यूक्रेन युद्ध में जा रही नेपालियों की जान, पुतिन की सेना ने दिया बहुत बड़ा धोखा, रूस ना दे रहा पैसे, ना बॉडी
Nepali Mercenaries in Ukraine: बेहिसाब गरीबी और कम समय में पैसे कमाने की चाहत में हजारों नेपाली युवा यूक्रेन में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं। गरीबी हटाने के लिए हजारों की संख्या में नेपाली युवा, रूसी सेना में शामिल हो गये, लेकिन अब स्थिति ये है, कि जो जिंदा हैं, उन्हें पैसे नहीं दिए जा रहे और जो मर चुके हैं, उनके बॉडी लाने की हैसियत परिवार के पास नहीं है।
हालांकि, महीनों की लड़ाई के बाद, रूस की तरफ से लड़ने वाले नेपाली सैनिक, युद्ध के मैदान से घर फोन करके कह रहे हैं, कि वे प्रशिक्षित नहीं हैं और उन्हें वह वेतन नहीं मिल रहा है, जिसका उनसे वादा किया गया था। जिंदा बचे सैनिकों का कहना है, युद्ध में उनके कई साथी मारे गये हैं, जिन्हें मरने के बाद दफना दिया गया है।

यूक्रेन में फंसे नेपालियों का खराब हाल
मृत जवानों के शवों को घर वापस लाने की उनके परिवारों की कोशिश अब तक निराशाजनक साबित हुई है। काठमांडू की एक महिला शांता को रूसी सेना ने उसके बड़े भाई की मृत्यु और दफनाने के बारे में सूचित किया था, और तब से वह अंतिम संस्कार के लिए उसके शरीर को वापस लाने की कोशिश कर रही है।
वहीं, यूक्रेन के आंतरिक मामलों के मंत्री एंटोन गेराशचेंको के सलाहकार ने पकड़े गए नेपाली सैनिक का वीडियो जारी किया, जिसने रूसी सेना के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया था। नेपाल के बरादिया के रहने वाले बिबेक खत्री नाम के सैनिक को अवदीवका के पास यूक्रेनी सशस्त्र बलों ने पकड़ लिया था।
बिबेक खत्री को वीडियो में कहते सुना जा रहा है, कि "मेरा परिवार संकट में है। मेरी मां काम नहीं करती है और हमें पैसों की ज़रूरत है। इसलिए, मैं इसके लिए (रूसी सेना में शामिल होने के लिए) गया।"
वीडियो में खत्री को यह कहते हुए देखा जा सकता है, कि उसके दोस्तों ने उसे पैसे कमाने के लिए रूसी सेना की तरफ से लड़ने के बारे में पता त वह जोर देकर कहते हैं कि यह उनके दोस्त ही थे, जिन्होंने पैसे कमाने के लिए रूसी सेना में शामिल होने का सुझाव दिया था। बिबेक को कहते सुना जा सकता है, कि "मैं एक सफल आदमी के रूप में अपनी मां के पास लौटना चाहता था। इसलिए, मैं शामिल हो गया।"

वहीं, नेपाली पत्रकार भद्र शर्मा का कहना है, कि वह लड़का एक गरीब परिवार से है और उसकी मां लकवे के कारण बिस्तर पर है। भद्र शर्मा कहते हैं, कि "नेपाल लोगों को नौकरी देने में नाकाम रहा है और यूक्रेन ने उन्हें बंदी बना लिया। बीमार मां उसकी शीघ्र रिहाई की प्रार्थना कर रही है।"
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भद्र शर्मा ने कहा, कि "नेपाल सहित कई देशों के युवा रूसी रक्षा बल में शामिल हुए हैं। रूसी सेना के साथ हुए समझौते के खिलाफ, उन्हें प्रशिक्षण पूरा करने से पहले ही युद्ध में भेज दिया गया। उन्हें ड्रोन और बंदूकें संभालने का प्रशिक्षण दिया गया।"
उन्होंने आगे कहा, कि "रूसी सेना में शामिल होने के बाद, कुछ लोग वहां युद्ध में मारे गए हैं, जबकि कई घायल हुए हैं। मृतकों को रूस में दफनाया गया है। परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार के लिए शव को घर वापस लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन रूसी सेना ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी है।"
नेपाल की रहने वाली हिन्दू महिला शांति अपने भाई के शव को लाने के लिए संघर्ष कर रही है।
मॉस्को से 200 मील दूर एक रूसी कब्रिस्तान में दफन अपने भाई संदीप थपलिया के शव को वापस लाने के लिए शांति हर चौखट पर जा रही है। शांता का मानना है, कि उनके भाई की आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी, जब तक कि उनके शरीर का अंतिम संस्कार नहीं कर दिया जाता। संदीप थपलिया ने 750 अमेरिकी डॉलर के काफी कम वेतन पर "अंतर्राष्ट्रीय शांति को बनाए रखने या बहाल करने की गतिविधियों" में भाग लेने के लिए रूसी रक्षा मंत्रालय के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट किया था।
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राजेंद्र बजगैन, जो नेपाल के गोरखा जिले के सांसद हैं, उन्होंने कहा, कि 'नेपाली सरकार कुछ नहीं कर रही है। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है, कि हमारे पीएम इसी जिले से चुने गए।'
कई परिवार जिनके बेटे और पति युद्ध में भाग लेने के लिए रूस गए थे, वे रूसी सेनाओं से प्रतिशोध के डर से रिकॉर्ड में आने से डरते हैं। उन्हें लगता है, कि अगर उनका नाम सार्वजनिक हुआ, तो वो मुसीबत में फंस सकते हैं।












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