Tushar Mehta: 'मरी हुई से तलाकशुदा बेटी अच्छी', कौन हैं जनरल तुषार मेहता? क्यों दिया ये बयान?
Tushar Mehta: भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेहद अहम और भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'तलाकशुदा बेटी मरी हुई बेटी से ज्यादा अच्छी होती है', अदालत में की गई यह टिप्पणी अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागचीi और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच के सामने हुई।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से एसजी तुषार मेहता पेश हुए, जबकि आरोपी परिवार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने ट्विशा शर्मा के परिवार को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर परिवार ने समय रहते बेटी की शिकायतों को गंभीरता से लिया होता, तो शायद स्थिति इतनी भयावह नहीं होती।

उन्होंने समाज में बढ़ती दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि कई परिवार सामाजिक दबाव और रिश्ते बचाने की कोशिश में बेटियों की पीड़ा को नजरअंदाज कर देते हैं। इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। तुषार मेहता भारत में एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और वर्तमान में भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्यरत हैं।
तुषार मेहता ने गुजरात यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की
सीके दफ्तरी के बाद वे भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सॉलिसिटर जनरल हैं। 11 सितंबर 1964 को गुजरात के जामनगर में जन्मे तुषार मेहता ने गुजरात यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की, जहां से उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री हासिल की और 5 गोल्ड मेडल जीते। उन्हें एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा और कर्नाटक स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट भी मिली है।

1987 में शुरू हुआ वकालत का सफर
1987 में गुजरात बार काउंसिल में एक वकील के तौर पर रजिस्टर होने के बाद, तुषार मेहता ने गुजरात हाई कोर्ट के सीनियर वकील कृष्णकांत वखारिया के मार्गदर्शन में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की। 2008 में, 42 साल की उम्र में, गुजरात हाई कोर्ट ने उन्हें सीनियर वकील के तौर पर नामित किया गया और उसके बाद साल 2008 में उन्हें गुजरात का एडिशनल एडवोकेट जनरल नियुक्त बनाया गया।
तुषार मेहता 2018 में सॉलिसिटर जनरल नियुक्त बने
साल 2014 में तुषार मेहता को भारत का एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था और इसके बाद 2018 में तुषार मेहता को तीन साल के लिए भारत का सॉलिसिटर जनरल नियुक्त बने और तब से उनके कार्यकाल को नियमित रूप से बढ़ाया जाता रहा है।

क्यों दिया ये बयान?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ये टिप्पणी इसलिए कही क्योंकि ट्विशा शर्मा की मौत से पहले लगातार अपने परिवारवालों को मैसेज कर रही थी कि वो ससुराल में खुश नहीं है, उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है लेकिन घरवालों ने उसके मैसेज को सीरयसली ना लेते हुए बार-बार उससे यही कहा कि 'अच्छे लोग हैं एडजस्ट करो।' 12 मई को वो अपने ससुराल में मृत पाई गई, जिसके बाद उसके परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है और वो ये कह रहे हैं कि 'काश हम उसकी बात सुन लेते तो शायद वो आज जिंदा होती।'
क्या कहा किरण बेदी ने?
पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी ने भी तुषार मेहता की बात का समर्थन करते हुए कहा कि 'मेरी नज़र में आरोपी या यूं कहें कि आरोपी के परिवार ने निश्चित रूप से गलतियां की हैं। सबसे पहले, आरोपी की तरफ से मुख्य गलती यह थी कि पति खुद ही मौके से भाग गया, दूसरी गलती सास ने की, जिन्होंने बार-बार ऐसी पक्की बातें कही, ऐसी टिप्पणियां जिनसे पीड़ित परिवार को गहरा दुख और तकलीफ़ हुई। किसी को भी पीड़ित परिवार के ज़ख्मों पर नमक नहीं छिड़कना चाहिए, यह माता-पिता को एक बड़ा संदेश देता है, यह बात बिल्कुल सच है कि एक मृत बेटी के मुकाबले एक तलाक़शुदा बेटी ज़्यादा बेहतर है।'












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