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डेल्टा के मुकाबले ओमिक्रॉन क्यों कम खतरनाक है, हो गई पुष्टि, लंग्स के मेडिकल रिपोर्ट से खुलासा

अमेरिका और जापान के वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद जो नतीजा तैयार किया है, उसका समर्थन हांगकांग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने किया है और उन्होंने शोधकर्ताओं के रिसर्च पेपर पर मुहर लगाई है।

वॉशिंगटन, जनवरी 02: दुनिया को दहशत में डालने वाला कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट, दुनिया में कहर बरपा चुके डेल्टा वेरिएंट की तुलना में काफी कम खतरनाक है, अब इसकी मेडिकल पुष्टि हो गई है। हालांकि, डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन के फैलने की रफ्तार भले ही ज्यादा है, लेकिन ओमिक्रॉन वायरस फेफड़ों को उतना नुकसान नहीं पहुंचाता है, जितना नुकसान डेल्टा वेरिएंट पहुंचाता है। कई मेडिकल रिपोर्ट्स के अब इस बात की पुष्टि हो गई है।

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में लगाया पता

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में लगाया पता

हैम्स्टर्स और चूहों पर अमेरिकी और जापानी वैज्ञानिकों के एक संघ ने रिसर्च किया है और रिसर्च में पता चला है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट से प्रभावित मरीज के फेफड़ों में डेल्टा वेरिएंट की तुलना में कम नुकसान पहुंचा है। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को पता चला है कि, डेल्टा वेरिएंट, इंसानों के फेफड़ों पर जितना प्रेशर बनाता है, उसकी तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट कम प्रेशर बनाता है, लिहाजा ओमिक्रॉन वेरिएंट से मरीजों की मौत की संभावना काफी कम हो जाती है। जापान और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ग्रुप ने चूहों के लंग्स पर डेल्टा और ओमिक्रॉन के प्रभाव का विश्लेषण किया है और पाया है कि, डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन वेरिएंट का प्रभाव 10वां हिस्सा था।

हांगकांग के वैज्ञानिकों ने किया समर्थन

हांगकांग के वैज्ञानिकों ने किया समर्थन

अमेरिका और जापान के वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद जो नतीजा तैयार किया है, उसका समर्थन हांगकांग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने किया है और उन्होंने शोधकर्ताओं के रिसर्च पेपर पर मुहर लगाई है। हांगकांग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन प्रभावित मरीजों में ह्यूमन टिश्यू का स्टडी किया है और उन्होंने पाया है कि, वायरस के पहले के वेरिएंट्स की तुलना में 12 फेफड़ों के नमूनों में ओमिक्रॉन धीरे धीरे फैलता है।विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सुपर म्यूटेंट वेरिएंट फेफड़ों के निचले हिस्सों में उतनी कॉपी नहीं बना पाता है, जितनी कॉपी डेल्टा वेरिएंट बनाता था, लिहाजा मरीजों के फेफड़ों को काफी कम नुकसान होता है और उसकी मौत की संभावना काफी कम हो जाती है।

दक्षिण अफ्रीकी डेटा से भी पुष्टि

दक्षिण अफ्रीकी डेटा से भी पुष्टि

दक्षिण अफ्रीका के डेटा से पता चला है कि डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित मरीजों की तुलना में ओमिक्रॉन पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 80 प्रतिशत तक कम है, वहीं यूके के स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग ने भी कुछ इसी तरह का अनुमान लगाया है, कि ओमिक्रॉन वेरिएंट से प्रभावित मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित मरीजों की तुलना में 70 प्रतिशत तक कम है। वहीं, बर्लिन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक कम्प्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट रोलांड ईल्स ने कहा कि रिसर्च पेपर में बताया गया है, उससे यही पता चलता है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट इंसानी फेफड़ों पर कम प्रभाव डालता है।

