में महंगाई उस हद तक नहीं बढ़ी जिस कदर पाकिस्तान में बढ़ी है। हालात ये हैं कि पहले पेट्रोल महंगा होता चला गया, फिर एप के जरिए बिका और अब दाम वाकई में आसमान छू गए हैं। पेट्रोल के जो दाम अमेरिका-ईरान की जंग के पहले 253.17 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर थे अब वे 400 रुपए को पार कर गए हैं। ऐसा ही कुछ हाल डीजल और बाकी एनर्जी रिसोर्सेस का है। कैसे-कैसे ये दाम बढ़े और इनका असर क्या हो रहा है सब जानेंगे।
डीजल की कीमत में सबसे बड़ा झटका
हाई स्पीड डीजल (HSD) का एक्स-डिपो रेट 380.19 रुपये से बढ़कर 399.58 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो जनवरी के महीने में 257.08 रुपए प्रति लीटर थी। यानी 19.39 रुपये या करीब 5% की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 10 अप्रैल को कीमतें नाम मात्र की कम हुई थीं, लेकिन अब फिर तेजी लौट आई है।

पाक में अबकी बार- पेट्रोल 400 के पार
पेट्रोल की एक्स-डिपो कीमत 393.35 रुपये से बढ़कर 399.86 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यानी 6.51 रुपये या 1.65% की बढ़ोतरी हुई है। डीलर मार्जिन और अन्य शुल्क जोड़ने पर वास्तविक खुदरा कीमतें 400 रुपये प्रति लीटर से ऊपर जा रही हैं।

आधी रात को चुपचाप जारी हुआ फैसला
पहले कई बार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद कीमतों में कटौती का ऐलान करते थे। लेकिन इस बार पेट्रोलियम मंत्रालय ने आधी रात को चुपचाप नई कीमतों का ऐलान कर दिया। इससे साफ है कि सरकार इस फैसले को ज्यादा प्रचारित नहीं करना चाहती थी, अगर ऐसा करती तो जनता का गुस्सा झेलना पड़ता।
महंगाई पर क्यों पड़ेगा बड़ा असर?
डीजल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल माल ढुलाई और ट्रांसपोर्ट में होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने का सीधा असर खाने-पीने के सामान, किराए और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ सकता है। पाकिस्तान में पहले ही महंगाई बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
एक हफ्ते के नाम पर बढ़ाए दाम
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने 8 मई को खत्म होने वाले सप्ताह के लिए नई कीमतें लागू की हैं। इसके तहत पेट्रोल की कीमत में 6.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 19.39 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के कारण लिया गया।
सरकार ने इसे बताया बड़ी उपलब्धि
गुरुवार को IMF के साथ हुई वर्चुअल बैठक में पाकिस्तान कहा कि वह 1.468 ट्रिलियन रुपये के पेट्रोलियम लेवी लक्ष्य को हासिल करने की मजबूत स्थिति में है। पाकिस्तान ने दावा किया कि सिर्फ 10 महीनों में 11 महीने का लक्ष्य पार कर लिया, हैरानी की बात यह है कि शहबाज सरकार इसे अपनी वित्तीय उपलब्धि बता रही है। लेकिन इस उपलब्धि की बड़ी शिकार पाकिस्तानी आवाम बनी है जो महंगाई के बोझ के तले हर वक्त कुचली जा रही है।
पाकिस्तान को 10 से 68 अरब डॉलर तक नुकसान का खतरा
यूएनडीपी टीम ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली की समिति को बताया कि मिडिल-ईस्ट संकट की गंभीरता के हिसाब से पाकिस्तान को 10 अरब डॉलर से 68 अरब डॉलर तक आर्थिक नुकसान हो सकता है।
तेल 150 डॉलर पहुंचा तो बिगड़ सकते हैं हालात
अगर संकट तीन महीने चला तो मध्यम असर वाले हालात में नुकसान 24-32 अरब डॉलर तक जा सकता है। गंभीर स्थिति में यह सालाना 50-68 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, खासकर अगर तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ऐसे में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 450 पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच सकती हैं।
सरकार नोट गिनने में बिजी
पेट्रोल और डीजल पाकिस्तान सरकार के लिए बड़े रिवेन्यु सोर्स हैं। मिट्टी के तेल की मासिक मांग जहां सिर्फ 10,000 टन है, वहीं पेट्रोल और डीजल की ज्वॉइंट बिक्री 700,000 से 800,000 टन प्रति माह तक पहुंचती है। इससे सरकार को भारी टैक्स कमाई होती है। हालांकि जनता को इसमें भारी परेशानी होती है।
LNG संकट से बिजली उत्पादन पर असर
कतर से LNG सप्लाई में रुकावट के कारण थर्मल पावर उत्पादन लगभग 32% कम हो गया है। इसके चलते सरकार को महंगे फर्नेस ऑयल की बजाय 2 से 3 घंटे की लोडशेडिंग करनी पड़ रही है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव
जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह से तेल बाजार, शिपिंग रूट और सप्लाई चेन प्रभावित हो रहे हैं। इससे घरेलू महंगाई, बढ़ता आयात बिल, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और महंगी लॉजिस्टिक्स लागत पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
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