Nobel Prize: किस आधार पर मिलता है दुनिया का सबसे बड़ा अवॉर्ड? कितनी होती है प्राइज मनी? डिटेल चौंकाने वाली!
Nobel Prize: हर साल अक्टूबर के महीने में नॉर्वेजियन नोबेल समिति अलग-अलग क्षेत्रों में विजेताओं की घोषणा करती है। इनमें फिजियोलॉजी या मेडिसिन, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य, शांति कार्य और आर्थिक विज्ञान का पुरस्कार शामिल होता है। इन सबमें शांति का पुरस्कार सबसे ज्यादा चर्चित और प्रतीक्षित होता है, क्योंकि इसके नामांकित व्यक्ति अक्सर दुनिया के जाने-माने नेता, कार्यकर्ता या संस्थाएं होती हैं।
मलाला से लेकर ओबामा तक को मिला सम्मान
अब तक मलाला यूसुफजई, बराक ओबामा, नेल्सन मंडेला और मदर टेरेसा जैसे महान व्यक्तित्वों को नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इस साल का पुरस्कार भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 10 अक्टूबर को घोषित किया जाएगा, और पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं कि इस बार कौन बनेगा विश्व शांति का प्रतीक।

कितना पैसा मिलता है?
वर्तमान में हर नोबेल पुरस्कार के लिए 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (SEK) की पुरस्कार राशि दी गई। यह राशि लगभग 10,65,55,200 भारतीय रुपयों के बराबर होती है। पुरस्कार राशि के अलावा, विजेताओं को एक खास डिप्लोमा और 18 कैरेट सोने का एक शानदार पदक भी मिलता है। एक नोबेल पुरस्कार अधिकतम तीन विजेताओं को दिया जा सकता है जो पुरस्कार राशि भी साझा करते हैं।
कैसे चुना जाता है नोबेल शांति पुरस्कार विजेता?
नोबेल शांति पुरस्कार की चयन प्रक्रिया बेहद गोपनीय और जटिल होती है। हर साल हजारों नामांकन सरकारी अधिकारियों, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, अंतरराष्ट्रीय शांति संगठनों के सदस्यों और पूर्व विजेताओं से प्राप्त किए जाते हैं। समिति का कहना है कि इतने विविध नामांकन उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों से उम्मीदवार चुनने का अवसर देते हैं।
इस साल 338 उम्मीदवारों की रेस
2025 के लिए कुल 338 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है - जिनमें 244 व्यक्ति और 94 संगठन शामिल हैं। समिति सितंबर से जनवरी तक नामांकन स्वीकार करती है और 31 जनवरी को रात 12 बजे तक आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि होती है। इसके बाद महीनों तक उम्मीदवारों के काम का मूल्यांकन किया जाता है और लगभग 20 से 30 नामों की एक छोटी सूची बनाई जाती है।
कड़ी गोपनीयता के बीच होती है प्रक्रिया
नोबेल संस्थान के स्थायी सलाहकार इस सूची की समीक्षा कर अंतिम विजेता का चयन करते हैं। नामांकनकर्ता और नामांकित व्यक्तियों की जानकारी कठोर गोपनीयता में रखी जाती है, जो केवल 50 साल बाद सार्वजनिक की जाती है। यह व्यवस्था अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह पुरस्कार ऐसे व्यक्ति या संगठन को मिलना चाहिए जिसने "राष्ट्रों के बीच भाईचारे, स्थायी सेनाओं की कमी और शांति के प्रसार" में असाधारण योगदान दिया हो।
पिछले वर्षों के विजेताओं ने छोड़ी छाप
2024 में जापान के संगठन निहोन हिडंक्यो को "परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के प्रयास" के लिए यह पुरस्कार मिला था। 2023 में ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता नर्गिस मोहम्मदी को "महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष और मानवाधिकारों के प्रचार" के लिए सम्मानित किया गया। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि समिति केवल लंबे और ठोस शांति प्रयासों को ही प्राथमिकता देती है।
दुनिया की नजर इस साल के विजेता पर
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार किसे मिलेगा। क्या यह किसी नए संगठन के खाते में जाएगा या किसी पुराने नेता की पहल को सम्मानित करेगा? इसका जवाब दुनिया को कल, 10 अक्टूबर को मिलेगा।
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