मनमोहन सिंह से सबक सीखे इजराइल.. न्यूयॉर्क टाइम्स ने की मुंबई हमले के बाद UPA सरकार के रिस्पांस की तारीफ
Israel-Hamas War: न्यूयॉर्क टाइम्स के एक स्तंभकार ने 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद सैन्य रूप से जवाबी कार्रवाई नहीं करने के लिए भारत की तत्कालीन यूपीए सरकार के फैसले की सराहना करके विवाद पैदा कर दिया है, जिसमें 160 से अधिक लोग मारे गए थे।
न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए अपने कॉलम में, थॉमस एल फ्रीडमैन ने 2008 के आतंकवादी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया की तुलना 7 अक्टूबर को हमास के आतंकवादी हमलों में 1,400 से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद इजरायली सैन्य हमले के साथ की है और उन्होंने इजराइल को मनमोहन सिंह से सबक लेने के लिए कहा है।

जहां भारत ने मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी, वहीं इजराइल ने 7 अक्टूबर को हुए हमले के बाद गाजा में पिछले 23 दिनों से लगातार बमबारी की है और तबाही फैला दी है। थॉमस एल फ्रीडमैन ने मुंबई आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई नहीं करने के, तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के फैसले की सराहना की है।
मनमोहन सरकार की तारीफ
फ्रीडमैन ने खुद को मनमोहन सिंह का प्रशंसक बताया और लिखा, कि 2008 के मुंबई हमले के लिए पाकिस्तान या लश्कर शिविरों के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं करने की उनकी (मनमोहन सरकार की) प्रतिक्रिया, जो भारत के 9/11 हमले के समान थी, वो "संयम का उल्लेखनीय प्रदर्शन" था।
फ्रीडमैन ने 29 अक्टूबर को अपने राय कॉलम में लिखा, कि "भारत के 11 सितंबर के हमले पर मनमोहन सिंह की सैन्य प्रतिक्रिया क्या थी? उन्होंने कुछ नहीं किया। मनमोहन सिंह ने कभी भी पाकिस्तान राष्ट्र या पाकिस्तान में लश्कर शिविरों के खिलाफ सैन्य जवाबी कार्रवाई नहीं की। यह संयम का एक उल्लेखनीय कार्य था।"
मनमोहन सरकार के फैसले के पीछे के तर्क को विस्तार से बताने के लिए, फ्रीडमैन ने तत्कालीन विदेश सचिव शिवशंकर मेनन की पुस्तक 'च्वाइसेस: इनसाइड द मेकिंग ऑफ इंडियाज फॉरेन पॉलिसी' का हवाला दिया है।
मेनन ने लिखा था कि लश्कर-ए-तैयबा के हमले का जवाब देना, जिसके परिणामस्वरूप मुंबई में 160 से अधिक लोगों की मौत हुई, "भावनात्मक रूप से संतोषजनक" होता, लेकिन "उस समय राजनयिक, गुप्त और अन्य तरीकों पर ध्यान केंद्रित करना सही था"
मेनन ने अपनी किताब में लिखा है, कि अगर भारत ने जवाबी कार्रवाई की होती, तो आतंकवादी हमलों की भयावहता खत्म हो गई होती, और भारत की जवाबी कार्रवाई को दुनिया ने, भारत-पाकिस्तान के बीच एक और लड़ाई के रूप में देखा होगा।

मेनन के मुताबिक, भारत की जवाबी कार्रवाई ने पाकिस्तानियों को एकजुट कर दिया होता, और अंततः युद्ध से भीषण आर्थिक नुकसान होता, जो भारतीय अर्थव्यवस्था ने जो प्रगति की है, उसे और पीछे धकेल देती।
फ्रीडमैन ने इज़राइल पर हमास के हमलों की तुलना में भारत में 26/11 के हमलों की प्रतिक्रिया में अंतर की ओर इशारा किया, और दोनों घटनाओं के बाद "विपरीतता पर विचार करने" की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने लिखा है, कि "मैं समझता हूं, कि इजराइल भारत नहीं है, जो 1.4 अरब लोगों का देश है और जिसका क्षेत्र विशाल है। मुंबई में 160 से ज्यादा लोगों की मौत, जिनमें से कई पर्यटक थे, हर भारत के हर घर और गांव में महसूस नहीं किया गया था, क्योंकि इजराइल भारत की तुलना में काफी ज्यादा छोटा है और हमास के हमले में 1400 इजराइली लोगों की मौत हुई और इजराइल के हर क्षेत्र में इस दर्द को लोगों ने महसूस किया। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास भारत की जवाबी कार्रवाई के खिलाफ परमाणु बम का होना भी है।"
फ्रीडमैन के मुताबिक, हमास के खिलाफ इजराइल की भीषण कार्रवाई ने हमास को कई लोगों की नजर में नायक भी बना दिया है और इसके अलावा, इजराइल की जबरदस्त प्रतिक्रिया की वजह से उसके नये बन रहे अरब सहयोगियों ने उससे अपना समर्थन भी वापस ले लिया है।












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