सांस संबधित नुकसान का कम खतरा

सांस संबधित नुकसान का कम खतरा

रोलांड ईल्स ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि, ''ये कहना ज्यादा सही होगा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट इंसानों के शरीर में ऊपरी श्वसन प्रमाली में उभरने वाली बीमारी है और इसका प्रभाव फेफड़ों तक काफी कम पड़ता है''। इस रिसर्च का पहला पेपर ''रिसर्च गेट'' में प्री-प्रिंट के रूप में प्रकाशित किया गया है और अभी तक पीयर-रिव्यू नहीं किया गया है, जिसमें चूहों और हैम्स्टर्स में ऊतक के नमूनों का विश्लेषण किया गया है। रिसर्चर्स ने ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित चूहों के साथ-साथ डेल्टा सहित कोरोना वायरस के कई और वेरिएंट का फेफड़ों के विभिन्न हिस्सों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया है। उन्होंने पाया कि, ओमिक्रॉन संक्रमितों ने काफी कम गंभीर लक्षणों का अनुभव किया है और सीरियाई म्स्टर, जिसपर कोरोना के पहले के वेरिएंट्स ने काफी बुरा असर डाला था, वो भी ओमिक्रॉन से सुरक्षित रहा है।

ओमिक्रॉन का काफी कम प्रभाव

ओमिक्रॉन का काफी कम प्रभाव

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के एक वायरोलॉजिस्ट और इस रिसर्च के सह-लेखक डॉ माइकल डायमंड ने कहा कि, 'यह काफी आश्चर्यजनक है, क्योंकि कोरोना वायरस के हर दूसरे वेरिएंट्स ने हैम्स्टर्स को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाया है और काफी मजबूती से संक्रमित किया है, लेकिन ओमिक्रॉन का प्रभाव हैम्स्टर्स पर काफी कम पड़ा है'। इस बीच, हांगकांग के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए दूसरे अध्ययन में भी इसी तरह की बात है, कि मनुष्यों के फेफड़ों की कोशिकाओं में ओमिक्रॉन कैसा प्रभाव डालता है, तो उन्होंने पाया कि वायरस फेफड़ों के निचले हिस्सों में काफी कम अपनी कॉपी तैयार करता है, जिससे कोशिकाएं ज्यादा डैमेज नहीं होती हैं।

प्रभावित देशों में मरीजों की स्थिति

प्रभावित देशों में मरीजों की स्थिति

ओमिक्रॉन प्रभावित देशों में अभी तक की स्थिति से पता चल रहा है कि, जिन मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है, उन्हें वेंटिलेशन की जरूरत ना के बराबर पड़ रही है। करीब 5 लाख 28 हजार 176 ओमिक्रॉन प्रभावित मरीजों और करीब 5 लाख 73 हजार 12 डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित मरीजों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी एमआरसी बायोस्टैटिस्टिक्स यूनिट ने विश्लेषण रिपोर्ट जारी की है, जिसे यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी द्वारा प्रकाशित किया गया है। जिसमें पाया गया है कि, ओमिक्रॉन मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ रही है, जबकि डेल्टा संक्रमितों को सबसे पहले शिकायत सांस की होती थी और उन्हें फौरन ऑक्सीजन की जरूरत महसूस होती थी।

वैक्सीन के प्रभाव का विश्लेषण

वैक्सीन के प्रभाव का विश्लेषण

इस विश्लेषण में वैक्सीन के दो खुराक और तीन खुराक से पड़ने वाले असर को लेकर भी रिपोर्ट दी गई है और कहा गया है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर भी वैक्सीन काफी प्रभावी तरीके से काम कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, जिन मरीजों ने वैक्सीन की दो या तीन खुराक ले ली है, वैसे मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम से कम 81 प्रतिशत तक कम हो जाती है। यूकेएचएसए ने कहा कि, ये तुलना उन मरीजों के साथ की गई है, जिन्होंने वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं ली है।

चिंता की बात फिर भी है

चिंता की बात फिर भी है

यूकेएचएसए के मुख्य चिकित्सा सलाहकार सुसान हॉपकिंस ने कहा कि, ओमिक्रॉन का प्रभाव कम है, इसका मतलब ये नहीं कि, डरने की जरूरत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट काफी तेजी से संक्रमित करता है, लिहाजा दूसरे वेरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट से काफी ज्यादा लोग संक्रमित होंगे, लिहाजा अस्पतालों पर प्रेशर काफी ज्यादा पड़ सकता है और अस्पतालों पर प्रभाव कम होगा, इसको लेकर निष्कर्ष अभी निकालना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि, 60 साल से उम्र के ज्यादा लोग, जिनको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, वो अभी भी खतरे में हैं और ऐसे लोग अगर ज्यादा संख्या में संक्रमित होते हैं, तो फिर अस्पतालों पर प्रेशर ज्यादा आएगा ही।

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