लगातार बढ़ रहे Petrol के दाम! फिर सरकार क्यों नहीं घटा रही TAX? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समझाया मामला

Nirmala Sitharaman on Petrol Fuel price hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ 10 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन महंगा हुआ है और इसका सीधा असर घर के बजट से लेकर ट्रांसपोर्ट, सब्जियों और रोजमर्रा की चीजों तक दिखने लगा है। इसी बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा बयान देते हुए साफ कहा कि अगर सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाती है, तो सरकारी खजाने को करीब ₹1 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि भारत इस समय "डर और नकारात्मक माहौल" फैलाने की राजनीति अफोर्ड नहीं कर सकता। उनके मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है और लोगों के बीच भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी है।

Nirmala Sitharaman on Fuel price hike

क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? (Why Fuel Prices Are Rising)

सोमवार को पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव माना जा रहा है।

मिडिल ईस्ट संकट के बाद दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) प्रभावित हुआ है। यही रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चा तेल पहुंचाने का काम करता है। जब सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा हो जाता है और उसका असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर तुरंत दिखने लगता है।

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निर्मला सीतारमण बोलीं-'टैक्स घटाना आसान नहीं'

  • काफी समय से मांग उठ रही है कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर टैक्स कम करे ताकि जनता को राहत मिल सके। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि ऐसा करना सरकार के लिए आसान फैसला नहीं है।
  • उन्होंने साफ कहा कि अगर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की जाती है, तो सरकार को करीब ₹1 लाख करोड़ का रेवेन्यू नुकसान हो सकता है। यह रकम इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी योजनाओं और वेलफेयर स्कीम्स पर असर डाल सकती है।
  • सरकार पहले ही पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर चुकी है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव कीमतों पर बना हुआ है।

निर्मला सीतारमण ने 'Fear Mongering' पर क्यों दिया बयान?

Small Industries Development Bank of India यानी सिडबी के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में कुछ लोग लगातार ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे सबकुछ बिखर रहा हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपीलों और आम लोगों के सकारात्मक प्रयासों को नजरअंदाज कर केवल नकारात्मक तस्वीर पेश करना सही नहीं है।

सीतारमण के मुताबिक भारत की चुनौतियां ज्यादातर बाहरी कारणों से जुड़ी हैं, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लोगों में भरोसा पैदा करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

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MSME सेक्टर पर भी जताई चिंता

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिर्फ ईंधन संकट की बात नहीं की, बल्कि एमएसएमई सेक्टर की परेशानियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि छोटे और मझोले उद्योगों का करीब ₹8.1 लाख करोड़ भुगतान अभी तक अटका हुआ है।

उनके मुताबिक इतनी बड़ी रकम फंसने से एमएसएमई कंपनियों की वर्किंग कैपिटल पर भारी असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकारी उपक्रमों से कहा कि वे 45 दिनों के भीतर भुगतान करने के नियम का सख्ती से पालन करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर एमएसएमई सेक्टर पर दबाव बढ़ता है, तो रोजगार और छोटे कारोबार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ी चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने से इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है:

  • ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स
  • फल-सब्जियों की कीमतें
  • ऑनलाइन डिलीवरी खर्च
  • बस और टैक्सी किराया
  • छोटे कारोबार की लागत

यानी आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि सरकार का दावा है कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी कई बड़े देशों की तुलना में ज्यादा स्थिर है।

क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित रहती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल सरकार टैक्स कटौती और राजस्व संतुलन के बीच रास्ता तलाशने की कोशिश कर रही है। लेकिन साफ है कि आने वाले कुछ हफ्तों में तेल बाजार और वैश्विक राजनीति दोनों भारत की जेब पर असर डालने वाले हैं।

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